Sunday, 12 July 2026

Bhikshuk


भिक्षुक
कवि - सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

 निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

1. वह आता –
दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता।
पेट-पीठ दोनों मिलकर है एक,
चल रहा लकुटिया टेक,
मुट्ठी भर दाने को - भूख मिटाने को
मुँह फटी-पुरानी झोली को फैलता –
दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता

प्रश्न – 1 ‘दो टूक कलेजे के करता’ - से कवि का क्या आशय है ?

उत्तर – हिंदी के निराले कवि ‘सूर्यकांत त्रिपाठी निराला’ जी द्वारा रचित उपर्युक्त पंक्ति का आशय यह है कि एक भिक्षुक हृदय से दुखी होता हुआ पश्चताप करता हुआ सड़क पर आ रहा है, वह लोगों से कुछ खाने के लिए माँगता है परंतु उसे बदले में केवल अपमान और फटकार ही मिलती है। इसलिए उसका हृदय टूट जाता है।

प्रश्न – 2 ‘पेट-पीठ दोनों मिलकर है एक’ - पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए ?

उत्तर – ‘पेट-पीठ दोनों मिलकर है एक’ - पंक्ति का आशय यह है कि एक दुखी भिक्षुक काफी दिनों से भूखा है। उसे कुछ भी खाने के लिए प्राप्त नहीं हुआ, जिसके परिणामस्वरूप उसका पेट और पीठ मिलकर एक हो गए है। लोगों से भीख माँगने पर भी उसे केवल अपमान और दुख ही प्राप्त होता है।

प्रश्न - 3 उपर्युक्त पंक्तियों के आधार पर भिक्षुक की दयनीय दशा का वर्णन कीजिए।

उत्तर – उपरोक्त पंक्तियों में महाकवि ‘सूर्यकांत त्रिपाठी निराला’ जी ने एक असहाय भिक्षुक की दयनीय दशा का चित्रण करते हुए कहा है कि वह हृदय से दुखी होता हुआ और अपने भाग्य पर पछताता हुआ लाठी के सहारे सड़क पर आ रहा है। वह कई दिनों से भूखा है जिस कारण उसका पेट और पीठ मिल गए हैं,परंतु उसकी दयनीय दशा का निवारण करने वाला कोई नहीं। वह मुट्ठी भर दाने पाने के लिए बड़ी उम्मीद से अपनी झोली फैला रहा है।

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने लोगों की दयाहीनता की भावना को प्रदर्शित किया है। एक भिक्षुक जो कई दिनों से भूखा प्रतीत होता हैं और जिस कारण उसका पेट और पीठ एक हो गए हैं, लाठी के सहारे सड़क पर आ रहा है और झोली फैलाकर लोगों से मुट्ठी भर दाने की गुहार लगा रहा है लेकिन लोगों में दयाहीनता होने के कारण उसे भूखा रहना पड़ता है।


2. साथ दो बच्चे भी हैं सदा हाथ फैलाए,
 बाएँ से वे मलते हुए पेट को चलते,
 और दाहिना दया-दृष्टि पाने की ओर बढ़ाएं।
 भूख से सुख ओंठ जब जाते,
 दाता-भाग्य, विधाता से क्या पाते?
 घूँट आँसुओं का पीकर रह जाते।

प्रश्न – 1 भिक्षुक के साथ कौन है? वे क्या कर रहे हैं तथा क्यों? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – भिक्षुक के साथ दो बच्चे भी हैं। अपनी भूख प्रदर्शित करने के लिए और लोगों का ध्यान केंद्रित करने के लिए वे अपने बाएँ हाथ से अपना पेट मिल रहे हैं और दाहिने हाथ से लोगों से कुछ सहायता करने की प्रार्थना कर रहे हैं।

प्रश्न – 2 ‘दाता-भाग्य-विधाता’ ने कवि का संकेत किन की ओर है? कौन किन से क्या प्राप्त नहीं कर पाते ?

उत्तर – दाता-भाग्य विधाता से कवि का संकेत उन लोगों की ओर है जो उनको भोजन देने के लिए समर्थ हैं, परंतु दयाहीनता के अभाव में वे उन्हें असहाय छोड़ देते हैं। भिक्षुक के दोनों बच्चे आने वाले लोगों से कुछ भी खाने के लिए प्राप्त नहीं कर पाते।

प्रश्न – 3 ‘घूँट आँसुओं का पीकर रह जाते’ - मुहावरे का प्रयोग कवि ने किस संदर्भ में किया है? 

उत्तर – जब बच्चे और भिक्षुक लोगों के सामने हाथ फैलाते हैं, तब लोगों द्वारा कुछ न प्राप्त करने के कारण एवं भूखे रहने के कारण उनके होंठ सूख जाते हैं। वही अपमान और दुख के कारण वे आँसुओ का घूँट पीकर रह जाते हैं अर्थात अपना मन मसोसकर रह जाते हैं।

 प्रश्न – 4 भिक्षुक के बच्चों की दयनीय दशा का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर – भिक्षुक के बच्चे अपने हाथ फैलाकर लोगों से भिक्षा माँग रहे हैं। बच्चे अपने बाएँ हाथ से अपना पेट मल रहे हैं और दाहिने हाथ से लोगों से कुछ दया, सहायता करने की प्रार्थना कर रहे हैं। वे इतने भूखे हैं कि उनके होंठ सूख चुके हैं। लोगों से अपमान और दुख के अतिरिक्त उन्हें कुछ भी प्राप्त नहीं होता।

3. चाट रहे जूठी पत्तल वे, कभी सड़क पर खड़े हुए,
और झपट लेने को उनसे कुत्ते भी हैं अड़े हुए।
 ठहरो, अहो। मेरे हृदय में है अमृत, मैं सींच दूँगा।
 अभिमन्यु-जैसे हो सकोगे तुम,
 तुम्हारे दुख में मैं अपने हृदय को खींच लूँगा।

प्रश्न – 1 भिक्षुक तथा उसके बच्चे क्या करने के लिए विवश है और क्यों?

उत्तर – कई दिनों से भूखे रहने के कारण भिक्षुक तथा उसके बच्चे जूठी पत्तल चाटने को विवश हैं। अनेक प्रयासों व प्रार्थनाओं के बाद भी भिक्षुक व बच्चों को आसपास के लोगों से कुछ भी प्राप्त नहीं हो पाता, इसलिए वे सड़क पर जूठी पत्तलों का बचा हुआ थोड़ा-सा भोजन चाट-चाटकर वे अपनी भूख मिटाने का प्रयत्न कर रहे हैं।

प्रश्न – 2 ‘और झपट लेने को उनसे कुत्ते भी हैं अड़े हुए’ - पंक्ति द्वारा कवि क्या स्पष्ट करना चाहता है?

उत्तर – भिक्षुक व उसके बच्चे कई दिनों से भूखे हैं और किसी से भी कोई सहायता नहीं मिलने के कारण वे सड़क पर झूठी पत्तलों पर बचा-खुचा थोड़ा-सा भोजन चाट-चाट कर अपनी भूख मिटाने का प्रयत्न कर रहे हैं लेकिन उसके लिए भी उन्हें कुत्तों से संघर्ष करना पड़ रहा है। अतः निराला जी यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि भिक्षुक व उसके बच्चों की दशा पशुओं से भी हीन है।

प्रश्न – 3 भिक्षुक कविता में कवि ने समाज को किस बात के लिए फटकारा है?

उत्तर – भिक्षुक कविता में कवि ने समाज के समर्थ वर्ग के लोगों को फटकारा है जो समर्थ होते हुए भी भीख नहीं देते हैं और उन्हें अपमान करके भगा देते हैं। इसी दयाहीनता के कारण वह व्यक्ति भूखा मर जाता है। इसी बात के लिए निराला जी ने ऐसे दयाहीन समाज को फटकारा है।

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों में कवि ने ‘अभिमन्यु’ शब्द का प्रयोग किस लिए किया है?

उत्तर – कवि ने ‘अभिमन्यु’ शब्द का प्रयोग भिक्षुक को प्रेरित करने के लिए किया है ताकि वे अभिमन्यु के समान संघर्ष कर सके। जिस प्रकार अभिमन्यु अकेले ही युद्ध में चक्रव्यूह भेदने के लिए गया था पर अंत में वह लौटते समय सात महारथियों के एक साथ प्रहार से मर गया था और मरने के बाद भी अपनी वीरता के कारण हमेशा के लिए अमर हो गया। इसी तरह की कल्पना कवि भिक्षुक के लिए भी करते हैं।

Wednesday, 8 July 2026

Hindi Ch 6 सम्मान

 प्रस्तुत पंक्तियों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखकर लिखिए - 

1. “क्या मैं अछूत हूँ जो आप मेरे साथ खाना नहीं खाती?”
प्र०-1 प्रस्तुत पंक्ति के वक्ता व श्रोता कौन हैं?
उत्तर : प्रस्तुत पंक्ति के वक्ता निभा व 
श्रोता उसकी साथ की लड़कियाँ हैं।
प्र०-२ लड़कियों ने निभा की बात का क्या जवाब दिया?
उत्तर :  लड़कियों ने निभा को जवाब देते हुए कहा कि हमें गँवारों के साथ खाना अच्छा नहीं लगता।
प्र०- 3 निभा कैसी लड़की थी?
उत्तर : निभा एक सकारात्मक विचारों वाली प्रतिभाशाली व बुद्धिमान लड़की थी।


2. “तुमने अपने परिवार _ _ _ _ _ _ _प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।”

प्र०-1 प्रस्तुत पंक्तियां किसने, किससे कही है?
उत्तर प्रस्तुत पंक्तियाँ जिलाधिकारी साहब ने निभा से कही है।

प्र०-२ जिलाधिकारी साहब ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर : निभा ने कला संगीत व पढ़ाई में पूरे प्रदेश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया था। इसी कारण जिलाधिकारी साहब ने निभा को बधाई देते हुए ऐसा कहा।

प्र०-३ जिलाधिकारी साहब निभा के घर क्यों गए थे?
उत्तर : जिलाधिकारी साहब निभा के घर उसे बधाई देने तथा राज्यपाल के द्वारा दिए जाने वाला सम्मान का आमंत्रण पत्र देने गए थे।

कक्षा 7 : संस्कृत : पाठ 2 : नीतिश्लोक

कक्षा 7
पाठ 3 नीति- श्लोक 

​1. पहला श्लोक
​श्लोक: विद्या ददाति विनयं, विनयाद्याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति, धनाद् धर्मः ततः सुखम्।।
​सरल अनुवाद: विद्या (ज्ञान) हमें विनम्रता देती है। विनम्रता से इंसान में योग्यता (पात्रता) आती है। योग्यता होने से धन की प्राप्ति होती है, धन से इंसान धर्म के कार्य (अच्छे काम) करता है और अंत में उसे सुख मिलता है।
​सीख: अगर हम अच्छे से पढ़ाई करेंगे, तो हमारे जीवन में सुख-शांति अपने आप आ जाएगी।

​2. दूसरा श्लोक
​श्लोक: आचारः प्रथमो धर्मः, आचारः परमं तपः।
आचारः परमं ज्ञानम्, आचारात् किं न सिध्यति।।
​सरल अनुवाद: अच्छा आचरण (अच्छा व्यवहार या संस्कार) ही सबसे पहला धर्म है। अच्छा आचरण ही सबसे बड़ी तपस्या है और अच्छा आचरण ही सबसे बड़ा ज्ञान है। अच्छे आचरण से दुनिया में ऐसा क्या है जो हासिल नहीं किया जा सकता? (अर्थात, अच्छे व्यवहार से सब कुछ मिल सकता है)।
​सीख: हमें हमेशा सबके साथ तमीज और अच्छे संस्कार से पेश आना चाहिए।

​3. तीसरा श्लोक
​श्लोक: प्रिय-वाक्य-प्रदानेन, सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।
तस्मात्तदेव वक्तव्यं, वचने का दरिद्रता।।
​सरल अनुवाद: मीठे और प्यारे वचन (बोल) बोलने से सभी जीव-जंतु और इंसान खुश हो जाते हैं। इसलिए हमें हमेशा मीठी वाणी ही बोलनी चाहिए। भला अच्छे और मीठे बोल बोलने में कैसी कंजूसी (दरिद्रता)?
​सीख: हमेशा सबसे प्यार से बात करनी चाहिए, क्योंकि मीठा बोलने में कोई पैसे नहीं लगते!

​4. चौथा श्लोक
​श्लोक: छायामन्यस्य कुर्वन्ति, स्वयं तिष्ठन्ति आतपे।
फलान्यपि परार्थाय, वृक्षाः सत्पुरुषाः इव।।
​सरल अनुवाद: पेड़ खुद तो कड़ी धूप में खड़े रहते हैं, लेकिन दूसरों को ठंडी छाया देते हैं। उनके फल भी दूसरों के भले के लिए (खाने के लिए) ही होते हैं। सचमुच, पेड़ सज्जन (अच्छे) लोगों की तरह होते हैं, जो हमेशा दूसरों की मदद करते हैं।
​सीख: हमें भी पेड़ों की तरह परोपकारी बनना चाहिए और दूसरों की मदद करनी चाहिए।

​5. पांचवां श्लोक
​श्लोक: प्राणान् त्यजति देशाय, पीडितानां सहायकः।
यः आचरति कल्याणं, लोके मानं सः विन्दति।।
​सरल अनुवाद: जो इंसान अपने देश के लिए अपने प्राण तक दे देता है, जो दुखियों और पीड़ितों की मदद करता है और जो हमेशा सबका भला (कल्याण) करता है—वही इंसान इस संसार में सच्चा सम्मान और आदर पाता है।
​सीख: देशप्रेम और दूसरों की सेवा करने वाले इंसान को दुनिया हमेशा याद रखती है।

​6. छठा श्लोक
​श्लोक: जाड्यं धियो हरति, सिञ्चति वाचि सत्यम्,
मानोन्नतिं दिशति, पापमपाकरोति।
चेतः प्रसादयति, दिक्षु तनोति कीर्तिम्,
सत्सङ्गतिः कथय, किं न करोति पुंसाम्।।

​सरल अनुवाद: अच्छी संगति (सत्सङ्गति) इंसान के लिए क्या-क्या नहीं करती?
​यह बुद्धि की मूर्खता को दूर करती है।
​हमारी वाणी (बोली) में सच्चाई भरती है।
​समाज में मान-सम्मान बढ़ाती है।
​हमें पाप और गलत कामों से बचाती है।
​हमारे मन को खुश रखती है।
​चारों दिशाओं में हमारा यश (नाम) फैलाती है।
सच कहो, अच्छे दोस्तों की संगति इंसान का हर तरह से भला करती है!
​सीख: हमें हमेशा अच्छे और संस्कारी बच्चों को ही अपना दोस्त बनाना चाहिए।

Class 7 : संस्कृत : पाठ 6 : ऋषिकेश

कक्षा 7 - पाठ 6
ऋषिकेश 

हमारे देश का नाम भारतवर्ष है, जो बहुत ही सुंदर और विशाल (भव्य) है। इस देश में सब जगह प्राकृतिक सुंदरता दिखाई देती है। भारत के विशाल और सुंदर स्थानों में 'ऋषिकेश' भी एक देखने योग्य (दर्शनीय) स्थान है।
ऋषिकेश, गंगा के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल 'हरिद्वार' से 19 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ों से घिरा हुआ है। यहाँ गंगा अपनी प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। गंगा और पहाड़ों की हरियाली से घिरा हुआ ऋषिकेश एक बहुत ही सुंदर और पवित्र तीर्थ स्थल है।
साधु और महात्मा लोग इस स्थान पर अपनी आत्मा और परमात्मा का ध्यान करते हैं। इसके अलावा, कवि और लेखक भी यहाँ की कोमल कल्पनाओं में डूबकर अपनी कलम से सुंदर काव्यों की रचना करते हैं।
वैज्ञानिक रूप से भी ऋषिकेश का बहुत महत्व है। यहाँ स्थित पर्वत श्रृंखलाओं (पहाड़ों) में कई प्रकार की औषधियाँ (जड़ी-बूटियाँ) भी पैदा होती हैं। आयुर्वेद के आचार्य (डॉक्टर) उनका उपयोग भयानक बीमारियों को ठीक करने के लिए करते हैं।
ऋषिकेश के देखने योग्य स्थानों में 'लक्ष्मण झूला' सबसे पहला (प्रमुख) है। यह एक ऐसा पुल है जिसका निर्माण गंगा नदी को पार करने के लिए किया गया था। जब इस पुल पर लोग चलते हैं, तब यह हिलता (कंपित होता) है। यहाँ 'गरुड़ चट्टी' भी एक दर्शनीय स्थल है।
इस स्थान से थोड़ी ही दूरी पर 'गीता भवन' नाम का प्रसिद्ध आश्रम है। महर्षि कण्व का आश्रम भी इसी स्थान पर था। राजा भरत की माता शकुंतला का पालन-पोषण भी इसी आश्रम में हुआ था। नगरों के शोर-शराबे (कोलाहल) से दूर यह स्थान वास्तव में आत्म-उन्नति (आध्यात्मिक विकास) का स्थान है।

Monday, 6 July 2026

ch 8 Sanskrit class 6


लंबे समय की गुलामी (परतंत्रता) के कष्ट को सहकर हमारा देश भारत वर्ष 1947 में अगस्त महीने की पंद्रह तारीख को अंग्रेजों के शासन से स्वतंत्र हुआ। तब भारत का नवीन संविधान वर्ष 1950 में जनवरी महीने की छब्बीस तारीख से लागू (प्रचलित) हुआ। इसलिए, गणतंत्र शासन की शुरुआत होने के कारण इस दिन को **'गणतंत्र दिवस'** कहा जाता है। अतः हम हर वर्ष इस दिन महान उत्सव (महोत्सव) मनाते हैं।
इस दिन सब जगह अवकाश (छुट्टी) होती है। भारत के सभी शहरों और गाँवों में गणतंत्र दिवस का भव्य (महान) समारोह होता है। सभी लोग अपने-अपने शहरों और गाँवों में बड़े उत्साह और उल्लास के साथ गणतंत्र दिवस का आयोजन करते हैं। परंतु देश की राजधानी दिल्ली तो इस अवसर पर विशेष रूप से सजी होती है।
भारत की राजधानी दिल्ली नगरी में सभी प्रदेशों (राज्यों) से लोग समारोह देखने आते हैं। सुबह से ही लाखों लोग 'भारत द्वार' (**इंडिया गेट**) पर एकत्रित होते हैं। तब राष्ट्रपति अपने विशेष वाहन से अंगरक्षकों के साथ विजय चौक (विजय-चतुष्पथ) पर आते हैं। तोपों की गर्जना (सलामी) से राष्ट्रपति का अभिनंदन किया जाता है। इसके बाद जल सेना, थल सेना और वायु सेना के सैनिक राष्ट्रपति का अभिवादन करते हैं। इसके बाद हवाई जहाज (वायुयान) आकाश से फूलों की वर्षा करते हैं।
लाखों लोग यह सब देखकर तालियाँ बजाते हैं और राष्ट्र की सेवा के लिए प्रतिज्ञा करते हैं। वास्तव में, गणतंत्र दिवस भारत के लिए महान गौरव प्रदान करने वाला है।

Class 6 - नर हो न निराश करो मन को


​निम्नलिखित प्रश्नों को पढ़कर उत्तर लिखो :—

​1. "संभलो की सुयोग न जाए चला — — — को।
​प्र० 1 मनुष्य जीवन की सार्थकता किसमे है?
​उ० - मनुष्य जीवन की सार्थकता निरंतर ऐसे कर्म करते हुए जीवन व्यतीत करने में है जिससे जीवन सार्थक हो सकें, और दूसरों का हित हो सकें।

​प्र० 2 मनुष्य को सदैव किस बात का ज्ञान रखना चाहिए?
​उ० - मनुष्य को सदैव अपने गौरव व आत्मसम्मान का ज्ञान रहना चाहिए।

​प्र० 3 मनुष्य को अपने गौरव का किस प्रकार ध्यान रखना चाहिए?
​उ० - मनुष्य को अपने गौरव का ध्यान इस प्रकार के कर्म करके रखना चाहिए, जिससे किसी भी मूल्य पर उसके मान-सम्मान को ठेस न लगने पाये।

​प्र० 4 मानव जीवन की सार्थकता क्या होती है?
​उ० - मनुष्य जीवन की सार्थकता बिना निराश हुए कर्म करते रहने में होती है।


​2. "प्रभु — — — मन को।"
​प्र० 1 प्रस्तुत पंक्तियों को माध्यम से कवि हमे क्या समझाना चाहते हैं?
​उ० - कवि समझाना चाहते हैं कि मनुष्य को कभी कर्त्तव्य पथ से विमुख नही होना चाहिए। सह सदैव प्रसन्नता के साथ कर्म करते रहना चाहिए। फल की आशा नही करनी चाहिए।

​प्र० 2 मनुष्य — — — प्रभु ने क्या दान में दिया?
​उ० - मनुष्य को भगवान ने हाथ दान मे दिए है जिनसे वह अवांछित वस्तु को भी प्राप्त कर सकते हैं।

​प्र० 3 मनुष्य संसार मे यश का भागी कैसे बनेगा?
​उ० - मनुष्य को नित्य अपने गौरव का ध्यान रहना चाहिए तभी वह अच्छे कार्य कर संसार में यश प्राप्त करेगा।

​प्र० 4 मनुष्य किसका अंश है?
​उ० - मनुष्य जगदीश्वर अर्थात् ईश्वर का अंश है।
​प्र० 5 वांछित व अलभ्य शब्दों का अर्थ लिखो।
​उ० - वांछित व अलभ्य का अर्थ - इच्छित और अलभ्य का अर्थ – अप्राप्य है।

​प्र० 6 प्रस्तुत कविता से हमे क्या सीख मिलती है?
​उ० - "मन को हारे हार है मन के जीते जीत" मनुष्य को अपने मन को कभी उदास व निराश नही होने देना चाहिए।

Sunday, 5 July 2026

Monday, 18 May 2026

Class 8 : भिखारिन

पाठ 8
भिखारिन 

प्रस्तुत पंक्तियों को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
क. “सुबह से शाम तक वह इसी प्रकार हाथ फैलाए खड़ी रहती।”

प्र.1. बुढ़िया की जीविका का साधन क्या था?
उत्तर: बुढ़िया भीख माँगकर अपनी जीविका चलाती थी।
प्र.2. भिखारिन की झोपड़ी कहाँ थी?
उत्तर: भिखारिन की झोपड़ी मंदिर के पास थी।
प्र.3. झोपड़ी के पास पहुँचते ही उसके पास कौन आता था?
उत्तर: झोपड़ी के पास पहुँचते ही उसके पास दस वर्ष का एक लड़का उछलता -कूदना आता और उससे चिपट जाना।
प्र.4. लड़के का क्या नाम था?
उत्तर: लड़के का नाम मोहन था।
प्र.5. बुढ़िया मंदिर के दरवाजे पर क्यों खड़ी रहती थी?
उत्तर- अंधी बुढ़िया प्रतिदिन मंदिर के आगे भिक्षा मांगने के लिए खड़ी होती थी। 
प्र.6. बुढ़िया ने अपनी हाँडी किसके पास रखी?
उत्तर- बुढ़िया को डर था कि उसके इकट्ठा किए हुए पैसे कहीं चोरी न हो जाएं, इसलिए उसने अपनी हाँडी सेठ बनारसी दास के पास रखवा दी।

ख. "सेठ जी ने हाँड़ी की ओर देखकर कहा, "इसमें क्या है?"
​प्र०1- काशी में सेठ बनारसी दास का व्यक्तित्व कैसा था?
उत्तर- काशी में सेठ बनारसी दास बहुत प्रसिद्ध व्यक्ति थे। बच्चा-बच्चा उनकी कोठी से परिचित था। बनारसी दास बड़े देवभक्त और धर्मात्मा थे।

​प्र०2- अंधी ने हाँड़ी सेठ जी के आगे सरकाते हुए क्या कहा?
उत्तर- अंधी ने हाँड़ी सेठ जी के आगे सरका दी और उसने डरते-डरते कहा "सेठ जी! इसे अपने पास जमा कर लीजिए। मैं अंधी अपाहिज कहाँ रखती फिरूँगी?"

​प्र०3- मोहन को सेठ जी ने कैसे पहचाना?
उत्तर-   बच्चे को देखकर सेठ को ऐसा लगा कि उस बच्चे की सूरत उसके बेटे मोहन से मिलती है, जो सात वर्ष पूर्व खो गया था। जब उसकी जाँघ पर एक लाल रंग का चिह्न था। इस विचार के आते ही उन्हें विश्वास हो गया कि बच्चा उन्हीं का है।

​प्र०4- मोहन ने आँख खोलते ही किसे पुकारा?
उत्तर- मोहन ने आँख खोलने पर अपनी बुढ़िया माँ को पुकारा।

​प्र०5- सेठ जी के अनुचित व्यवहार पर बुढ़िया क्या सोच रही थी?
उत्तर- सेठ जी के अनुचित व्यवहार पर उसे रह-रहकर क्रोध आता था। वह सोचती इतना धनी व्यक्ति है, दो-चार रूपये दे देता तो क्या चला जाता? और फिर मैं उससे कुछ दान तो नहीं माँग रही थी, अपने ही रूपये माँग रही थी।
​प्र०6- पाठ के लेखक का नाम बताओ-
उत्तर- पाठ के लेखक का नाम रवीन्द्रनाथ टैगोर है।

​प्र०7- पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है।
उत्तर- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि स्वार्थ सिद्धि के लिए मानवता को कभी नहीं भूलना चाहिए। मानवीय मूल्य ही आपको महान बनाते हैं। संसार में कर्म प्रधान है धन नहीं।

Friday, 15 May 2026

Vihan class 7

पाठ - 6
विहान 

प्रस्तुत पंक्तियों को पढ़कर इन प्रश्नों का उत्तर दीजिए :-
(1) “नव - जीवन _ _ _ _ _ _ समान।”

प्र. 1) कवि किसका प्रेमी बनाना चाहता है?
उत्तर 1) कवि चिर महान की भक्ति कर उस अनंत शक्ति का प्रेमी बनने की कामना कर रहे हैं जो मानवता का कल्याण कर सके ।

प्र. 2) कवि विश्व में क्या लाने की इच्छा रखते हैं?
उत्तर 2) कवि विश्व में नव विहान लाने की इच्छा रखते हैं।

प्र. 3) इस प्रकार के कर्म करके कवि क्या करना चाहता है?
उत्तर 3) इस प्रकार के कर्म करके कवि मानव परित्राण करना चाहता है, जिससे जीवन में भय, संदेह और अंधविश्वास नष्ट हो व शांति का संदेश हो।

प्र. 4) प्रस्तुत पंक्तियाँ किस कविता से ली गई हैं? कवि का क्या नाम है?
उत्तर 4) प्रस्तुत पंक्तियाँ “विहान'' नामक कविता से ली गई हैं। इसके कवि  सुमित्रानंदन पंत जी हैं।



(2) “पाकर _ _ _ _ _ _ _विहान।”

प्र.1. कवि कैसा प्रकाश बनना चाहता है?
उत्तर : कवि सभी को समान रूप में प्रकाशित करने वाला प्रकाश बनना चाहता है।
प्र.2. ‘नवजीवन’ का विहान’ पाने का आश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : इसका अर्थ संसार के संघर्षम्य वातावरण को परिवर्तित करके शांतिमय वातावरण का सृजन करना है।
प्र.3. ‘परित्राण’ व ‘अमरदान’ शब्दों के अर्थ लिखिए।
उत्तर : परित्राण शब्द का अर्थ ‘रक्षा करना’ है तथा अमरदान शब्द का अर्थ है — हमेशा के लिए किसी वस्तु का दान करना।
प्र.4. प्रस्तुत पंक्तियों में प्रयोग किए गए तुकांत शब्द लिखिए।
उत्तर-4. तुकांत शब्द — विहान व दान

प्र.5. कवि क्या कामना करना चाहता है?
उत्तर-5. कवि सभी को समान रूप में प्रकाशित करने वाला प्रकाश बनने की कामना करना चाहता है।

प्र.6. प्रस्तुत कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: प्रस्तुत कविता में बताया गया है कि यदि प्रत्येक मनुष्य सत्य और प्रेम का आचरण करे तथा परस्पर  सहयोग और शांति से रहे तो विश्व में शीघ्र ही सुंदर व शांत नव विहान का आगमन होगा।

Wednesday, 13 May 2026

Namak Ka Daroga Class 7

पाठ - 7
नमक का दरोगा 

(1) सभी शब्दार्थ पुस्तक से लिखेंगे व याद करेंगे।

(2) निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए - 

1. " हम सरकारी हुक्म को _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ बाहर हो सकते है भला? ”

प्रश्न 1: प्रस्तुत पंक्ति के वक्ता तथा श्रोता कौन हैं?
उत्तर : प्रस्तुत पंक्ति के वक्ता पंडित अलोपीदीन तथा श्रोता मुंशी वंशीधर हैं।

प्रश्न 2  वक्ता ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर : मुंशी वंशीधर ने पंडित अलोपीदीन की गाड़ियों को पुल पार करते समय रोक लिया था और अलोपीदीन मुंशी वंशीधर को रिश्वत देकर अपनी गाड़ियों को छुड़वाना चाहता था, इसीलिए उसने ऐसा कहा।

प्रश्न 3 गाड़ियों में क्या लदा था? पंडित अलोपीदीन कौन थे?
उत्तर : गाड़ियों में नमक के ढेले थे,  जिसका चोरी-छिपे व्यापार किया जा रहा था। पंडित अलोपीदीन इलाके के सबसे प्रसिद्ध जमींदार थे।

प्रश्न 4 पंडित अलोपीदीन का किस पर अखंड विश्वास?
उत्तर : पंडित अलोपीदीन का लक्ष्मी जी पर अखंड विश्वास था ।


2.  “पंडित जी ! मुझे ------ योग्य नहीं है।”

प्रश्न-1 पंडित जी ने वंशीधर को कौन-सा पद देने का निश्चय किया था ?
उत्तर : पंडित जी ने वंशीधर को अपनी सारी संपत्ति का स्थाई मैनेजर का पद देने का निश्चय  किया था। छह हजार वार्षिक वेतन के अतिरिक्त रोज़ाना खर्च अलग, रहने के लिए बंगला तथा अन्य सुविधाएँ भी दी थी।
प्रश्न-2 पंडित अलोपीदीन वंशीधर की किस बात से प्रभावित थे?
उत्तर : पंडित अलोपीदीन वंशीधर की ईमानदारी तथा उसकी कर्तव्यपरायणता से प्रभावित थे।

प्रश्न - 3 प्रस्तुत पंक्ति किसने किससे कही हैं?
उत्तर - प्रस्तुत पंक्ति मुंशी वंशीधर ने पंडित अलोपीदीन से कही है।

प्रश्न - 4 प्रस्तुत पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर - प्रस्तुत पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी भी मूल्य पर अपने कर्त्तव्य, धर्म और सत्य के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए।

Tuesday, 31 March 2026

Class 8 मैं सुमन हूँ / बाँस

पाठ – 1 : मैं सुमन हूँ
1. प्रस्तुत कविता के शब्दार्थ पुस्तक से लिखें।
2. प्रस्तुत पंक्तियों को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(क) व्योम के नीचे _ _ _ _ _ _ मैं सुमन हूँ।
प्रश्न 1 सुमन का आवास कहाँ होता है?
उत्तर : सुमन का आवास खुले आकाश के नीचे होता है।
प्रश्न 2 सुमन किसके साथ रहता है?
उत्तर : सुमन काँटों के साथ रहता है।
प्रश्न 3 काँटों के साथ रहने पर भी सुमन कैसा रहता है?
उत्तर : काँटों के साथ रहने पर भी सुमन प्रसन्नता के साथ रहता है।
प्रश्न 4 सुमन संबोधन किसके लिए किया गया है और क्यों?
उत्तर : सुमन संबोधन फूलों के लिए किया गया है। फूलों के माध्यम से कवि हम सभी मनुष्यों को भी संबोधित कर रहे हैं। कवि फूलों के माध्यम से मनुष्यों को प्रेरणा देना चाहते हैं कि जीवन में किसी भी परिस्थिति का सामना हमे सुमन के समान हमेशा प्रसन्नता के साथ करना चाहिए।
प्रश्न 5 कवि और कविता का नाम लिखिए –
उत्तर : कवि का नाम द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी और कविता का नाम “मैं सुमन हूँ” है।
(ख) रूप का श्रृंगार यदि मैंने किया है _ _ _ _ _ _“मैं सुमन हूँ।”
प्रश्न 1 प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि ने प्रकृति के किस रूप पर प्रकाश डाला है?
उत्तर : कवि ने पुष्प के माध्यम से प्रकृति की नि:स्वार्थता पर प्रकाश डाला है।
प्रश्न 2 श्रृंगार शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर : श्रृंगार शब्द का अर्थ ‘सजावट’ और ‘सौंदर्य’ है।
प्रश्न 3 सुमन के हृदय में क्या भरा है?
उत्तर : सुमन के हृदय में स्नेह व प्रेम भरा हुआ है जो मनुष्य को एक सूत्र भी बाँधकर प्रेम के साथ रहने की प्रेरणा दे रहे हैं।
प्रश्न 4 इस कविता का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर : इस कविता का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को
विपरीत परिस्थितियों में भी प्रसन्न रहना चाहिए। यदि जीवन दुख आए भी तो हमें घबराना नहीं चाहिए और साहस के साथ प्रसन्नता से आगे बढ़ना चाहिए।

पाठ 2 : बाँस

1 प्रस्तुत पाठ के शब्दार्थ पुस्तक से लिखें।

1- प्रस्तुत पंक्तियों को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:-
क : “इसी ने उसकी ------ ------ ------ नमन किया।”
प्रश्न 1 आदमी बार-बार बाँस को नमन क्यों कर रहा था?
उत्तर : आदमी को लगा की बाँस ने ही उसकी जान बचाई है इसलिए वह उसे भगवान के रूप में देखने लगा और उस भारी बाँस को पानी से बाहर खींचकर बार-बार नमन करने लगा।
प्रश्न 2 ‘कृतज्ञता’ शब्द का क्या अर्थ है? इसका विलोम शब्द लिखिए।
उत्तर : कृतज्ञता शब्द का अर्थ है “आभार”। इसका विलोम शब्द ‘कृतघ्न’ होता है।
प्रश्न 3 आदमी बाँस लेकर कहाँ जा रहा था? उसने क्या निश्चय किया?
उत्तर : आदमी बाँस लेकर पत्तनग्राम जा रहा था। जो जंगल के दूसरे छोर पर था। आदमी ने निश्चय किया था कि वह बाँस को घर ले जाकर नित्य उसकी पूजा करेगा।

2  -  “आर्य, इसे जो ------ ------ भाव से देखा।“
प्रश्न 1 आर्य कहकर किसे संबोधित किया गया है?
उत्तर : आर्य कहकर बाँस लेने वाले आदमी को बुद्ध द्वारा
संबोधित किया गया है।
प्रश्न 2 प्रस्तुत पंक्ति के वक्ता का परिचय दीजिए।
उत्तर : प्रस्तुत पंक्ति के वक्ता बुद्ध जी हैं। इन्हें शास्ता और
तथागत भी कहा जाता है।
प्रश्न 3 आदमी बॉस को कृतज्ञ भाव से क्यों देख रहा था?
उत्तर : आदमी को यह ज्ञात था कि उन बाँस के कारण
ही उसकी जान बची है। इसलिए वह उस बाँस को कृतज्ञ
भाव से देख रहा था।
प्रश्न 4 तथागत ने आदमी को क्या परामर्श दिया था?
उत्तर : तथावत ने आदमी को विवेक से काम लेने की सलाह देते
हुए बाँस से के सिर से उतार फेंकने और आराम से
घर जाने का परामर्श दिया।
प्रश्न 5 प्रस्तुत पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर : प्रस्तुत पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि उपयोगिता
के आधार पर वस्तुओं का संग्रह करना ही बुद्धिमानीपूर्ण आचरण का परिचायक है।

Bhikshuk

भिक्षुक कवि - सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’  निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए- 1. वह आता – दो टूक कलेजे के करता...