Sunday, 16 November 2025

वह जन्मभूमि मेरी


वह जन्मभूमि मेरी
कवि - सोहनलाल द्विवेदी 

पद्यांशों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए – 

1. ऊँचा खड़ा हिमालय, आकाश चूमता है,  _ _ _ _ _ _ _ _ वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।। 

प्रश्न – 1 उपर्युक्त पंक्तियाँ किस कविता से ली गई हैं?  उसके रचयिता कौन हैं?  कवि ने भारत की उत्तर तथा दक्षिण दिशाओं की किस-किस विशेषता का वर्णन किया है?

उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियाँ ‘वह जन्मभूमि मेरी’ नामक कविता से ली गईं हैं। इसके रचयिता ‘सोहनलाल द्विवेदी’ जी हैं। कवि ने भारत के उत्तर में स्थित हिमालय का वर्णन किया है,  जिसकी ऊँचाई मानो आकाश को छू रही हो और भारत के दक्षिण में स्थित हिंद महासागर का वर्णन किया है जिसको देखकर ऐसा लगता है मानो वह भारत के पैरों के नीचे निरंतर झूमता रहता है। 

प्रश्न – 2 कवि ने ‘त्रिवेणी’ शब्द का प्रयोग किस लिए किया है? त्रिवेणी कहाँ है तथा वहाँ  कौन-कौन-सी नदियाँ आकर मिलती हैं? 

उत्तर – उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में जिस स्थान पर गंगा,  यमुना और सरस्वती – इन तीनों नदियों का संगम होता हैं,  उसे ‘त्रिवेणी’ कहा जाता है। 

प्रश्न – 3 कवि ने भारत को ‘पुण्यभूमि’ और ‘स्वर्णभूमि’ के विशेषणों से क्यों संबोधित किया है?  

उत्तर – कवि ने भारत को पुण्यभूमि इसलिए कहा है क्योंकि वे भारत के प्राकृतिक सौंदर्य और उसकी महानता से अत्यंत प्रभावित हैं। उनके अनुसार भारत के उत्तर में फैले हिमालय पर्वत की ऊँचाई, भारत के पैरों में झूमता हिंद महासागर और गंगा,  यमुना और सरस्वती जैसी नदियाँ इसे महान बनाते हैं। कवि ने भारत को स्वर्णभूमि इसलिए कहा है क्योंकि जहां की भूमि में मिट्टी अत्यंत उर्वरा है, यहाँ खूब फसलें होती हैं जो माता पिता के समान हमारा पालन-पोषण करती है। 

प्रश्न – 4 कवि ‘हिमालय’ और ‘सिंधु’ के संबंध में क्या कल्पना करता है? 

उत्तर – कवि ने हिमालय और सिंधु के संबंध में कल्पना की है कि हिमालय को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मानो वह  आकाश को छू रहा हो। भारत के दक्षिण में स्थित सिंधु अर्थात हिंद महासागर को देखकर ऐसा लगता है की वह भारत के पैरों के नीचे निरंतर झूमता रहता हो। 

2. झरने अनेक झरते, जिसकी पहाड़ियों में, _ _ _ _ _ _ _ _ वह जन्मभूमि मेरी,  वह मातृभूमि मेरी।। 

प्रश्न – 1 उपर्युक्त पंक्तियों के आधार पर भारत-भूमि के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन कीजिए। 

उत्तर – भारत भूमि के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन करते हुए कवि कहते हैं कि भारतवर्ष की पहाड़ियों से अनेक झरने निकलते हैं और यहाँ की झाड़ियों में चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई पड़ती है। यहाँ पर जगह-जगह आम के बाग है,  जिसमें सुबह-सुबह कोयल की मधुर आवाज़ सुनाई पड़ती है और मलयाचल पर्वत से आती हुई शीतल मंद और सुगंधित हवा सभी को प्रसन्नता से भर देती है। 

प्रश्न – 2 भारत – भूमि  की पहाड़ियों,  अमराइयों और पवन की क्या-क्या विशेषताएँ हैं? 

उत्तर – भारत की पहाड़ियों की विशेषता यह है कि उनमें से अनेक झरने निकलते हैं। अमराइयों की विशेषता यह है कि वसंत ऋतु में उसमें से कोयल की कूक सुनाई पड़ती है और मलयाचल पर्वत से आती हुई शीतल मंद और सुगंधित पवन सभी को प्रसन्नता से भर देती है। 

प्रश्न – 3 कवि ने भारत-भूमि को ‘धर्मभूमि’ और ‘कर्मभूमि’ कहकर क्यों संबोधित किया है? 

उत्तर – कवि ने भारत भूमि को धर्म भूमि इसलिए कहा है क्योंकि यहाँ धर्म का बोलबाला है अर्थात यहाँ  के निवासी धर्म में आस्था रखते हैं और कभी ने भारत भूमि को कर्मभूमि इसलिए कहा है क्योंकि यह हमें कर्म करने की प्रेरणा देती है। दक्षिण भारत के पहाड़ों से आने वाली हवा सभी को उल्लासित करती है। 

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों का प्रतिपाद्य लिखिए। 

उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों का प्रतिपाद्य यह है कि हमारी भारत भूमि की अनेक प्राकृतिक विशेषताएं हैं। जहाँ पर पहाड़ियों से झरने निकलते हैं, झाड़ियों से चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई पड़ती है और जगह जगह पर आम के बाग हैं जिनमें से वसंत ऋतु में कोयल की कूक सुनाई पड़ती है। भारत भूमि में धर्म का बोलबाला है इसलिए इसे धर्मभूमि कहा गया है अतः यह भूमि हमें कर्म करने की प्रेरणा देती है इसलिए इसे कर्मभूमि भी कहा गया है। 

3. जन्मे जहाँ थे रघुपति,  जन्मी जहाँ थी सीता, _ _ _ _ _ _ _ _ वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।। 

प्रश्न – 1 ‘गीता का उपदेश किसने, किसे, कब और कहाँ दिया था? इस उपदेश का क्या प्रभाव पड़ा? 

उत्तर – गीता का उपदेश श्री कृष्ण ने अर्जुन को महाभारत के युद्ध के समय कुरुक्षेत्र में दिया। श्री कृष्ण ने उपदेश देकर अर्जुन को युद्ध के लिए प्रवृत्त किया था। श्री कृष्ण रणभूमि में अर्जुन को जीवन की वास्तविकता और मनुष्य धर्म से जुड़े कुछ ऐसे उपदेश दिए जिससे उनका मानसिक द्वंद समाप्त हो गया। 

प्रश्न – 2 ‘जग को दया दिखाई, जग को दिया दिखाया।’ - पंक्ति का आशय स्पष्ट करते हुए बताइए कि किसने जन्म लेकर भारत का सुयश किस प्रकार बढ़ाया? 

उत्तर – उपर्युक्त पंक्ति के माध्यम से कवि कह रहे हैं कि भारत की पवित्र भूमि पर ही गौतम बुध का जन्म हुआ था जिन्होंने अपने देश का सुयश दूर-दूर तक फैलाया।  गौतम बुद्ध ने अहिंसा का संदेश दिया, दया  का मार्ग दिखाया और ज्ञान का दीपक दिखाकर सभी को सही मार्ग दिखाया जो भारत में नहीं अन्य देशों में भी फैल गया। 

प्रश्न – 3 कवि ने भारत-भूमि को ‘युद्धभूमि’ और ‘बुद्धभूमि’ कहकर संबोधित क्यों किया है? 

उत्तर – कवि ने भारत-भूमि को युद्धभूमि इसलिए कहा है क्योंकि यहाँ बहुत से महायुद्ध हुए जिसमे इस भूमि के वीरों ने अपने सम्मान और भूमि की रक्षा की।  कवि ने भारत-भूमि को बुद्ध को में कहकर भी संबोधित किया है क्योंकि इस भूमि पर गौतम बुद्ध ने जन्म लिया और समस्त संसार को दया और अहिंसा का संदेश दिया। 

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवि ने क्या संदेश दिया हैं? 

उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवि ने मातृभूमि के प्रति सम्मान जगाते हुए और भारत-भूमि की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि हमें इस भारत-भूमि पर जन्मे श्री राम और सीता के गुणों को अपनाकर अपने आचरण में बदलाव करना चाहिए एवं कवि  ने श्री कृष्ण के उपदेश के माध्यम से जीवन की वास्तविकता और मनुष्य धर्म से जुड़ने का संदेश दिया है। अंत में कवि ने गौतम बुध के माध्यम से अहिंसा और दया के मार्ग पर चलने का संदेश दिया है। 

Thursday, 24 July 2025

Nukkad Natak 2025

नुक्कड़ नाटक
विषय : Prevalence of child labour and importance of education
Theme : बच्चें पढ़ेंगे, आगे बढ़ेंगे
All : सुनो-सुनो भई सुनो-सुनो
     सुनो-सुनो भई सुनो-सुनो
झूम-झूम कर घूम घूम कर, सबको यह बतलाएंगे,
हम सब विद्यालय के बच्चें
नई दिशा दिखाएंगे, नई दिशा दिखाएंगे
आओ-आओ मिलकर देखे, आओ-आओ नाटक देखे-2
दूर वाले पास आओ, पास वाले बैठ जाओ
Aditi: अच्छा तो आज यहां नाटक होगा और नाटक का शीर्षक महंगाई होगा
All: नही-नही, नही-नही
Tanishk: तो नाटक का शीर्षक बेरोज़गारी होगा
All: नही-नही, नही-नही
Akshat: तो फिर नाटक का शीर्षक जरूर भ्रष्टाचार होगा
All: बिल्कुल नही बिल्कुल नही
Sambhav: न महंगाई, न बेरोजगारी इस नुक्कड़ नाटक का शीर्षक हैं “बचपन को बचाना हैं, देश को बढ़ाना हैं
All : बिल्कुल सही बिल्कुल सही
Aditi: चलिए आज हम आपको एक नाटक का दृश्य दिखाते है

All: सुनो-सुनो भई, सुनो-सुनो
     नई कहानी सुनो सुनो
    सुनो-सुनो भई, सुनो-सुनो
     नई कहानी सुनो सुनो
चाय की दुकान
(छोटू तेजी से चाय के गिलास साफ कर रहा है। मालिक चिल्ला रहा है।)
Reyansh: अरे छोटू ! तेजी से काम कर ! ग्राहक इंतजार कर रहे हैं। एक भी चाय का गिलास टूटा तो तेरी खैर नहीं!
Yuvraj : (मुंह बनाते हुए) अरे मालिक, मैं तो सुपरमैन हूँ! एक साथ सारा काम कर सकता हूँ, लेकिन मेरी उंगलियाँ अब जवाब दे रहीं हैं मालिक।
Reyansh : जुबान लड़ाता हैं, चुपचाप अपना काम कर
Reyansh : और रिंकी तू इतनी देर से क्या कर रही है? देख यहाँ भी कूड़ा पड़ा हैं, तू कैसे झाड़ू लगाती हैं। एक काम ढंग से नही होता इन बच्चों से
Yuvraj: अगर ये मोटा सेठ थोड़ा काम खुद भी करले तो इसकी सेहत अच्छी बन जाए।
Bhavya: सही कहा ये हमसे बहुत काम करवाते हैं, हमको पढ़ने भी नही देते, सच कहूं तो मैं पढ़ना चाहती हूँ, आगे बढ़ना चाहती हूँ।
Yuvraj: अरे ये पढ़ना लिखना हमारे नसीब में कहाँ,,,अब तो हाथ की लकीरें भी बर्तन घिस-घिसकर मिट गई हैं।
Reyansh: तुम पढ़ लिख कर क्या करोगे, पैसे कमाओ, माँ बाप की मदद करो। चलो निकलो

Sambhav: बच्चों के संग ये दुर व्यवहार
All: बंद करो ये अत्याचार
Sambhav: बच्चों के संग ये दुर व्यवहार
All: बंद करो ये अत्याचार
Jayant : हमारे देश में शुरू से ही बच्चों को भगवान का रूप माना जाता हैं और भगवान के बाल रूप इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं,
Vaishnavi: लेकिन आज की तस्वीर बिल्कुल अलग हैं, देखो क्या हालत हैं इन नन्हे बच्चों की
Manas: रोटी की खातिर देखो, बच्चा करता मजदूरी हैं, यह कठोर अभिशाप झेलने की कैसी मजदूरी हैं।
Aditi: हम समाज का यह कलंक अभिशाप मिटाना होगा, दबे हुए अरमानो में पँख लगाना होगा।
Sonakshi: कदम से कदम मिलना है, सबको साक्षर बनाना है, सपना साकार कर दिखाना हैं, देश को भी तो आगे बढ़ाना है,
Vaishnavi:, प्यारे दोस्तों, देश में हो रहीं बाल मजदूरी से हम हो रहे बदनाम
अब इन नन्हे बच्चों का बचपन बचाना ही है हमारा काम

Tanishk: कैसी ये मज़बूरी है,
All: बंद करो ये मजदूरी है
Tanishk: कैसी ये मज़बूरी है,
All: बंद करो ये मजदूरी है
All: सुनो-सुनो भई, सुनो-सुनो
     नई कहानी सुनो सुनो
    सुनो-सुनो भई, सुनो-सुनो
     नई कहानी सुनो सुनो
Taniahk: टेलीग्राम, टेलीग्राम टेलीग्राम माता जी ये लीजिये आपका टेलीग्राम आया हैं
Somya: जाने किसका टेलीग्राम आया हैं, पता नही क्या लिखा होगा, अगर मैं पढ़ी लिखी होती तो इसे पढ़ लेती, अब किससे पढ़वाऊ
Sarthak: अरे काकी बड़ी परेशान दिख रहीं हो, के हुआ, सब ठीक है ना
Somya: अरे भईया जरा ये टेलीग्राम तो पढ़ देना कहीं कोई जरूरी बात तो नहीं लिखी इसमें
Sarthak: नही काकी अभी मन्ने भोत काम है
Somya to Reyansh: बेटा जरा ये पढ़ दो
Reyansh: रे चाची यों मेरे काम ना हैं, अपनी बेटी से पढ़वा लेना
Somya: 7 दिन बाद मेरी बेटी आएगी, अब ये टेलीग्राम मैं अपनी बेटी से ही पढवाउंगी
(7 दिन बाद)
(Manas take round with poster)
Somya: अरे बेटा तू आ गयी, लें जरा ये पढ़कर सुना दे क्या लिखा है इसमें
Kashvi: माँ आपने मुझे पहले क्यों नही बताया, मुझे तत्काल सरकारी नौकरी ज्वाइन करने का टेलीग्राम था, कितना अच्छा अवसर था जो मेरे हाथों से निकल गया, अब क्या होगा मेरा? माँ काश तुम पढ़ी-लिखी होती तो आज मेरे हाथों ये नौकरी मेरे हाथ से ना जाती।
Jayant : इसलिए मै कहता हूँ, 
              गली गली लगाओ नारा,
All: शिक्षा से मिटता अँधियारा
Jayant: गली गली लगाओ नारा,
All: शिक्षा से मिटता अँधियारा
Bhavya: जब शिक्षित हो हर नर नारी,
All: तभी मिटेगी दिक्कत सारी
Jayant: 21वीं सदी की यही पुकार, शिक्षा है सब का अधिकार
All: शिक्षा है सब का अधिकार-2
Sarthak : अरे भईया बच्चों को भेजो स्कूल, और नही तुम करना भूल
All: और नही तुम करना भूल-2
Sonakshi: जो अनपढ़ रह जाता है, जीवन भर पछताता है
All: जीवनभर पछताता है जीवनभर पछताता है
Akriti : पढ़ लिख लिखकर बन होशियार, 
All: समझ बढ़े तो बढ़े विचार
Akriti : पढ़ लिख लिखकर बन होशियार, 
All: समझ बढ़े तो बढ़े विचार
Reyansh : सुनो सुनो भई सुनो सुनो एक नई कहानी सुनो सुनो
All: सुनो सुनो भई सुनो सुनो एक नई कहानी सुनो सुनो
Yuvraj to Aditi: अरे अम्मा वोट किसे दिया है
Aditi: अरे बेटा वहाँ तो बहुत सारे फोटो थे मैंने तो गाय का बटन दबाया (लाठी के साथ)
Yuvraj – गाय पर क्यों
Aditi – अरे बेटा गाय पवित्र मानते है, इसलिए मैंने उसका बटन दबाया
Yuvraj: अरे ये क्या किया अम्मा, हम वोट नेता को देते हैं गाय को नही
Aditi- अरे यो बात तो मैंने सोच्ची नी, अर जो मैं पढ़ी लिखी होती तो आज मुझसे ये गलती ना होती
Tanishk: अम्मा जैसे अनपढ़ लोगों के कारण ही चुनाव में गलत लोगों का चुनाव हो जाता है और देश की तरक्की में बाधा आती है
All: बिन शिक्षा से ही दास हुए,
   शिक्षा से ही राज मिले
   शिक्षा ही इतिहास बदलती
   शिक्षा ही विकास है लाती
Sambhav: शिक्षा है अनमोल रतन, पढ़ने का कुछ करो जतन
All: पढ़ने का कुछ करो जतन
Jayant : आज हमारे देश में बाल मजदूरी और अशिक्षा बढ़ती जा रही है हमें इस से मिलकर लड़ना होगा
Reyansh :  भारत सरकार के सर्व शिक्षा अभियान को हमें जन जन तक पहुंचना होगा।
Tanishk: अगर पोहोचना आसमान तक
All:अगर पोहोचना आसमान तक
Tanishk: समझ समझकर पढ़ना होगा
All: समझ समझकर पढ़ना होगा
Tanishk: विश्व गुरु अगर बनना हो तो
All :विश्व गुरु अगर बनना हो तो
Tanishk: मिलकर आगे बढ़ना होगा
All : मिलकर आगे बढ़ना होगा-2
All: सुनो-सुनो भई, सुनो-सुनो
    हमारी वही कहानी सुनो सुनो
    सुनो-सुनो भई, सुनो-सुनो
    हमारी वही कहानी सुनो सुनो
Aditi to Yuvraj : उठो बच्चे, तुम स्कूल क्यों नही जाते
Yuvraj: मैडम मैं पढ़ना तो चाहता हूँ लेकिन काम से छुट्टी नही मिलती
Aditi: बेटा शिक्षा से ही आज है, शिक्षा से ही विकास है,
      यूँ तोड़ो न तुम अपनी उम्मीदों को
      तुम सबमे बहुत कुछ खास है
All: तुम सब में बहुत कुछ खास है।
Kaasvi: बेटा, परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है-2
ज़मीन पर बैठा तू क्यों आसमान देखता है
All: उठो बेटा उठो, तुम्हें समाज से लड़ना होगा तुम्हें ही आगे बढ़ना होगा तुम्हें ही आगे बढ़ना होगा
Reyansh: अरे छोटू बर्तन क्यों नही किए तुमने? (आश्चर्य से)
Yuvraj : अब मैंने काम छोड़ दिया है
Somya: नही अब और नही, हम इस अन्याय को बंद करेंगे. ये बच्चें ही देश का भविष्य है। 
Sambhav: नही छोटू,  अब तू मत करना मजदूरी, 
तेरे लिए है शिक्षा जरुरी
Yuvraj : झुक झुक कर सीधा खड़ा हुआ,
           अब फिर झुकने का शौक नही
          अपने ही हाथों से रचूंगा खुदको,
           तुमसे मिटने का खौफ नही
            पढूँगा मै लिखूंगा मै
         जब तक मंजिल मिल न जाए, 
          आगे बढ़ता रहूँगा मै।

(गोल चककर लगाकर वापिस जाते वक़्त)
Sambhav सुनो सुनो भई सुनो सुनो 
All :सुनो सुनो भई सुनो सुनो 
Sambhav:  हम तुम्हें सिखाने आए है
All :हम तुम्हें बताने आए है
 Sambhav: दबे हुए अरमानो में, 
 All : हम पँख लगाने आएं है।



Tuesday, 27 May 2025

गिरिधर की कुंडलियाँ




गिरिधर की कुंडलियाँ
- गिरिधर कविराय

 निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

1. लाठी में गुण बहुत हैँ   ____________हाथ महँ लीजै लाठी।। 

प्रश्न – 1 गिरिधर कविराय ने लाठी के किन-किन गुणों की ओर संकेत किया है? 

उत्तर – कवि कहते हैं कि लाठी में बहुत गुण है,  इसलिए इसे हमेशा अपने साथ रखना चाहिए। यदि गहरी नदी या नाली हो तो यह न सिर्फ हमें गिरने से बचाती है, बल्कि लाठी के सहारे हम गहराई नाप कर उसे पार भी कर सकते है। मार्ग में कुत्ते से सामना हो तो लाठी द्वारा उससे रक्षा हो सकती है। लाठी से दुश्मन पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है।

प्रश्न – 2 लाठी हमारी किन-किन स्थितियों में सहायता करती है?

उत्तर – लाठी अनेक प्रकार से हमारी सहायता करती है।  नदी व नाली की गहराई नापने के काम आती है।  मार्ग में अगर कुत्ता झपट पड़े तो उससे बचाव हो सकता है और दुश्मन अगर आक्रमण करें तो लाठी उससे भी हमें बचा सकती है। 

प्रश्न  - 3 कवि सब हथियारों को छोड़कर अपने साथ लाठी रखने की बात कह रहे हैं। क्या आप उनकी बात से सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर – कवि  सब हथियारों को छोड़कर अपने साथ लाठी रखने की बात कह रहे हैं। हाँ, हम उनकी बातों से सहमत हैं क्योंकि लाठी घर के बाहर सब जगह रखी जा सकती है,  यह हथियार भी नहीं है जो इसे रखने पर पाबंदी होगी। यह हर प्रकार से मनुष्य की सच्ची दोस्त है, जो हर प्रकार के मनुष्य की रक्षा करती है।

प्रश्न – 4 शब्दार्थ लिखिए – नारी, दावागीर,  तिनहूँ,  छाँड़ि 

उत्तर –  नारी – नाली,    
             दावागीर – हमला, 
             तिनहूँ – उनके ,  
             छाँड़ि – छोड़कर


2. कमरी थोरे  दाम कि _____________ बड़ी मर्यादा कमरी।। 

प्रश्न – 1 छोटी-सी कमरी हमारे किस-किस काम आ सकती है? 

उत्तर – कवि के अनुसार काला कमरी( साधारण कंबल ) थोड़ी मूल्य में प्राप्त हो जाती है। इसके अनेक लाभ हैं जैसे कीमती कपड़ों को लपेट कर उन्हें कंबल में रखा जा सकता है क्योंकि यह कीमती कपड़ों को धूल व धूप से बचाता है, उनका मान रखता है। इसकी छोटी-सी गठरी बनाई जा सकती है। रात में कंबल को झाड़ कर बिछाया जा सकता है तथा उस पर आराम से सोया जा सकता है।

प्रश्न – 2 गिरिधर कविराय के अनुसार कमरी में कौन-कौन-सी विशेषताएँ होती हैं? 

उत्तर – कवि के अनुसार कंबल थोड़े से मूल्य में ही प्राप्त हो जाता है। इसके अनेक लाभ हैं।  उत्तम वे महंगे कपड़ों को लपेटकर कंबल में रखा जा सकता है,  जिससे उन कपड़ों पर धूल व धूप लगने से बचती है और उनका मान बना रहता है। इसकी छोटी-सी गठरी बनाई जा सकती है। रात में कंबल को झाड़ कर बिछाया जा सकता है और उस पर आराम से सोया जा सकता है, इसलिए इसे हमेशा साथ रखना चाहिए। 

प्रश्न – 3 ‘बकुचा बाँटे मोट, राति को झारि बिछाव’ – पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर – इस पंक्ति द्वारा कवि कहना चाहते हैं कि इस कमरी के अनेक लाभ हैं। यह हमारे बहुत प्रकार से काम आती है। हम रात में कमरे को झाड़ कर उसे बिछा सकते हैं तथा उस पर आराम से सोया भी जा सकता है। इसी प्रकार ठंड लगने पर इसे ओढ़ा भी जा सकता है। 

 प्रश्न – 4  ‘खासा मलमल वाफ़्ता, उनकर राखै मान’ – पंक्ति द्वारा कवि क्या कहना चाहते हैं?  

उत्तर - उपर्युक्त पंक्ति द्वारा कवि बताते हैं कि खासा व मलमल और महंगे कपड़ों को कमरी धूप में धूल और पानी से बचाती है, उनका मान रखती है। अत: कंबल बहुत उपयोगी चीज़ है।


3. गुन के गाहक सहस  ________________ सहस नर गाहक गुन के।।

प्रश्न – 1 ‘गुन के गाहक सहस नर’ को स्पष्ट करने के लिए कविराय ने कौन-सा उदाहरण दिया है और क्यों? 

उत्तर – कवि के अनुसार संसार में सर्वत्र गुणी व्यक्ति का आदर व सम्मान होता है। गुणी व्यक्ति  को चाहने वाले हजारों होते हैं। ऐसे व्यक्ति को कोई नहीं पूछता, जिसमें कोई गुण न हो। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने गुणों का विकास करना चाहिए। कवि ने कौवा और कोयल का उदाहरण देकर भी समझाया है कि कौवा और कोयल दोनों का रंग काला होता है, किंतु कोयल को उसकी आवाज़ की वजह से पसंद किया जाता है और कौवे को उसकी कर्कश आवाज की वजह से कोई पसंद नहीं करता।

प्रश्न – 2 कागा और कोकिला में कौन-सी बात समान है और कौन- सी असमान?  स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर – कवि के अनुसार कागा और कोकिला दोनों का रंग काला होता है और दोनों समान आकर के भी होते हैं, किंतु कोयल को उसकी मधुर आवाज़ के कारण पसंद किया जाता है और कौवे को उसकी काँव-काँव की वजह से  कोई पसंद नहीं करता। 

प्रश्न – 3 बिनु गुन लहै न कोय,  सहस नर गाहक गुन के’ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – कवि इस पंक्ति द्वारा कहते हैं कि समाज में केवल गुणों की सराहना की जाती है। गुणों का ही  आदर किया जाता है, रंग रूप आदि का नहीं।  बिना गुणों के किसी भी व्यक्ति का सम्मान नहीं होता और गुणी व्यक्ति को चाहने वाले हज़ारों होते हैं। 

प्रश्न – 4 उपर्युक्त कुंडलियों का केंद्रीय भाव स्पष्ट कीजिए तथा बताइए कि इस कुंडलियां द्वारा क्या संदेश दिया गया है? 

उत्तर – केंद्रीय भाव यह है कि गुणी व्यक्ति के हज़ारो प्रशंसक होते हैं एवं उसके गुणों की सरहाना की जाती है, इसलिए व्यक्ति को सदैव अपने गुणों का  विकास करने का निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। 


4. साईं सब _______________________ कोई साईं।। 

प्रश्न – 1 कवि के अनुसार इस संसार में किस प्रकार का व्यवहार प्रचलित है? 

उत्तर – कवि  के अनुसार इस संसार में सभी लोग मतलब से व्यवहार करते हैं,  मतलब से  ही संबंध बनाए रखते हैं और  जब मतलब सिद्ध हो जाता है तब संबंध समाप्त हो जाता है।  भाव यह है कि संसार में लगभग सभी व्यक्ति स्वार्थी हैं। जब तक किसी पर धन दौलत रुपया पैसा रहेगा उसके मित्र उसके चारों ओर बैठे रहेंगे और जब धन समाप्त हो जाता है तब मित्रता भी समाप्त हो जाती है। 

प्रश्न – 2 ‘साईं सब संसार में’ - शीर्षक कुंडलिया से मिलने वाले संदेश पर प्रकाश डालिए। 

उत्तर - 'साईं इस संसार में’ नामक शीर्षक कुंडली से संदेश मिलता है कि दुनिया में रहने वाले सभी व्यक्ति स्वार्थी एवं मतलबी होते हैं।  जब तक उनका मतलब सिद्ध होता है तब तक व्यक्ति के साथ संबंध बना रहता है और जब मतलब खत्म हो जाता है तो संबंध भी समाप्त हो जाता है। 

प्रश्न – 3 उपर्युक्त कुंडलिया में  सच्चे एवं झूठे मित्र की क्या पहचान बताई गई है? 

उत्तर – उपर्युक्त कुंडलिया में बताया गया है कि सच्चा मित्र विपरीत परिस्थितियों में भी कभी साथ नहीं छोड़ता,  परंतु झूठा मित्र सुख में तो हरदम साथ रहता है और दुख पड़ने पर मित्र को भूल जाता है।  सच्ची मित्रता मरते दम तक साथ रहती है,  परंतु झूठी मित्रता चार दिन की चांदनी के बाद समाप्त हो जाती है। 

प्रश्न - 4 उपर्युक्त कुंडलिया का प्रतिपाद्य लिखिए। 

उत्तर - प्रस्तुत कुंडलिया  में कवि ने इस बात पर बल दिया है कि हमें मित्रों का चयन बहुत सोच समझ कर करना चाहिए क्योंकि इस संसार में बहुत से स्वार्थी लोग भरे हैं जो हमारे अच्छे समय में तो हमारे साथ रहते हैं किंतु बुरे वक्त में हम से दूरी बना लेते हैं और सीधे मुंह बात भी नहीं करते। अतः संसार का यही व्यवहार है,  यही रीति है और यहाँ का व्यवहार स्वार्थ पर आधारित है। 


5. रहिए लटपट ______________________ छाया में रहिए।। 

प्रश्न  – 1 कवि के अनुसार हमें किस प्रकार के पेड़ की छाया में बैठना चाहिए और क्यों? 

उत्तर – कवि के अनुसार हमें मजबूत पेड़ की छाया में ही बैठना चाहिए क्योंकि आँधी  या तूफ़ान आने पर  उसके पत्ते तो झड़ सकते हैं किंतु तना और डालियाँ सुरक्षित रहेंगी। अतः मनुष्य को भी किसी बलवान व्यक्ति के साथ ही संगत करनी चाहिए क्योंकि वह खुद को भी सुरक्षित रखता है और अपने पास आए व्यक्ति को भी सुरक्षित रख सकता है। 

प्रश्न – 2 ‘छाँह मोटे की गहिए’ – पंक्ति द्वारा कवि क्या कहना चाहते हैं? 

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति द्वारा गिरिधर कविराय जी हमें मोटे तने वाले पेड़ की छाँव में बैठने की सलाह दे रहे हैं क्योंकि तूफान व आँधी आने पर उसके पत्ते तो झड़ सकते हैं,  किंतु उसका तना व डालियाँ सुरक्षित रहती हैं। अतः मनुष्य को किसी अनुभवी व मजबूत व्यक्ति के साथ संगत करनी चाहिए क्योंकि विपत्ति आने पर वह स्वयं को भी संभाल सकता है और अपने संगी साथी को भी। 

प्रश्न – 3 उपर्युक्त कुंडलियां द्वारा कवि क्या संदेश दे रहे हैं? 

उत्तर – उपर्युक्त कुंडली द्वारा कविराय पेड़ के माध्यम से यह संदेश दे रहे हैं कि हमें समर्थ एवं अनुभवी व्यक्ति का सहारा लेना चाहिए निर्बल का नहीं।  निर्बल व्यक्ति न अपनी सुरक्षा कर सकता है न ही दूसरे की जबकि सबल व्यक्ति स्वयं भी सुरक्षित रहता है और अपने पास आए व्यक्ति को भी सुरक्षित रख सकता है। 

प्रश्न – 4 कवि के अनुसार एक दिन कौन धोखा देगा तथा कब ? उससे बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए? 

उत्तर – कवि के अनुसार जिस प्रकार आँधी व तूफ़ान में पतले तने वाला पेड़ और कमजोर डालियाँ  टूट जाती हैं उसी प्रकार विपत्ति आने पर कमजोर व्यक्ति भी धोखा दे देता है। अतः ऐसे धोखे से बचने के लिए मजबूत एवं अनुभवी व्यक्ति के साथ रहना चाहिए। 


6. पानी बाढ़ै नाव में  _____________________  राखिये अपना पानी।। 

प्रश्न – 1 ‘दोऊ हाथ उलीचिए, यही सयानों काम’ – पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति द्वारा कविराय जी कहते हैं कि यदि नाव में ज्यादा पानी आ जाए या घर में धन बढ़ जाए तो हमें दोनों हाथों से उसे निकालकर परोपकारी कार्यों में लगाना चाहिए। यही बुद्धिमानी का काम है। अतः हमें सबका परोपकार करना चाहिए।

प्रश्न – 2 ‘पर-स्वारथ के काज, शीश आगे धर दीजै’ – पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से कवि यह कहना चाहते हैं कि अगर कभी जीवन में किसी का परोपकार करने के लिए हमें शीश का बलिदान भी देना पड़े तो हमें अवश्य शीश को अर्पित कर देना चाहिए। अर्थात् दूसरों के भले के लिए हमें प्रभु का नाम स्मरण करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे देना चाहिए।

प्रश्न – 3 उपर्युक्त कुंडलिया में ‘बड़ों की किस वाणी’ की चर्चा की गई हैं तथा क्यों? 

उत्तर – उपर्युक्त कुंडलियां में बड़े बुजुर्गों ने यह सीख दी है कि हमें हमेशा अच्छे ढंग से जीवन यापन करना चाहिए और सही मार्ग पर चलते हुए अपने सम्मान को बनाए रखना चाहिए। बड़े बुजुर्गों ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि सही मार्ग पर चलने से ही हम अपने सम्मान की रक्षा कर सकते हैं।

प्रश्न – 4 उपर्युक्त कुंडलिया का प्रतिपाद्य लिखिए। 

उत्तर – उपर्युक्त कुंडलिया का प्रतिपाद्य यह है कि जब नाव में अधिक पानी भर जाए या घर में अधिक धन हो जाए तो हमें उसका प्रयोग खुशी से दूसरे के भले के लिए परोपकारी कार्यों में करना चाहिए।


7. राजा के दरबार में  ____________________  बहुरि अनखैहैं राजा।। 

प्रश्न – 1 राजा के दरबार में कब जाना चाहिए,  कहाँ नहीं बैठना चाहिए और क्यों? 

उत्तर – व्यवहार कुशलता के विषय में बताते हुए कविराय जी ने बताया है कि हमें अवसर पाकर ही राजा के दरबार में जाना चाहिए और अपने स्तर के अनुसार ही स्थान ग्रहण करना चाहिए। हमें ऐसे स्थान पर नहीं बैठना चाहिए जो हमारे स्तर के अनुसार नए हो क्योंकि ऐसे स्थान पर बैठने से हमें कोई भी वहाँ से उठा सकता है।

प्रश्न – 2 कवि ने दरबार में कब बोलने और कब न बोलने की सलाह दी है? 

उत्तर – गिरिधर कविराय जी ने यह सलाह दी है कि राजा के दरबार में जब कुछ बोलने को कहा जाए तभी राजा के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करने चाहिए। बोलते समय संयम बरतना चाहिए तथा अधिक उतावला नहीं होना चाहिए। जब तक बोलने के लिए कुछ कहा न जाए तब तक चुप ही रहना चाहिए। यही व्यवहार की कुशलता है।

प्रश्न – 3 ‘हँसिये नहीं हहाय, बात पूछे ते कहिए’ – पंक्ति द्वारा कवि क्या स्पष्ट करना चाहते हैं? 

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से गिरिधर कविराय जी कहना चाहते हैं कि राजा के दरबार में ज़ोर–ज़ोर से नहीं हँसना चाहिए। बोलने के लिए उतावला नहीं होना चाहिए और जब कुछ पूछा जाए तभी बोलना चाहिए।

प्रश्न – 4 उपर्युक्त कुंडलिया से क्या शिक्षा मिलती है? 

उत्तर – उपर्युक्त कुंडली से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी भी प्रकार की सभा में अपने स्तर के अनुकूल स्थान ग्रहण करना चाहिए, सभा में कभी भी ज़ोर-ज़ोर से नहीं हँसना चाहिए, बोलने के लिए उतावला नहीं होना चाहिए और जब बोलने के लिए कहा जाए तभी बोलना चाहिए। 

Class 8 मैं सुमन हूँ / बाँस

पाठ – 1 : मैं सुमन हूँ 1. प्रस्तुत कविता के शब्दार्थ पुस्तक से लिखें। 2. प्रस्तुत पंक्तियों को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –...