निम्नलिखित प्रश्नों को पढ़कर उत्तर लिखो :—
1. "संभलो की सुयोग न जाए चला — — — को।
प्र० 1 मनुष्य जीवन की सार्थकता किसमे है?
उ० - मनुष्य जीवन की सार्थकता निरंतर ऐसे कर्म करते हुए जीवन व्यतीत करने में है जिससे जीवन सार्थक हो सकें, और दूसरों का हित हो सकें।
प्र० 2 मनुष्य को सदैव किस बात का ज्ञान रखना चाहिए?
उ० - मनुष्य को सदैव अपने गौरव व आत्मसम्मान का ज्ञान रहना चाहिए।
प्र० 3 मनुष्य को अपने गौरव का किस प्रकार ध्यान रखना चाहिए?
उ० - मनुष्य को अपने गौरव का ध्यान इस प्रकार के कर्म करके रखना चाहिए, जिससे किसी भी मूल्य पर उसके मान-सम्मान को ठेस न लगने पाये।
प्र० 4 मानव जीवन की सार्थकता क्या होती है?
उ० - मनुष्य जीवन की सार्थकता बिना निराश हुए कर्म करते रहने में होती है।
2. "प्रभु — — — मन को।"
प्र० 1 प्रस्तुत पंक्तियों को माध्यम से कवि हमे क्या समझाना चाहते हैं?
उ० - कवि समझाना चाहते हैं कि मनुष्य को कभी कर्त्तव्य पथ से विमुख नही होना चाहिए। सह सदैव प्रसन्नता के साथ कर्म करते रहना चाहिए। फल की आशा नही करनी चाहिए।
प्र० 2 मनुष्य — — — प्रभु ने क्या दान में दिया?
उ० - मनुष्य को भगवान ने हाथ दान मे दिए है जिनसे वह अवांछित वस्तु को भी प्राप्त कर सकते हैं।
प्र० 3 मनुष्य संसार मे यश का भागी कैसे बनेगा?
उ० - मनुष्य को नित्य अपने गौरव का ध्यान रहना चाहिए तभी वह अच्छे कार्य कर संसार में यश प्राप्त करेगा।
प्र० 4 मनुष्य किसका अंश है?
उ० - मनुष्य जगदीश्वर अर्थात् ईश्वर का अंश है।
प्र० 5 वांछित व अलभ्य शब्दों का अर्थ लिखो।
उ० - वांछित व अलभ्य का अर्थ - इच्छित और अलभ्य का अर्थ – अप्राप्य है।
प्र० 6 प्रस्तुत कविता से हमे क्या सीख मिलती है?
उ० - "मन को हारे हार है मन के जीते जीत" मनुष्य को अपने मन को कभी उदास व निराश नही होने देना चाहिए।
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