पाठ - 7
नमक का दरोगा
(1) सभी शब्दार्थ पुस्तक से लिखेंगे व याद करेंगे।
(2) निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए -
1. " हम सरकारी हुक्म को _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ बाहर हो सकते है भला? ”
उत्तर : प्रस्तुत पंक्ति के वक्ता पंडित अलोपीदीन तथा श्रोता मुंशी वंशीधर हैं।
प्रश्न 2 वक्ता ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर : मुंशी वंशीधर ने पंडित अलोपीदीन की गाड़ियों को पुल पार करते समय रोक लिया था और अलोपीदीन मुंशी वंशीधर को रिश्वत देकर अपनी गाड़ियों को छुड़वाना चाहता था, इसीलिए उसने ऐसा कहा।
प्रश्न 3 गाड़ियों में क्या लदा था? पंडित अलोपीदीन कौन थे?
उत्तर : गाड़ियों में नमक के ढेले थे, जिसका चोरी-छिपे व्यापार किया जा रहा था। पंडित अलोपीदीन इलाके के सबसे प्रसिद्ध जमींदार थे।
प्रश्न 4 पंडित अलोपीदीन का किस पर अखंड विश्वास?
उत्तर : पंडित अलोपीदीन का लक्ष्मी जी पर अखंड विश्वास था ।
2. “पंडित जी ! मुझे ------ योग्य नहीं है।”
प्रश्न-1 पंडित जी ने वंशीधर को कौन-सा पद देने का निश्चय किया था ?
उत्तर : पंडित जी ने वंशीधर को अपनी सारी संपत्ति का स्थाई मैनेजर का पद देने का निश्चय किया था। छह हजार वार्षिक वेतन के अतिरिक्त रोज़ाना खर्च अलग, रहने के लिए बंगला तथा अन्य सुविधाएँ भी दी थी।
प्रश्न-2 पंडित अलोपीदीन वंशीधर की किस बात से प्रभावित थे?
उत्तर : पंडित अलोपीदीन वंशीधर की ईमानदारी तथा उसकी कर्तव्यपरायणता से प्रभावित थे।
प्रश्न - 3 प्रस्तुत पंक्ति किसने किससे कही हैं?
उत्तर - प्रस्तुत पंक्ति मुंशी वंशीधर ने पंडित अलोपीदीन से कही है।
प्रश्न - 4 प्रस्तुत पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर - प्रस्तुत पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी भी मूल्य पर अपने कर्त्तव्य, धर्म और सत्य के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए।