Sunday, 5 July 2026
Class 7 : संस्कृत : पाठ 6 : ऋषिकेश
कक्षा 7 - पाठ 6
ऋषिकेश
हमारे देश का नाम भारतवर्ष है, जो बहुत ही सुंदर और विशाल (भव्य) है। इस देश में सब जगह प्राकृतिक सुंदरता दिखाई देती है। भारत के विशाल और सुंदर स्थानों में 'ऋषिकेश' भी एक देखने योग्य (दर्शनीय) स्थान है।
ऋषिकेश, गंगा के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल 'हरिद्वार' से 19 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ों से घिरा हुआ है। यहाँ गंगा अपनी प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। गंगा और पहाड़ों की हरियाली से घिरा हुआ ऋषिकेश एक बहुत ही सुंदर और पवित्र तीर्थ स्थल है।
साधु और महात्मा लोग इस स्थान पर अपनी आत्मा और परमात्मा का ध्यान करते हैं। इसके अलावा, कवि और लेखक भी यहाँ की कोमल कल्पनाओं में डूबकर अपनी कलम से सुंदर काव्यों की रचना करते हैं।
वैज्ञानिक रूप से भी ऋषिकेश का बहुत महत्व है। यहाँ स्थित पर्वत श्रृंखलाओं (पहाड़ों) में कई प्रकार की औषधियाँ (जड़ी-बूटियाँ) भी पैदा होती हैं। आयुर्वेद के आचार्य (डॉक्टर) उनका उपयोग भयानक बीमारियों को ठीक करने के लिए करते हैं।
ऋषिकेश के देखने योग्य स्थानों में 'लक्ष्मण झूला' सबसे पहला (प्रमुख) है। यह एक ऐसा पुल है जिसका निर्माण गंगा नदी को पार करने के लिए किया गया था। जब इस पुल पर लोग चलते हैं, तब यह हिलता (कंपित होता) है। यहाँ 'गरुड़ चट्टी' भी एक दर्शनीय स्थल है।
इस स्थान से थोड़ी ही दूरी पर 'गीता भवन' नाम का प्रसिद्ध आश्रम है। महर्षि कण्व का आश्रम भी इसी स्थान पर था। राजा भरत की माता शकुंतला का पालन-पोषण भी इसी आश्रम में हुआ था। नगरों के शोर-शराबे (कोलाहल) से दूर यह स्थान वास्तव में आत्म-उन्नति (आध्यात्मिक विकास) का स्थान है।
कक्षा 7 : संस्कृत : पाठ 2 : नीतिश्लोक
कक्षा 7
पाठ 3 नीति- श्लोक
श्लोक: विद्या ददाति विनयं, विनयाद्याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति, धनाद् धर्मः ततः सुखम्।।
सरल अनुवाद: विद्या (ज्ञान) हमें विनम्रता देती है। विनम्रता से इंसान में योग्यता (पात्रता) आती है। योग्यता होने से धन की प्राप्ति होती है, धन से इंसान धर्म के कार्य (अच्छे काम) करता है और अंत में उसे सुख मिलता है।
सीख: अगर हम अच्छे से पढ़ाई करेंगे, तो हमारे जीवन में सुख-शांति अपने आप आ जाएगी।
2. दूसरा श्लोक
श्लोक: आचारः प्रथमो धर्मः, आचारः परमं तपः।
आचारः परमं ज्ञानम्, आचारात् किं न सिध्यति।।
सरल अनुवाद: अच्छा आचरण (अच्छा व्यवहार या संस्कार) ही सबसे पहला धर्म है। अच्छा आचरण ही सबसे बड़ी तपस्या है और अच्छा आचरण ही सबसे बड़ा ज्ञान है। अच्छे आचरण से दुनिया में ऐसा क्या है जो हासिल नहीं किया जा सकता? (अर्थात, अच्छे व्यवहार से सब कुछ मिल सकता है)।
सीख: हमें हमेशा सबके साथ तमीज और अच्छे संस्कार से पेश आना चाहिए।
3. तीसरा श्लोक
श्लोक: प्रिय-वाक्य-प्रदानेन, सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।
तस्मात्तदेव वक्तव्यं, वचने का दरिद्रता।।
सरल अनुवाद: मीठे और प्यारे वचन (बोल) बोलने से सभी जीव-जंतु और इंसान खुश हो जाते हैं। इसलिए हमें हमेशा मीठी वाणी ही बोलनी चाहिए। भला अच्छे और मीठे बोल बोलने में कैसी कंजूसी (दरिद्रता)?
सीख: हमेशा सबसे प्यार से बात करनी चाहिए, क्योंकि मीठा बोलने में कोई पैसे नहीं लगते!
4. चौथा श्लोक
श्लोक: छायामन्यस्य कुर्वन्ति, स्वयं तिष्ठन्ति आतपे।
फलान्यपि परार्थाय, वृक्षाः सत्पुरुषाः इव।।
सरल अनुवाद: पेड़ खुद तो कड़ी धूप में खड़े रहते हैं, लेकिन दूसरों को ठंडी छाया देते हैं। उनके फल भी दूसरों के भले के लिए (खाने के लिए) ही होते हैं। सचमुच, पेड़ सज्जन (अच्छे) लोगों की तरह होते हैं, जो हमेशा दूसरों की मदद करते हैं।
सीख: हमें भी पेड़ों की तरह परोपकारी बनना चाहिए और दूसरों की मदद करनी चाहिए।
5. पांचवां श्लोक
श्लोक: प्राणान् त्यजति देशाय, पीडितानां सहायकः।
यः आचरति कल्याणं, लोके मानं सः विन्दति।।
सरल अनुवाद: जो इंसान अपने देश के लिए अपने प्राण तक दे देता है, जो दुखियों और पीड़ितों की मदद करता है और जो हमेशा सबका भला (कल्याण) करता है—वही इंसान इस संसार में सच्चा सम्मान और आदर पाता है।
सीख: देशप्रेम और दूसरों की सेवा करने वाले इंसान को दुनिया हमेशा याद रखती है।
6. छठा श्लोक
श्लोक: जाड्यं धियो हरति, सिञ्चति वाचि सत्यम्,
मानोन्नतिं दिशति, पापमपाकरोति।
चेतः प्रसादयति, दिक्षु तनोति कीर्तिम्,
सत्सङ्गतिः कथय, किं न करोति पुंसाम्।।
सरल अनुवाद: अच्छी संगति (सत्सङ्गति) इंसान के लिए क्या-क्या नहीं करती?
यह बुद्धि की मूर्खता को दूर करती है।
हमारी वाणी (बोली) में सच्चाई भरती है।
समाज में मान-सम्मान बढ़ाती है।
हमें पाप और गलत कामों से बचाती है।
हमारे मन को खुश रखती है।
चारों दिशाओं में हमारा यश (नाम) फैलाती है।
सच कहो, अच्छे दोस्तों की संगति इंसान का हर तरह से भला करती है!
सीख: हमें हमेशा अच्छे और संस्कारी बच्चों को ही अपना दोस्त बनाना चाहिए।
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