Monday, 18 May 2026

Class 8 : भिखारिन

पाठ 8
भिखारिन 

प्रस्तुत पंक्तियों को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
क. “सुबह से शाम तक वह इसी प्रकार हाथ फैलाए खड़ी रहती।”

प्र.1. बुढ़िया की जीविका का साधन क्या था?
उत्तर: बुढ़िया भीख माँगकर अपनी जीविका चलाती थी।
प्र.2. भिखारिन की झोपड़ी कहाँ थी?
उत्तर: भिखारिन की झोपड़ी मंदिर के पास थी।
प्र.3. झोपड़ी के पास पहुँचते ही उसके पास कौन आता था?
उत्तर: झोपड़ी के पास पहुँचते ही उसके पास दस वर्ष का एक लड़का उछलता -कूदना आता और उससे चिपट जाना।
प्र.4. लड़के का क्या नाम था?
उत्तर: लड़के का नाम मोहन था।
प्र.5. बुढ़िया मंदिर के दरवाजे पर क्यों खड़ी रहती थी?
उत्तर- अंधी बुढ़िया प्रतिदिन मंदिर के आगे भिक्षा मांगने के लिए खड़ी होती थी। 
प्र.6. बुढ़िया ने अपनी हाँडी किसके पास रखी?
उत्तर- बुढ़िया को डर था कि उसके इकट्ठा किए हुए पैसे कहीं चोरी न हो जाएं, इसलिए उसने अपनी हाँडी सेठ बनारसी दास के पास रखवा दी।

ख. "सेठ जी ने हाँड़ी की ओर देखकर कहा, "इसमें क्या है?"
​प्र०1- काशी में सेठ बनारसी दास का व्यक्तित्व कैसा था?
उत्तर- काशी में सेठ बनारसी दास बहुत प्रसिद्ध व्यक्ति थे। बच्चा-बच्चा उनकी कोठी से परिचित था। बनारसी दास बड़े देवभक्त और धर्मात्मा थे।

​प्र०2- अंधी ने हाँड़ी सेठ जी के आगे सरकाते हुए क्या कहा?
उत्तर- अंधी ने हाँड़ी सेठ जी के आगे सरका दी और उसने डरते-डरते कहा "सेठ जी! इसे अपने पास जमा कर लीजिए। मैं अंधी अपाहिज कहाँ रखती फिरूँगी?"

​प्र०3- मोहन को सेठ जी ने कैसे पहचाना?
उत्तर-   बच्चे को देखकर सेठ को ऐसा लगा कि उस बच्चे की सूरत उसके बेटे मोहन से मिलती है, जो सात वर्ष पूर्व खो गया था। जब उसकी जाँघ पर एक लाल रंग का चिह्न था। इस विचार के आते ही उन्हें विश्वास हो गया कि बच्चा उन्हीं का है।

​प्र०4- मोहन ने आँख खोलते ही किसे पुकारा?
उत्तर- मोहन ने आँख खोलने पर अपनी बुढ़िया माँ को पुकारा।

​प्र०5- सेठ जी के अनुचित व्यवहार पर बुढ़िया क्या सोच रही थी?
उत्तर- सेठ जी के अनुचित व्यवहार पर उसे रह-रहकर क्रोध आता था। वह सोचती इतना धनी व्यक्ति है, दो-चार रूपये दे देता तो क्या चला जाता? और फिर मैं उससे कुछ दान तो नहीं माँग रही थी, अपने ही रूपये माँग रही थी।
​प्र०6- पाठ के लेखक का नाम बताओ-
उत्तर- पाठ के लेखक का नाम रवीन्द्रनाथ टैगोर है।

​प्र०7- पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है।
उत्तर- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि स्वार्थ सिद्धि के लिए मानवता को कभी नहीं भूलना चाहिए। मानवीय मूल्य ही आपको महान बनाते हैं। संसार में कर्म प्रधान है धन नहीं।

Friday, 15 May 2026

Vihan class 7

पाठ - 6
विहान 

प्रस्तुत पंक्तियों को पढ़कर इन प्रश्नों का उत्तर दीजिए :-
(1) “नव - जीवन _ _ _ _ _ _ समान।”

प्र. 1) कवि किसका प्रेमी बनाना चाहता है?
उत्तर 1) कवि चिर महान की भक्ति कर उस अनंत शक्ति का प्रेमी बनने की कामना कर रहे हैं जो मानवता का कल्याण कर सके ।

प्र. 2) कवि विश्व में क्या लाने की इच्छा रखते हैं?
उत्तर 2) कवि विश्व में नव विहान लाने की इच्छा रखते हैं।

प्र. 3) इस प्रकार के कर्म करके कवि क्या करना चाहता है?
उत्तर 3) इस प्रकार के कर्म करके कवि मानव परित्राण करना चाहता है, जिससे जीवन में भय, संदेह और अंधविश्वास नष्ट हो व शांति का संदेश हो।

प्र. 4) प्रस्तुत पंक्तियाँ किस कविता से ली गई हैं? कवि का क्या नाम है?
उत्तर 4) प्रस्तुत पंक्तियाँ “विहान'' नामक कविता से ली गई हैं। इसके कवि  सुमित्रानंदन पंत जी हैं।



(2) “पाकर _ _ _ _ _ _ _विहान।”

प्र.1. कवि कैसा प्रकाश बनना चाहता है?
उत्तर : कवि सभी को समान रूप में प्रकाशित करने वाला प्रकाश बनना चाहता है।
प्र.2. ‘नवजीवन’ का विहान’ पाने का आश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : इसका अर्थ संसार के संघर्षम्य वातावरण को परिवर्तित करके शांतिमय वातावरण का सृजन करना है।
प्र.3. ‘परित्राण’ व ‘अमरदान’ शब्दों के अर्थ लिखिए।
उत्तर : परित्राण शब्द का अर्थ ‘रक्षा करना’ है तथा अमरदान शब्द का अर्थ है — हमेशा के लिए किसी वस्तु का दान करना।
प्र.4. प्रस्तुत पंक्तियों में प्रयोग किए गए तुकांत शब्द लिखिए।
उत्तर-4. तुकांत शब्द — विहान व दान

प्र.5. कवि क्या कामना करना चाहता है?
उत्तर-5. कवि सभी को समान रूप में प्रकाशित करने वाला प्रकाश बनने की कामना करना चाहता है।

प्र.6. प्रस्तुत कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: प्रस्तुत कविता में बताया गया है कि यदि प्रत्येक मनुष्य सत्य और प्रेम का आचरण करे तथा परस्पर  सहयोग और शांति से रहे तो विश्व में शीघ्र ही सुंदर व शांत नव विहान का आगमन होगा।

Wednesday, 13 May 2026

Namak Ka Daroga Class 7

पाठ - 7
नमक का दरोगा 

(1) सभी शब्दार्थ पुस्तक से लिखेंगे व याद करेंगे।

(2) निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए - 

1. " हम सरकारी हुक्म को _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ बाहर हो सकते है भला? ”

प्रश्न 1: प्रस्तुत पंक्ति के वक्ता तथा श्रोता कौन हैं?
उत्तर : प्रस्तुत पंक्ति के वक्ता पंडित अलोपीदीन तथा श्रोता मुंशी वंशीधर हैं।

प्रश्न 2  वक्ता ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर : मुंशी वंशीधर ने पंडित अलोपीदीन की गाड़ियों को पुल पार करते समय रोक लिया था और अलोपीदीन मुंशी वंशीधर को रिश्वत देकर अपनी गाड़ियों को छुड़वाना चाहता था, इसीलिए उसने ऐसा कहा।

प्रश्न 3 गाड़ियों में क्या लदा था? पंडित अलोपीदीन कौन थे?
उत्तर : गाड़ियों में नमक के ढेले थे,  जिसका चोरी-छिपे व्यापार किया जा रहा था। पंडित अलोपीदीन इलाके के सबसे प्रसिद्ध जमींदार थे।

प्रश्न 4 पंडित अलोपीदीन का किस पर अखंड विश्वास?
उत्तर : पंडित अलोपीदीन का लक्ष्मी जी पर अखंड विश्वास था ।


2.  “पंडित जी ! मुझे ------ योग्य नहीं है।”

प्रश्न-1 पंडित जी ने वंशीधर को कौन-सा पद देने का निश्चय किया था ?
उत्तर : पंडित जी ने वंशीधर को अपनी सारी संपत्ति का स्थाई मैनेजर का पद देने का निश्चय  किया था। छह हजार वार्षिक वेतन के अतिरिक्त रोज़ाना खर्च अलग, रहने के लिए बंगला तथा अन्य सुविधाएँ भी दी थी।
प्रश्न-2 पंडित अलोपीदीन वंशीधर की किस बात से प्रभावित थे?
उत्तर : पंडित अलोपीदीन वंशीधर की ईमानदारी तथा उसकी कर्तव्यपरायणता से प्रभावित थे।

प्रश्न - 3 प्रस्तुत पंक्ति किसने किससे कही हैं?
उत्तर - प्रस्तुत पंक्ति मुंशी वंशीधर ने पंडित अलोपीदीन से कही है।

प्रश्न - 4 प्रस्तुत पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर - प्रस्तुत पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी भी मूल्य पर अपने कर्त्तव्य, धर्म और सत्य के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए।

Class 8 : भिखारिन

पाठ 8 भिखारिन  प्रस्तुत पंक्तियों को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए - क. “सुबह से शाम तक वह इसी प्रकार हाथ फैलाए खड़ी रहती।” प्र.1. बुढ़िया क...