केरल राज्य भारत के दक्षिण में स्थित है। केरल राज्य पर्यटन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। केरल राज्य को 'ईश्वर का अपना घर' के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ कई दर्शनीय स्थान हैं। यहाँ पर्वत, समुद्र, जंगल और तीर्थस्थल सभी एक ही स्थान पर हैं, इसलिए विदेशी पर्यटकों का आना-जाना हमेशा होता रहता है।
नदियाँ और पर्वत
केरल में 44 नदियाँ हैं। उनमें नील (भारतपुझा) सबसे लंबी नदी है। पर्वतों में मुन्नार पर्वतीय क्षेत्र और समुद्र तटों में कोवलम पर्यटकों का मन मोह लेते हैं।
संस्कृति
केरल राज्य की संस्कृति प्राचीन है। यहाँ अनेक उत्सव मनाए जाते हैं। ओणम केरल का प्रमुख उत्सव है। इस दिन महिलाएँ ओणपुक्कलम यानी फूलों की रंगोली बनाती हैं। उस दिन आडाप्रधमन (खीर) का वितरण भी होता है। इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं और नृत्यों का आयोजन होता है। 'कथकली' एक पारंपरिक नृत्य है। इसमें श्रृंगार और वेशभूषा का विशेष महत्व है।
वर्तमान में नौका दौड़ लोकप्रिय है। दौड़ प्रतियोगिता में श्रेष्ठतम पी.टी. उषा केरल प्रदेश की ही है।
भाषा
केरल की मुख्य भाषा मलयालम है। तमिल भाषा और संस्कृत भाषा का मलयालम भाषा के साथ घनिष्ठ संबंध है।
भोजन
चावल इस प्रदेश का मुख्य भोजन है। चावल से बने विभिन्न व्यंजनों को लोग खाते हैं। डोसा, इडली, पुट्टु, पालप्पम जैसे खाद्य पदार्थ भी महत्वपूर्ण हैं। फलों में केला और मिठाइयों में पायसम (खीर) भोजन में अवश्य शामिल होता है।
आयुर्वेद और चिकित्सा का पर्यटन क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है।
इस प्रकार भारत देश के सभी राज्यों में केरल का एक अलग ही महत्व है। केरल राज्य में संस्कृत का विशेष महत्व है। प्राचीन काल से ही यहाँ शंकराचार्य जैसे अनेक विद्वान हुए हैं। आधुनिक काल में भी इन विद्वानों का लोगों के मन में सम्मानपूर्ण स्थान है।
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