Tuesday, 30 April 2024

काकी

काकी
लेखक - सियारामशरण गुप्त 

1. "वर्षा के अनंतर एक-दो दिन में ही पृथ्वी के ऊपर का पानी तो अगोचर हो जाता है परंतु भीतर ही भीतर उसकी आदत आदत जैसे बहुत दिन तक बनी रहती है वैसी ही उसके अंतस्तल में वह शोक जाकर बस गया था।"

प्रश्न - 1 'उसके' शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है? उसकी मनोदशा पर प्रकाश डालिए।

उत्तर- 'उसके' शब्द का प्रयोग श्यामू के लिए किया गया है। जिस प्रकार वर्षा के बाद वर्षा का पानी धरती के ऊपर से एक-दो दिन में सूख जाता है परंतु उसकी नमी अंदर कई दिन तक बनी रहती है। उसी प्रकार काकी की मृत्यु के बाद श्यामू बाहर से तो शांत रहने लगा था परंतु उसके अंतस्थल में वह शोक जाकर बस गया था। वह उदास रहने लगा था और काकी को याद करके अकेला बैठा- बैठा शून्य मन से आकाश की ओर देखता रहता था।।

प्रश्न - 2 'असत्य के आवरण मे सत्य बहुत दिन तक छिपा ना रह सका'- श्यामू को किस सत्य का, कैसे पता चला ? इससे उस पर क्या प्रभाव पड़ा ? 

उत्तर - श्यामू को उसकी माँ के सत्य के बारे में सच पता चला कि उसकी माँ मामा जी के पास नहीं राम जी के पास गई है। यह बात उसे अपने पड़ोस में रहने वाले दोस्तों द्वारा पता चली और वह कभी वापस नहीं आएगी तो वह बहुत उदास रहने लगा। वह अपनी माँ को याद कर के कोने में चुपचाप बैठ कर अंदर ही अंदर बहुत दुखी होता था।

प्रश्न - 3 ‘काकी’ कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए। 

उत्तर - इस कहानी में अत्यंत मार्मिक ढंग से एक अबोध तथा मासूम बालक की मातृ-वियोग की पीड़ा को व्यक्त किया गया है। कहानीकार ने यह चित्रित किया है कि बालकों का हृदय अत्यंत कोमल, भावुक तथा संवेदनशील होता है ।बच्चे मातृ वियोग का पीड़ा सहन नहीं कर पाते।

प्रश्न - 4 'काकी ' शीर्षक कहानी से बालकों के किस स्वभाव का पता चलता है ?

उत्तर - "काकी "शीर्षक कहानी से बालकों के कोमल मन, भावुकता और उनकी संवेदनशीलता के बारे में पता चलता है। वे अपने मातृ वियोग की पीड़ा को सहन नहीं कर पाते ,इस कहानी में श्यामू अपनी मांँ को याद करके दुखी हो रहा है और उन्हें बुलाने के लिए पतंग का सहारा लेना उत्तम समझता है अतः इससे हमें स्पष्ट पता चलता है कि बच्चों का मन बहुत ही कोमल और पवित्र होता है।

2-"एक दिन उसने ऊपर एक पतंग उड़ती देखी। न जाने क्या सोचकर उसका हृदय एकदम खिल उठा।"

प्रश्न – 1 ‘उसने’- से किस की ओर संकेत किया गया है? वह उदास क्यों रहा करता था?

उत्तर - "उसने" से श्यामू की ओर संकेत किया गया है। वह उदास इसलिए रहा करता था क्योंकि उसकी माँ राम जी के पास चली गई थी। अर्थात् वह कभी नहीं लौटेगी । अपनी माँ को याद में वह अक्सर घर के कोने में बैठकर आकाश की ओर देखा करता था।

प्रश्न - 2 उड़ती हुई पतंग को देखकर उसका ह्रदय क्या सोचकर खिल उठा? 

उत्तर - जब श्यामू ने एक दिन पतंग को आसमान में उड़ते हुए देखा तो वह मन ही मन बहुत खुश हो गया। उसके दिल में यह ख्याल आया कि वह पतंग के द्वारा अपनी काकी को नीचे जरूर ला पाएगा। यह सोचकर उसका हृदय एकदम खिल उठा।

प्रश्न – 3 पतंग मँगवाने के लिए उसने किन से प्रार्थना की ? उसकी बात सुनकर उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तर - पतंग मँगवाने के लिए श्यामू ने अपने पिता विश्वेश्वर से प्रार्थना की। पत्नी की मृत्यु के बाद विश्वेश्वर ( श्यामू के पिता) उदास रहा करते थे। जब श्यामू ने अपने पिता विश्वेश्वर से पतंग मँगवाने की प्रार्थना की तो वे उदास भाव में बोले कि अच्छा मँगा दूँगा और कह कर चले गए। किंतु उसको पतंग नहीं मँगवा कर दी।

प्रश्न – 4 पतंग प्राप्त करने के लिए उसने किस उपाय का सहारा लिया और पतंग मंगवाने के लिए किस की सहायता ली? इसका क्या परिणाम निकला?

उत्तर - पतंग प्राप्त करने के लिए श्यामू अपने पिता के कोट से चवन्नी चुरा ली और पतंग को मँगवाने के लिए उसने अपने मित्र भोला (सुखिया दासी के पुत्र)की सहायता ली। जब उसके पिता विश्वेश्वर को यह बात पता चली कि श्यामू ने उनकी जेब से चवन्नी चुराई है तब वह क्रोधित हुए और श्यामू को तमाचा मार दिया।

3-"देखो, खूब अकेले में जाना ,कोई जान ना पाए।"

प्रश्न – 1 वक्ता और श्रोता कौन कौन है ? दोनों का परिचय दीजिए।

उत्तर - इस वाक्य में वक्ता श्यामू है और श्रोता सुखिया दासी का बेटा भोला है ।श्यामू अपने पिता विश्वेश्वर का बेटा है । वह सीधा सा कोमल दिल वाला बालक है। भोला सुखिया दासी का बेटा और श्यामू का समवयस्क साथी भी है।

प्रश्न – 2 वक्ता ने श्वेता को अकेले में जाने के लिए क्यों कहा? उसे किस बात का भय था ?

उत्तर - श्यामू ने पतंग के पैसे अपने पिता की जेब से चुराए थे। इसलिए वह चाहता है कि उसका मित्र बिना किसी को दिखे अति शीघ्र पतंग लेकर आ जाए। किसी को यदि यह बात पता चलती है तो हो सकता है उसके काम में रुकावट आ जाए।

प्रश्न – 3 वक्ता ने उससे क्या मँगवाया ?उस वस्तु को लाने के लिए उसने उसे कितने पैसे दिए? वे पैसे उसने कहां से प्राप्त किए थे और क्यों?

उत्तर - श्यामू ने भोला से एक पतंग और डोर को मंँगवाया ।पतंग को मंँगवाने के लिए श्यामू अपने पिता विश्वेश्वर की जेब से पैसे चुराए और भोला को दे दिए । ताकि वह पतंग के द्वारा अपनी काकी को नीचे ला सके।

प्रश्न – 4 वक्ता उस वस्तु का प्रयोग किस लिए करना चाहता था? वह उसका प्रयोग क्यों नहीं कर पाया?

उत्तर - वक्ता श्यामू पतंग का प्रयोग करके काकी को उस पर बैठा कर नीचे लाना चाहता था ।जब श्यामू के पिता विश्वेश्वर को यह बात पता चली कि उसकी जेब से पैसे गायब हुए हैं तो वह बहुत क्रोधित हो गए । उन्होंने दोनों से पूछा कि चोरी किसने की है, यह सुनकर भोला ने डरकर सारी बात विश्वेश्वर को बता दी ।विश्वेश्वर क्रोधित हुए और श्यामू को डांँटते हुए पतंग फाड़ दी। जिस कारण श्यामू काकी को नीचे लाने के लिए पतंग का प्रयोग नहीं कर पाया।

4-'अकस्मात शुभ कार्य में विघ्न की तरह उग्र रूप धारण किए हुए विश्वेश्वर वहाँ आ पहुंँचे।"

प्रश्न - 1 'शुभ कार्य' और 'विघ्न' शब्दों का प्रयोग किस-किस संदर्भ में किया गया है?

उत्तर - श्यामू पतंग में डोरी बाँध रहा था और वह इसका प्रयोग अपनी माँ को नीचे लाने में करने वाला था। उसके लिए शुभ कार्य था परंतु शुभ कार्य में विघ्न की तरह उसके पिता वहाँ पहुँचे और उसे डाँटने लगे यही इस संदर्भ में दर्शित किया गया है।

प्रश्न - 2 विश्वेश्वर कौन है ? उनकी उग्रता का क्या कारण था ?

उत्तर - विश्वेश्वर श्यामू के पिता है ।जब उन्हें पता चला कि उनकी जेब से पैसे गायब हो गई है ,तो वह बहुत क्रोधित हुए ।सच जानने के लिए वे उन दोनों से पूछने लगे कि पैसे किसने चुराए हैं तो भोला ने डरकर सारी पोल खोल दी और सच विश्वेश्वर के सामने आ गया ।श्यामू को तमाचा जड़ दिया और कहा 'चोरी करोगे तो जेल जाओगे' यही कहकर पतंग भी फाड़ दी।उनकी उग्रता का यही कारण था।

प्रश्न - 3 वहाँ कौन-कौन थे और वे क्या कर रहे थे ?

उत्तर - कोठरी में श्यामू और भोला थे। वे दोनों पतंग में रस्सी बाँध रहे थे और उस पर काकी का नाम लिख रहे थे ताकि उस पतंग के सहारे नीचे आ जाए।

प्रश्न - 4 विश्वेश्वर ने धमकाकर किससे क्या पूछा और उन्हें असलियत का पता कैसे चला ? उन्होंने अपराधी को क्या दंड दिया ?

उत्तर - जब विश्वेश्वर को पता चला कि उनकी कोट की जेब से पैसे गायब हुए हैं तो वह क्रोधित हो गए और उन्होंने श्यामू और भोला को धमकाया कि किसने मेरी कोट की जेब से पैसे चुराए हैं। यह सुनकर भोला डर गया और सारी बात बता दी ।भोला ने कहा कि चोरी श्यामू ने की है , उसी ने मुझे पतंग लाने के लिए कहा था ।‌ विश्वेश्वर श्यामू पर बहुत क्रोधित हुए उसे तमाचा जड़ दिया। पतंग को भी नष्ट कर दिया।

5-"भोला सकपकाकर एक ही डाँट में मुखबिर हो गया।"

 प्रश्न - 1 भोला कौन था ? वह क्यों सकपका गया ? मुखबिर' शब्द का क्या अर्थ है ?

उत्तर - भोला सुखिया दासी का बेटा था ।वह श्यामू का समव्यस्क मित्र था ।जब उग्र रूप धारण किए विश्वेश्वर उस कोठरी में पहुँचे और धमकाकर भोला और श्यामू से चोरी का कारण पूछने लगे तो भोला ने डरकर श्यामू की सारी बात को कह दिया । मुखबिर का अर्थ है-" पोल खोल देना।"

प्रश्न - 2 डाँटने वाले का परिचय दीजिए ? उसके डाँटने का क्या कारण था ?

उत्तर - डाँटने वाले का नाम विश्वेश्वर था जो कि श्यामू के पिता थे, जब विश्वेश्वर को पता चला कि उनके बेटे ने उनकी जेब से पैसे चुराए हैं तो वह बहुत गुस्सा हुए ।और गुस्से में श्यामू को तमाचा जड़ दिया।

प्रश्न - 3 भोला ने डाँटने वाले को क्या बताया? भोला की बात सुनकर डाँटने वाले ने किसे क्या दंड दिया ?

उत्तर - उग्र रूप धारण किए विश्वेश्वर जब भोला और श्यामू को धमकाकर पूछने लगे कि तुमने मेरी जेब से पैसे चुराए थे। तब यह बात सुनकर भोला घबरा गया और उसने सारी बात बता दी। उसने बताया कि पैसे श्यामू ने चुराए थे। श्यामू ने मुझसे पतंग लाने के लिए कहा था। यह सुनकर विश्वेश्वर और भी क्रोधित हो गए ।श्यामू को डांँटा और तमाचा जड़ते हुए कहने लगे कि 'चोरी सीखो गे तो जेल जाओगे 'यह कहकर में पतंग को भी फाड़ दिया।

प्रश्न - 4 भोला की बात सुनकर डाँटने वाले की क्या मनोदशा हुई ?

उत्तर - भोला ने जब विश्वेश्वर को बताया कि श्यामू ने पतंग अपनी काकी को नीचे लाने के लिए खरीदी थी, तब उन्हें बहुत ही दुख हुआ ।यह सुनकर हत बुद्धि हो गए थे । पतंग पर काकी का नाम लिखा देखा तो उन्हें बहुत पश्चाताप हुआ।उन्हें एहसास हुआ कि वे व्यर्थ में ही अपने बच्चे को डाँट रहे थे।





Monday, 22 April 2024

साखी


कविता  1 साखी
कवि - कबीरदास


 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए - 

गुरु गोबिंद दोऊ खड़े काके लागू पायँ।
बलिहारी गुरु आपनो, जिन गोबिंद दियौ बताय।।

प्रश्न - 1 संत कबीर ने गुरु और ईश्वर की तुलना किस प्रकार की है तथा इस दोहे के माध्यम से क्या सीख दी है ?

उत्तर 1. संत कबीर ने गुरु और ईश्वर की तुलना करते हुए कहा है कि अगर गुरु और ईश्वर दोनों मेरे सामने हो तो मैं गुरु के चरण स्पर्श करूंगा क्योंकि गुरु ने ही मुझे ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग बताया हैं। इस दोहे के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि गुरु के बिना ईश्वर को प्राप्त नहीं किया जा सकता क्योंकि ईश्वर को पाने का माध्यम गुरु ही है।

प्रश्न - 2 'गुरु' और 'भगवान' को अपने सामने पाकर कबीर ने कौन-सी समस्या उत्पन्न हुई ? कबीर ने उसका हल किस प्रकार निकाला और क्यों ?

उत्तर 2. गुरु और भगवान को सामने पाकर कबीर की समस्या है कि वह किसके चरण स्पर्श करें। कबीर ने उसका हल इस प्रकार निकाला की वह पहले गुरु के चरण स्पर्श करेगा क्योंकि गुरु ने ही ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग बताया है। इस प्रकार गुरु ईश्वर से भी महान है। अगर गुरु न होते तो ईश्वर की प्राप्ति असंभव थी।

प्रश्न - 3 'बलिहारी गुरु आपनो' कबीर ने ऐसा क्यों कहा है ?

उत्तर 3. 'बलिहारी गुरु आपनो' अर्थात् मैं अपने गुरु पर बलिहारी जाता हूँ । कबीर ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि गुरु ने ही उसे भगवान के दर्शन करवाएं हैं।

प्रश्न -4 'गुरु गोबिंद दोऊ खड़े' - शीर्षक साखी के आधार पर गुरु का महत्त्व प्रतिपादित कीजिए।

उत्तर 4. कबीर की दृष्टि में गुरु की महिमा अपार है। वह गुरु को ईश्वर से भी बढ़कर मानते हैं। उनका मत है कि गुरु की कृपा से ही ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है। कबीर का कहना है कि भगवान के रूठने पर गुरु का सहारा मिल सकता है किंतु गुरु के रूठने पर कोई सहारा नहीं मिल सकता है।

जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहि।
प्रेम गली अति साँकरी, तामे दो न समाहि।।

प्रश्न - 1 'जब 'मैं' था तब हरि नहीं' - दोहे में 'मैं' शब्द का प्रयोग किस अर्थ में किया गया है ? 'जब मैं था तब हरि नहीं' - पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर 1. दोहे में 'मैं' शब्द का प्रयोग स्वयं कबीरदास जी ने अहंकार के लिए किया है। इस पंक्ति द्वारा कबीरदास जी कहते हैं कि जब तक मनुष्य के भीतर अहंकार की भावना होती है तब तक उसमें ईश्वर का वास नहीं हो सकता है। अहंकारी व्यक्ति ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग को नहीं समझ सकता।

प्रश्न - 2 कबीर के अनुसार प्रेम की गली की क्या विशेषता है ? प्रेम की गली में कौन-सी दो बातें एक साथ नहीं रह सकती और क्यों ?
उत्तर 2. कबीर के अनुसार प्रेम की गली बहुत संकरी (पतली) और तंग है। इसमें भगवान और अहंकार साथ-साथ नहीं रह सकते। भाव यह है कि यदि व्यक्ति अहंकारी है तो वह कभी भी भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता और जो भगवान को पा लेता है, उसका अहंकार स्वत: ही समाप्त हो जाता है।

प्रश्न - 3 उपर्युक्त साथी द्वारा कबीर क्या संदेश देना चाहते हैं ?
उत्तर 3. उपर्युक्त साखी द्वारा कबीर यह संदेश देना चाहते हैं कि व्यक्ति को घमंड का त्याग कर देना चाहिए क्योंकि जिन वस्तु पर वह घमंड करता है, वे एक दिन समाप्त हो जाती हैं परंतु ईश्वर को प्राप्त करके घमंड करने वाली वस्तुओं की आवश्यकता ही नहीं रहती। ईश्वर शाश्वत है, सत्य है, और हमेशा रहने वाला है।

प्रश्न - 4 'प्रेम गली अति  साँकरी' - पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर 4. उपर्युक्त पंक्ति का आशय यह है कि प्रेम गली बहुत छोटी है। उसमें एक साथ मनुष्य का अहंकार और भगवान नहीं रह सकते। जहाँ ईश्वर का वास होता है वहां अहंकार नहीं होता। इस प्रकार भगवान के प्रति जो प्रेम गली है, उसमें ईश्वर ही रह सकते हैं अहंकार नहीं।

काँकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई बनाय।
ता चढ़ि मुल्ला बाँग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय।।

प्रश्न - 1 कबीर ने मसजिद की क्या-क्या विशेषताएँ बताई हैं ?
उत्तर 1. कबीर ने अपनी साखियों में प्रचलित रूढ़ियों एवं आडंबरों पर गहरी चोट की है। कबीर जी कहते हैं कि मुसलमानों ने कंकड़ पत्थर जोड़कर मस्जिद बना ली है। यह उनकी धार्मिक उपासना का स्थल है जिस पर मौलवी चिल्ला-चिल्ला कर नमाज पढ़ते हैं, जैसे कि उनका खुदा बहरा हो। उनके अनुसार खुदा तो सर्वत्र व्याप्त है, उसके लिए मस्जिद बनाकर उसमें अज़ान के लिए जोर-जोर से चिल्लाना आवश्यक नहीं है।

प्रश्न - 2 उपर्युक्त पंक्तियों में निहित व्यंग्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर 2. उपर्युक्त पंक्तियों में निहित व्यंग्य यह है कि खुदा को मन ही मन भी याद किया जा सकता है। उसे चिल्ला कर बुलाने की आवश्यकता नहीं है। परमात्मा हर व्यक्ति के हृदय में वास करता है। इस प्रकार उसे शांत भाव से भी याद किया जा सकता है।

 प्रश्न - 3 उपर्युक्त दोहे के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि कबीर ने बाहय आडंबरो के विरोधी थे।
उत्तर 3. कबीर के अनुसार ईश्वर को याद करने के लिए बाहरी  आडंबरों की आवश्यकता नहीं है। जो व्यक्ति परमात्मा को सच्चे दिल से याद करेगा वह उसे निश्चित ही प्राप्त कर लेगा।

प्रश्न - 4 उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कबिर क्या संदेश देना चाहते हैं ?
उत्तर 4. उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कबीर यह संदेश देना चाहते हैं कि हमें अंधविश्वास व बाहरी आडंबरों को त्याग देना चाहिए क्योंकि ईश्वर को सच्चे मन से याद करके भी प्राप्त किया जा सकता है।

पाहन पूजे हरि मिले तो मैं पूजूँ पहार।
ताते ये चाकी भली, पीस खाय संसार।।

प्रश्न - 1 कबीर हिंदू की मूर्ति पूजा पर किस प्रकार व्यंग्य कर रहे हैं ?
उत्तर 1. हिंदुओं की मूर्ति पूजा पर व्यंग करते हुए कबीरदास जी कहते हैं कि अगर पत्थर पूजने से भगवान मिल जाते हैं तो मैं हिमालय पर्वत को पूजुं। उससे तो यह गेहूं पीसने की चक्की ज्यादा भली है, जिससे सारा संसार अन्य खाता है। कबीर का कहना है कि मनुष्य को मूर्ति पूजा छोड़कर निर्गुण भक्ति अपनानी चाहिए।

प्रश्न - 2 'ताते यह चाकी भली' - पंक्ति द्वारा कबीर क्या कहना चाहते हैं ?
उत्तर 2. कबीर दास जी मूर्तियों से गेहूं पीसने की चक्की की तुलना करते हुए कहते हैं कि यह गेहूं पीसने की  चक्की ज्यादा भली है क्योंकि इससे पीसा हुआ अन्न सारा संसार खाता है।

प्रश्न - 3 'कबीर एक समाज सुधारक थे' - उपर्युक्त पंक्तियों के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए तथा बताइए कि इन पंक्तियों द्वारा वह क्या संदेश दे रहे हैं ?
उत्तर 3. कबीर जी वास्तव में एक समाज सुधारक थे। उन्होंने हिंदू धर्म में फैले अंधविश्वासों मूर्ति पूजा और अन्य कुरीतियों का घोर विरोध किया। उन्होंने मुसलमानो  के बाहरी आडंबरों, रोज़े, नमाज़, काज़ी, मुल्ला, आदि लोगो का खंडन किया।

प्रश्न - 4 कबीर की भाषा पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर 4. कबीर की भाषा में भोजपुरी, अवधी, ब्रज, राजस्थानी, पंजाबी, खड़ी बोली, उर्दू और फ़ारसी आदि भाषाओं के शब्द भी पाए जाते हैं, इसलिए विद्वानों ने कबीर की भाषा को सधुक्कड़ी या पंचमेल खिचड़ी कहा है।

सात समंद की मसि करौं, लेखनि सब बनराय।
सब धरती कागद करौं, हरि गुन लिखा न जाय।।

प्रश्न - 1 'भगवान के गुण अनंत हैं' - कबीर ये यह बात किस प्रकार स्पष्ट की है ?
उत्तर - प्रस्तुत साखी के माध्यम से कबीरदास जी ने भगवान के गुणों का महिमामंडन किया है। वे कहते हैं कि यदि सातों समुद्रों की स्याही बना दी जाए, सारे जंगलों के पेड़ों की कलमें बनाई जाएँ तथा समस्त पृथ्वी को कागज के रूप में प्रयोग कर लिया जाए तब भी हम ईश्वर के गुणों का वर्णन नहीं कर सकते क्योंकि भगवान के गुण अनंत हैं।

प्रश्न - 2 कबीर की भक्ति भावना पर प्रकाश डालिए।
उत्तर - कबीरदास निर्गुण भक्ति शाखा के ज्ञानाश्रयी कवि थे। उन्होंने निर्गुण ब्रह्मा की उपासना की इसलिए इन्होंने मूर्ति-पूजा, ढोंग-आडंबर आदि का डटकर विरोध किया। यह भक्ति सामान्य व्यक्ति के लिए आसान नहीं होती क्योंकि इसमें जप-तप और ध्यान का महत्व होता है।

प्रश्न - 3 कबीर ने भगवान के गुणों का बखान करने के लिए किन - किन वस्तुओं की कल्पना की है ? वे इस कार्य के लिए पर्याप्त क्यों नहीं है ?
उत्तर - कबीर ने भगवान के गुणों का बखान करने के लिए सातों समुद्रों को स्याही, सारे जंगलों के पेड़ों को कलम तथा समस्त पृथ्वी को कागज बनाने की कल्पना की है। किंतु फिर भी वे इस कार्य के लिए पर्याप्त नहीं है क्योंकि भगवान के गुण अनंत है।

प्रश्न - 4 'लेखनि सब बनराय' का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से कवि कहते हैं कि यदि सारे जंगल के पेड़ों से कलम बना दिया जाए और समस्त पृथ्वी को कागज बनाकर उसका प्रयोग किया जाए तो भी ईश्वर के गुणों को नहीं लिखा जा सकता। इसलिए हम कह सकते हैं कि भगवान के गुण अनंत हैं।

Thursday, 7 April 2022

भीड़ में खोया आदमी

भीड़ में खोया आदमी
लेखक – लीलाधर शर्मा पर्वतीय

 निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए –

1. ‘उम्र में मुझ से छोटे हैं, पर अपने घर में बच्चों की फौज खड़ी कर ली है।'

क – उम्र में कौन, किससे छोटा है? दोनों का नाम बताएँ और आपस में दोनों का क्या संबंध है?

उत्तर – प्रस्तुत वाक्य लेखक द्वारा उनके अभिन्न मित्र के लिए कहा गया है। उम्र में लेखक लीलाधर शर्मा पर्वतीय जी अपने मित्र बाबू श्यामलाकांत से छोटे हैं।

ख – किसने घर में बच्चे की फौज खड़ी कर ली है? उसकी चरित्रगत विशेषताएँ लिखें।

उत्तर – लेखक के मित्र बाबू श्यामलाकांत जी ने अपने घर में बच्चों की फौज खड़ी कर ली है। बाबू श्यामलाकांत बड़े सीधे-सादे, परिश्रमी, ईमानदार किन्तु निजी जीवन में बड़े लापरवाह व्यक्ति थे।

ग – बच्चों की फौज से क्या तात्पर्य है? उन्हें वह परिवार ‘बच्चों की फौज’ क्यों लगता है ?

उत्तर – बच्चों की फौज तात्पर्य छोटे से मकान में बच्चों की अधिक संख्या होने से है। श्यामलाकांत की बड़ी बेटी की शादी थी। उनका एक बेटा पढ़ाई पूरी करके नौकरी की तलाश में भटक रहा था। एक लड़का घर के कामकाज में मदद करता है। उनकी तीन छोटी लड़कियाँ और दो छोटे लड़के थे। इसलिए लेखक को श्यामलाकांत का परिवार बच्चों की फौज जैसा प्रतीत हुआ।

घ – क्या उसका परिवार एक सुखी परिवार है? कैसे?

उत्तर – नहीं, उनका परिवार एक सुखी परिवार नहीं था क्योंकि इतने बड़े परिवार में रहन-सहन व खान-पान की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। हर दिन कोई न कोई बीमार रहता था। घर में कोई भी काम ढंग से नहीं हो पाता था। कोई न कोई परेशानी उन्हें घेरे रहती थी।

2. भाई, नाम तो तुम्हारा लिख देता हूँ पर जल्दी नौकरी पाने की कोई आशा मत करना।

क – यह पंक्ति कौन, किसके लिए कह रहा है वह क्यों कह रहा है ?

उत्तर – श्यामलाकांत बाबू का बड़ा लड़का दीनानाथ रोजगार कार्यालय में जब नौकरी पाने के लिए अपना नाम लिखवाने गया था तब वहाँ उपस्थित अधिकारी ने उसका नाम तो लिख दिया परंतु साथ ही में कह भी दिया कि वह जल्दी नौकरी पाने की कोई आशा न रखें क्योंकि उसकी योग्यता वाले हज़ारों लोग पहले ही कतार में थे ।

ख - उसे नौकरी खोजते कितने वर्ष हो गए? उसे नौकरी क्यों नहीं मिल रही ?

उत्तर – उसे नौकरी खोजते हुए दो वर्ष हो गए थे। बढ़ती जनसंख्या के कारण बेरोजगारी की समस्या भी बढ़ती है क्योंकि नौकरी के एक पद के लिए सामान्य योग्यता के अनेक उम्मीदवार आवेदन देते हैं।

ग – इस पंक्ति में लेखक ने देश की किस समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया है और कैसे?

उत्तर – इस पंक्ति के माध्यम से लेखक ने बड़ी उत्कृष्टता से देश में बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण उत्पन्न बेरोजगारी की समस्या की ओर हमारा ध्यान आकर्षित किया है। श्यामलाताल का बड़ा पुत्र दीनानाथ जब रोजगार कार्यालय में नौकरी के लिए गया तो वहाँ उपस्थित अधिकारी ने उससे कह दिया कि उसकी योग्यता के हजारों उम्मीदवार पहले ही कतार में है इसलिए वह जल्दी नौकरी की कामना न करें।

घ - इस समस्या के समाधान के लिए कोई दो बिंदु लिखें।

उत्तर – इस समस्या का कारण जनसंख्या विस्फोट है। अतः इस समस्या के समाधान के लिए दो बिंदु निम्नलिखित हैं –
• परिवार नियोजन की शिक्षा प्रत्येक नागरिक को दी जाए।
• जनसंख्या विस्फोट को रोका जाए तथा नियंत्रित किया जाए।

3. ‘क्या तुम्हारे पास यही दो कमरे हैं?’

क – यह पंक्ति किसने, किससे कहीं और क्यों कहीं

उत्तर – लेखक बाबू श्यामलाकांत की बेटी की शादी में शामिल होने उनके घर गए थे। लेखक ने वहाँ बच्चों की भीड़ देखी, जिसके हिसाब से दो कमरों का घर बहुत छोटा था। इसलिए लेखक ने श्यामलाकांत से यह प्रश्न किया।

ख – इस प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कौन - सी परेशानी बताई?

उत्तर – उन्होंने बताया कि वह दो वर्ष से मकान की तलाश में भटक रहे हैं। शहर में चक्कर काट-काट कर उनके जूते घिस गए थे तब बड़ी मुश्किल से उन्हें मकान के नाम पर सिर छिपाने के लिए गली के अंदर एक छत मिली है।

ग – उन कमरों में कितने लोग रहते हैं? उनका विवरण दें ।

उत्तर – उन कमरों में श्यामला काम उसकी पत्नी व उनके आठ बच्चे रहते थे। इतने बड़े परिवार के लिए दो कमरे बहुत कम थे। श्यामला कांत का बड़ा लड़का दीनानाथ दो वर्षो से नौकरी की तलाश कर रहा था, दूसरा बेटा सुमंत घर के छोटे-मोटे काम काज देखा करता था, एक बेटी की शादी होने वाली थी बाकी और तीन छोटी लड़कियाँ और दो छोटे लड़के थे।

घ - इस पंक्ति में किस समस्या की ओर संकेत किया गया है?

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति में लेखक ने बढ़ती जनसंख्या के कारण आवास की समस्या की ओर संकेत किया है। शहर पहले की तुलना में कई गुना फैल चुके हैं, दूर-दूर तक नई कालोनी बन गई है, फिर भी बहुत से लोग मकानों के लिए भटक रहे हैं।

4. ‘कब से अस्वस्थ हैं? डॉक्टर को दिखा कर इलाज नहीं करा रही हैं क्या?’

क – यह पंक्ति किसने, किससे कही और क्यों कही?

उत्तर – प्रस्तुत वाक्यांश लेखक ने श्यामलाकांत की पत्नी से कहा। जब श्यामला जी की पत्नी जलपान लेकर आई तब उनके पीछे तीन छोटी लड़कियाँ और पल्ला पकड़े दो लड़के थे। लेखक उनकी दुर्बल काया और पीला चेहरा देखकर स्तब्ध रह गय। इसलिए उसने यह बात श्यामला जी की पत्नी से कही।

ख – इस प्रश्न के उत्तर में उन्होंने किस परेशानी का उल्लेख किया?

उत्तर – इस प्रश्न के उत्तर में श्यामलाकांत जी की पत्नी ने बताया कि इतने बड़े परिवार में रोज कोई न कोई बीमार रहता ही है। अस्पताल में भी रोगी व उनके संबंधी डॉक्टर को मधुमक्खी के छत्ते की तरह घेरे रहते हैं,जिस कारण डॉक्टर अच्छी तरह देख नहीं पाते। ऐसा लगता है मानो जैसे पूरा शहर अस्पताल में उमड़ आया हो।

ग – व्यक्ति बीमार किन कारणों से होता है? कोई दो कारण बताएँ। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?

उत्तर – उचित आहार की कमी के कारण व्यक्ति की बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। कुपोषण बीमारियों का कारण होता है।
दूषित वातावरण व गंदगी भी बीमारी के कीटाणुओं को बढ़ाते हैं। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए पौष्टिक आहार और स्वच्छ वातावरण अति आवश्यक है।

घ – बीमारियों से बचने के कोई दो उपाय बताएँ।

उत्तर – बीमारियों से बचने के लिए हमें गंदगी और दूषित वातावरण से बचना चाहिए। आहार में पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में शामिल करने चाहिए। नियमित योग तथा व्यायाम करना चाहिए।

5. ‘मुझे अपने मित्र श्यामलाकांत को अब इस भीड़ का रहस्य बताने की आवश्यकता नहीं है।'

क – ‘मुझे’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है? उन्हें अपने मित्र को किस भीड़ का रहस्य बताने की आवश्यकता नहीं है और क्यों?

उत्तर – लेखक लीलाधर शर्मा पर्वतीय जी के लिए ‘मुझे’ शब्द का प्रयोग किया गया है। उन्हें अपने मित्र को भीड़ का रहस्य बताने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि श्यामलाकांत स्वयं इतने बड़े परिवार के कारण इन समस्याओं को झेल रहे थे।

ख – श्यामलाकांत को अपने घर में भीड़ के कारण किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?

उत्तर – श्यामलाकांत को अपने घर में भीड़ के कारण बच्चों के पालन-पोषण की, रहन-सहन क, शिक्षा-दीक्षा की समस्याएँ झेल रहे थे। गंदे तथा संकीर्ण मकानों में दूषित वातावरण के कारण घर में कोई न कोई बीमार रहता ही था।

ग – ‘भीड़’ शब्द से देश की किस समस्या की ओर संकेत किया गया है? इस समस्या के कारण किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है?

उत्तर – ‘भीड़’ शब्द देश में बढ़ती हुई अनियंत्रित जनसंख्या की ओर संकेत करता है। इस समस्या के कारण हमारे देश में रोजगार संबंधी समस्याएँ, चिकित्सा संबंधी समस्याएँ, आवासीय समस्याएँ, यातायात संबंधी समस्याएँ व पालन -पोषण संबंधी अनेक समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं।

घ – ‘भीड़’ से पैदा होने वाली समस्याओं से किस प्रकार छुटकारा मिल सकता है?

उत्तर – भीड़ अथवा बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए लोगों को सामाजिक रूप से जागरूक करना अति आवश्यक है। लोगों को इस बात की परिवार नियोजन की शिक्षा देनी चाहिए कि छोटा परिवार ही सुखी परिवार होता है। लोगों को अपनी आय तथा साधनों के अनुरूप ही परिवार को नियोजित करना चाहिए।

Wednesday, 6 April 2022

बात अठन्नी की

बाजार के बाद गुपचुप रूप से अब बैंकों ने भी अठन्नी को नकारा

बात अठन्नी की
सुदर्शन

“अगर तुम्हें कोई ज्यादा दे, तो अवश्य चले जाओ । मैं तनख्वाह नहीं बनाऊंगा।''

I. वक्ता कौन है ? उसका परिचय दीजिए। उसने उपयुक्त वाक्य किस संदर्भ में कहा है?
 उत्तर - वक्ता  बाबू जगत सिंह है। वह बहुत रिश्वत लेते थे और रसीला को बहुत कम तनख्वाह देते थे। जब रसीला ने तनख्वाह को बढ़ाने की बात कही तो उन्होंने तनख्वाह बढ़ाने से मना कर दिया और कहा कि अगर कोई तुम्हें दस रुपए से ज्यादा तनख्वाह दे, तो चले जाओ। इस बात से यह पता चलता है कि वह कितने कठोर हृदय के व्यक्ति हैं।

II. श्रोता कौन है ? उसने तनख्वाह बढ़ाने की प्रार्थना क्यों की?
उत्तर - श्रोता रसीला है, जिसकी तनख्वाह दस रुपए है। उसने तनख्वाह बढ़ाने की प्रार्थना इसलिए की क्योंकि उसके गांव में बूढ़े पिता पत्नी एक लड़की और दो लड़के थे इन सब का भार उसी के कंधों पर था वह सारी तनख्वाह घर भेज देता पर घर वालों का गुजारा ना चल पाता था।

III. वेतन न बढ़ने पर भी रसीला बाबू जगतसिंह की नौकरी क्यों नहीं छोड़ना चाहता था ?
उत्तर - वेतन न बढ़ने पर भी रसीला बाबू जगतसिंह की नौकरी नहीं छोड़ना चाहता था क्योंकि उसे लगता था कि वह वहां इतने सालों से है लेकिन उस पर कभी किसी ने संदेह नहीं किया। यदि वह कहीं और चला भी जाए तो शायद कोई ग्यारह - बारह दे दे, पर ऐसा आदर न मिलेगा।

IV. रसीला को रुपयों की आवश्यकता क्यों थी? उसकी सहायता किसने की? सहायता करने वाले के संबंध में उसके क्या विचार किया?
उत्तर - रसीला को रुपयों की आवश्यकता इसलिए थी क्योंकि उसके घर से खत आया था कि उसके बच्चे बीमार है और उनके पास पैसे नहीं है। उसकी सहायता रमज़ान ने की। रमजान के संबंध में रसीला के विचार थे कि गरीब होकर भी उसने मेरी सहायता की, वह आदमी नहीं, देवता है। ईश्वर उसका भला करें।

“बाबू साहब की मैंने इतनी सेवा की, पर दुख में उन्होंने साथ नहीं दिया।"

I. बाबू साहब कौन थे? उनका परिचय दीजिए।
उत्तर - बाबू साहब इंजीनियर जगतसिंह थे। वे बहुत भ्रष्ट और निर्दयी थे। रसीला उनके यहां कई सालो से नौकर था। जब रसीला अपना वेतन बढ़ाने की बात कहता तो वह नहीं मानते थे। एक दिन उन्होंने रसीला को उसकी छोटी - सी चोरी के लिए जेल पहुंचा दिया, लेकिन खुद रोजाना हज़ार – पांच सौ  की रिश्वत लेते थे।

II. वक्ता को कितना वेतन मिलता था? उसमें उसका गुजारा क्यों नहीं हो पाता था?
उत्तर - वक्ता रसीला था। उसको दस रुपए वेतन मिलता था लेकिन उसका गुजारा दस रूप में नहीं हो पाता था क्योंकि गांव में उसके बूढ़े पिता, पत्नी, एक लड़की और दो लड़के थे। इन सब का भार उसी के कंधों पर था।

III. बाबू साहब द्वारा वक्ता का वेतन ने बढ़ाए जाने पर भी वह कहीं और नौकरी क्यों नहीं करना चाहता था ?
उत्तर - वेतन न बढ़ने पर भी रसीला बाबू जगतसिंह की नौकरी नहीं छोड़ना चाहता था क्योंकि उसे लगता था कि वह वहां इतने सालों से है लेकिन उस पर कभी किसी ने संदेह नहीं किया। यदि वह कहीं और चला भी जाए तो शायद कोई ग्यारह - बारह दे दे, पर ऐसा आदर न मिलेगा।

IV. वक्ता की परेशानी को किसने, किस प्रकार हल किया? इससे उसके चरित्र की किस विशेषता का पता चलता है?
उत्तर - वक्ता की परेशानी को रमज़ान ने हल किया। उसने कुछ पैसे उसको दे दिए। इससे उसके चरित्र की इस विशेषता का पता चलता है कि वह बहुत दयालु और दयावान था।

'बस पाँच सौ ! इतनी-सी रकम देकर आप मेरा अपमान कर रहे हैं।' ' हुजूर मान जाइए। आप समझे आपने मेरा काम मुफ्त किया है।'

I. वक्ता और श्रोता कौन-कौन है ? उनके कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - वक्ता बाबू जगत सिंह हैं और श्रोता एक व्यक्ति है। जब श्रोता ने बाबू जगतसिंह को पांच सौ रुपए की रिश्वत पेश की तो बाबू जगत सिंह ने कहा कि इतनी - सी रकम मेरे लिए कम है, मैं तो बड़ा आदमी हूं मुझे और रिश्वत चाहिए।

II. रसीला उनकी बातचीत को सुनकर क्या समझ गया और क्या सोचने लगा?
उत्तर - रसीला उनकी बातचीत सुनकर समझ गया कि भीतर रिश्वत ली जा रही है। वह सोचने लगा कि रुपया कमाने का यह आसान तरीका है।

III. 'आप मेरा अपमान कर रहे हैं।' कथन से वक्ता का क्या संकेत था? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - 'आप मेरा अपमान कर रहे हैं।' यह कथन बाबू जगतसिंह  का है, जिसके द्वारा वह यह संकेत देना चाहते हैं कि वह एक बड़े आदमी हैं और उनके लिए पांच  सौ रुपए की रिश्वत बहुत कम है।

IV. उपर्युक्त पंक्तियों में समाज में व्याप्त किस बुराई की ओर संकेत किया गया है? इस बुराई का समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर - उपयुक्त पंक्तियों में समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी की ओर संकेत किया गया है। इस बुराई का समाज पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। जो लोग रिश्वत लेते हैं, वह किसी का काम बिना रिश्वत लिए नहीं करना चाहते और जो लोग ईमानदार हैं तथा रिश्वत नहीं लेते उन्हें कुछ नहीं मिलता। इस कारण अमीर लोग और अमीर होते जा रहे हैं और गरीब लोग और गरीब होते जा रहे हैं।

बस इतनी-सी बात! हमारे शेख साहब तो उनके भी गुरु हैं।

I. वक्ता और श्रोता कौन-कौन है? दोनों का परिचय दीजिए।
उत्तर - वक्ता रमज़ान है तथा श्रोता रसीला है। रमज़ान जिला मजिस्ट्रेट शेख सलीमुद्दीन के यहां चौकीदार है तथा रसीला इंजीनियर बाबू जगतसिंह के यहां नौकर है। यह दोनों अच्छे मित्र हैं तथा दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी हैं।

II. 'बस इतनी-सी बात' - पंक्ति का व्यंग स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - रमज़ान ने यह व्यंग इसलिए किया क्योंकि रिश्वत लेने के मामले में शेख सलीमुद्दीन बाबू जगतसिंह के भी गुरु थे। बाबू जगत सिंह ने रिश्वत में पांच सौ रुपए ही लिए थे, यदि शेख सलीमुद्दीन होते तो एक हज़ार रुपए से कम में न मानते।

III. 'शेख साहब तो उनके भी गुरु हैं' - वाक्य में 'शेख साहब' और 'उनके' शब्दों का प्रयोग किस-किसके लिए किया गया है? 'उनके भी गुरु है’ - पंक्ति द्वारा क्या व्यंग किया गया है?
उत्तर - वाक्य में 'शेख साहब' शेख सलीमुद्दीन के लिए तथा 'उनके' बाबू जगतसिंह के लिए प्रयोग किया गया है। वाक्य में 'उनके भी गुरु है' व्यंग इसलिए किया गया है क्योंकि न्याय के सिंहासन पर बैठ कर भी शेख सलीमुद्दीन रिश्वत का लेन-देन किया करते थे और हज़ार से कम में न मानते थे।

IV. वक्ता ने 'शेख साहब' के संदर्भ में श्रोता से अपनी विवशता के संबंध में क्या-क्या कहा ?
उत्तर - रमज़ान में रसीला से कहा कि बाबू साहब द्वारा ली जा रही रिश्वत शेख साहब के मुताबिक बहुत कम है। रमजान के अनुसार गुनाह का फल मिलेगा या नहीं, यह तो भगवान जाने, पर ऐसी ही कमाई से कोठियों में रहते हैं, और एक हम हैं कि परिश्रम करने पर भी हाथ में कुछ नहीं रहता।

'रसीला ने तुरंत अपना अपराध स्वीकार कर लिया । उसने कोई बहाना नहीं बनाया।'

I. रसीला का मुकदमा किस की अदालत में पेश हुआ ? उनका परिचय दीजिए।
उत्तर - रसीला का मुकदमा शेख सलीमुद्दीन की अदालत में पेश हुआ था। शेख सलीमुद्दीन बाबू जगत सिंह के पड़ोसी थे तथा जिला मजिस्ट्रेट होते हुए भी वे बहुत बेईमान और रिश्वतखोर थे।

II. रसीला का क्या अपराध था? उसने उसे तुरंत स्वीकार कर लिया, इससे उसके चरित्र की किस विशेषता की ओर संकेत होता है?
उत्तर - रसीला का अपराध बस इतना ही था कि उसने रमज़ान का कर्ज उतारने के लिए बाबू जगतसिंह द्वारा मंगाई गई पांच रुपए की मिठाई में अठन्नी की हेरा-फेरी की थी।
चोरी पकड़े जाने पर उसने अपना अपराध तुरंत स्वीकार कर लिया, जिससे यह सिद्ध होता है कि वह एक भला मानस और ईमानदार व्यक्ति था।

III. रसीला क्या-क्या बहाने बनाकर अपने को बेकसूर साबित कर सकता था, पर उसने ऐसा क्यों नहीं किया?
उत्तर - रसीला चाहता तो वह यह कह सकता था कि यह साजिश है। मैं नौकरी नहीं करना चाहता इसीलिए हलवाई से मिलकर मुझे फंसाया जा रहा हैं, पर एक और अपराध करने का साहस रसीला न जुटा पाया।

IV. रसीला को कितनी सजा हुई? न्याय व्यवस्था पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर - रसीला को सिर्फ एक अठन्नी की हेरा-फेरी के लिए छह महीने की कारावास का दंड मिला। प्रस्तुत कहानी में न्याय व्यवस्था पर करारा प्रहार किया गया है। जो लोग ऊंचे पदों पर बैठे हैं, वे हजारों की रिश्वत का लेन देन करते हैं और कोठियों में रहकर एक सम्मानित जीवन व्यतीत करते हैं, वही एक गरीब मात्र एक अठन्नी की हेराफेरी के लिए छह महीने कारावास का दंड भोगता है।

'फैसला सुनकर रमज़ान की आंखों में खून उतर आया।'

I. रमज़ान कौन था ? उसका परिचय दीजिए।
उत्तर - रमजान का रसीला का मित्र था। वह जिला मजिस्ट्रेट शेख सलीमुद्दीन के यहां चौकीदार था और बहुत ही दयावान था। उसने रसीला की सहायता उसके बुरे समय में की थी।

II. फैसला किसने सुनाया था ? उसकी चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर - फैसला शेख सलीमुद्दीन में सुनाया था। वह खुद ही बहुत बड़े रिश्वतखोर थे न्याय की गद्दी पर बैठकर भी वे बहुत बड़े बेईमान और भ्रष्ट व्यक्ति थे

III. फैसला सुनकर रमज़ान क्या सोचने लगा?
उत्तर - फैसला सुनकर रमजान की आंखों में खून उतर आया और वह सोचने लगा कि यह दुनिया न्याय नगरी नहीं, अंधेर नगरी है। चोरी पकड़ी गई तो अपराध हो गया। असली अपराधी बड़ी-बड़ी कोठियों में बैठकर दोनों हाथों से धन बटोर रहे हैं। उन्हें कोई नहीं पकड़ता।

IV. 'बात अठन्नी की' कहानी द्वारा लेखक ने क्या संदेश दिया है?
उत्तर - बात अठन्नी की कहानी द्वारा लेखक ने यह संदेश दिया है कि अमीर लोग रिश्वत का लेन-देन करके भी सम्मानित जीवन व्यतीत करते हैं, जबकि एक निर्धन व्यक्ति केवल एक अठन्नी की हेरा-फेरी करने के जुर्म में छह महीने की कारावास का दंड भोगता है। यदि हमारे समाज में रिश्वतखोरी ऊपर करारा व्यंग किया जाए तो हमारे समाज में रिश्वतखोर कम होने लगेंगे।

महायज्ञ का पुरस्कार


 महायज्ञ का पुरस्कार
  - सियारामशरण गुप्त
उत्तर कुंजी

1. 'अकस्मात दिन फिरे और सेठ को गरीबी का मुंह देखना पड़ा।' 'संगी साथियों ने भी मुंह फेर लिया।'

क- सेठ के चरित्र की क्या विशेषताएं थी ?

उत्तर – सेठ अत्यंत विनम्र, उदार और धर्मपरायण थे। कोई साधु-संत उनके द्वार से निराश न लौटता था। सेठ ने दान में न जाने कितना धन दीन-दुखियों में बांट दिया था।

ख- 'संगी-साथियों ने भी मुंह फेर लिया' पंक्ति द्वारा समाज की किस दुर्बलता की ओर संकेत किया गया है ?

उत्तर - इस पंक्ति द्वारा समाज की उस दुर्बलता की ओर संकेत किया गया है कि जब विपत्ति आती है तो पक्के दोस्त, रिश्तेदार एवं संगी साथी भी साथ नहीं देते।

ग- उन दिनों क्या प्रथा प्रचलित थी? सेठानी ने सेठ को क्या सलाह दी ?

उत्तर – उन दिनों यज्ञ से प्राप्त फलों को खरीदने व बेचने की प्रथा प्रचलित थी। सेठानी ने सेठ को यह सलाह दी कि उन्हें अपने एक यज्ञ को बेच देना चाहिए ताकि उनके घर का गुजारा चल सके।

घ- सेठानी की बात मानकर सेठ जी कहां गए? धन्ना सेठ की पत्नी के बारे में क्या अफवाह थी ?

उत्तर - सेठानी की बात मानकर सेठ जी कुंदनपुर नाम के एक नगर गए। धन्ना सेठ की पत्नी के बारे में यह अफवाह थी कि उन्हें एक दैवी शक्ति प्राप्त है, जिसके द्वारा वह तीनों लोकों की बात जान लेती थीं।

2. सेठ जी, यज्ञ खरीदने के लिए तो हम तैयार हैं, पर आपको अपना महायज्ञ बेचना पड़ेगा।'

क - वक्ता कौन है? उसका उपर्युक्त कथन सुनकर सेठ जी को क्यों लगा कि उनका मजाक उड़ाया जा रहा है?

उत्तर - वक्ता धन्ना सेठ की पत्नी है। उसकी बात सुनकर सेठ जी को यह इसलिए लगा कि उनका मजाक उड़ाया जा रहा है क्योंकि वह बहुत उदार, अच्छे और धर्मपरायण व्यक्ति थे। जिनको यह लग रहा था कि उन्होंने आज तो क्या कई वर्षों से कोई यज्ञ नहीं किया।

प्रश्न - 2 सेठानी के अनुसार सेठ जी ने कौन-सा महायज्ञ किया था?

उत्तर - सेठानी के अनुसार सेठ जी ने यह महायज्ञ किया था कि वह खुद बहुत भूखे थे लेकिन जो वह अपने खाने के लिए चार रोटी लाए थे, वह सब रोटी खुद न खाकर एक दुर्बल कुत्ते को खिला दी और पानी पीकर कुंदनपुर के लिए चल दिए।

ग - सेठानी की बात सुनकर यज्ञ बेचने आए सेठ जी की क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तर - सेठानी की बात सुनकर यज्ञ बेचने आए सेठ जी को आश्चर्य हुआ, क्योंकि उनके अनुसार उन्होंने कभी कोई महायज्ञ किया ही नहीं था। सेठ जी को लगा उनका मजाक उड़ाया जा रहा है।

घ - यज्ञ बेचने आए सेठ के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर - यज्ञ बेचने आए सेठ के चरित्र की विशेषताएँ थी कि वे बहुत उदार, धर्मपरायण और विनम्र थे। पहले वे बहुत धनी थे। उनके घर से कोई साधु संत खाली नहीं जाता था, सबको भरपेट भोजन मिलता था। वे गरीबों की हमेशा मदद करते रहते थे और इस कारण एक दिन वह बहुत गरीब हो गए।


3. सेठ ने आद्योपांत सारी कथा सुनाई। कथा सुनकर सेठानी की समस्त वेदना जाने कहां विलीन हो गई।

क- सेठ जी को खाली हाथ वापस आता देखकर सेठानी की क्या प्रतिक्रिया हुई और क्यों ?

उत्तर – सेठ जी को खाली हाथ वापस आते देखकर सेठानी डर गई क्योंकि उन्होंने सोचा था कि यज्ञ बेचने से बहुत बड़ी चीज मिलेगी और जब सेठ जी ने पूरी कहानी सुनाई तो वह बहुत खुश हुईं। उन्होंने यह सोचा कि मुश्किल के समय में भी उनके पति ने धर्म का साथ नहीं छोड़ा और अपने पति के चरणों की रज मस्तक पर लगाते हुए बोली, “धीरज रखें, भगवान सब भला करेंगे।”

ख - सेठ ने आद्योपांत जो कथा सुनाई, उसे अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर – जब सेठ कुंदनपुर की ओर जा रहे थे तो उन्हें रास्ते में एक भूखा कुत्ता मिला। उन्होंने उसे अपनी चारों रोटियां खिला दी। जब वह धन्ना सेठ के यहां पहुंचे तो धन्ना सेठ की पत्नी ने उनसे उनके इसी महायज्ञ को मांग लिया। इस पर सेठ को आश्चर्य हुआ और कहने लगे कि मैंने तो कई सालों से महायज्ञ किया ही नहीं। उन्हें लगा कि सेठानी उनका मजाक उड़ा रही है, इसलिए वह बिना यज्ञ बेचे वहां से चले गए।

ग - सेठ जी की बात सुनकर सेठानी की समस्त वेदना क्यों विलीन हो गई ?

उत्तर - सेठ जी की बात सुनकर सेठानी की समस्त वेदना इसलिए विलीन हो गई क्योंकि उन्होंने सोचा कि मुश्किल समय में भी सेठ जी ने अपना धर्म नहीं छोड़ा। उनके पति महान है और फिर सेठ के चरणों की रज मस्तक पर लगाते हुए बोली, “धीरज रखें, भगवान सब भला करेंगे।”

घ - 'महायज्ञ का पुरस्कार' कहानी के द्वारा लेखक ने क्या संदेश दिया है?

उत्तर -  महायज्ञ का पुरस्कार कहानी के द्वारा लेखक ने यह संदेश दिया है कि निस्वार्थ भावना से किया गया कर्म किसी महायज्ञ से कम नहीं होता तथा इस प्रकार के कर्म का फल अवश्य प्राप्त होता है। जीवो पर दया करना मनुष्य का परम कर्तव्य है। नर सेवा ही नारायण सेवा सेवा होती है। स्वयं कष्ट सहन करके दूसरों के कष्टों का निवारण करना मानव धर्म है और दिखाने के लिए किया गया कर्म महत्वहीन होता है।

Tuesday, 25 May 2021

मातृ मंदिर की ओर

मातृ मंदिर की ओर 
कवयित्री – सुभद्रा कुमारी चौहान 

निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए – 

1. व्यथित है मेरा हृदय-प्रदेश, 
चलूँ, उसको बहलाऊँ आज।
बताकर अपना सुख-दुख 
उसे हृदय का भार हटाऊँ आज।
चलूँ माँ के पद-पंकज पकड़ , 
नयन जल से नहलाऊँ आज।
मातृ – मंदिर में मैंने कहा .....
चलूँ दर्शन कर आऊँ आज।”

प्रश्न – 1 कविता के रचयित्री कौन है? यह पंक्तियाँ उनकी किस कविता से ली गई हैं? उसके ह्रदय के व्यथित होने का क्या कारण है?
उत्तर – कविता की रचयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान है। यह पंक्तियाँ उनकी ‘मातृ मंदिर की ओर’ नामक कविता से ली गई है। उनका हृदय व्यथित है क्योंकि भारत माता और भारतवासी सभी विदेशी शासकों के समक्ष पराधीन हैं। अर्थात् भारत की पराधीनता ही उनके ह्रदय के व्यथित होने का कारण है।

प्रश्न – 2 कवयित्री मैं अपने मन को बहलाने का कौन-सा उपाय ढूँढा?
उत्तर – कवयित्री ने अपने मन को बहलाने हेतु ‘मातृ मंदिर की ओर’ जाने का उपाय ढूंढा तथा वहाँ पहुँचकर वह भारत माता के कमलरूपी चरणों को पकड़कर अपना दुख-दर्द को बताना चाहती है।

प्रश्न – 3 ‘चलूँ माँ के पद-पंकज पकड़ नयन जल से नहलाऊँ आज’- पंक्ति का भावार्थ लिखिए।
उत्तर – उपर्युक्त पंक्ति का भावार्थ यह है कि भारत की पराधीनता के कारण कवियत्री दुखी है। भारतवासियों के अगण्य बलिदानों के बावजूद हमारा मातृ-मंदिर स्वतंत्र नहीं हो पाया। इसी दुख को स्पष्ट करते हुए कवयित्री अपने आंसुओं से भारत माता के चरण धोने की कल्पना करती है। 

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवयित्री क्या प्रेरणा दे रही है?
उत्तर – उपर्युक्त  पंक्तियों द्वारा कवयित्री यह प्रेरणा दे रही है कि हम भारतवासियों को विदेशी शासकों का डटकर सामना करते हुए मातृ मंदिर की ओर अग्रसर होना है तथा देश की स्वाधीनता के लिए हर असंभव कार्य को संभव बना देना है। 

2. किंतु यह हुआ अचानक ध्यान
दीन हूँ, छोटी हूँ, अज्ञान।
मातृ मंदिर का दुर्गम मार्ग 
तुम्हीं बतला दो हे भगवान।
मार्ग के बाधक पहरेदार 
सुना है ऊँचे-से सोपान।
फिसलते हैं ये दुर्बल पैर
चढ़ा दो मुझको हे भगवान।।

प्रश्न – 1 कवयित्री को अचानक क्या ध्यान आया? उसने भगवान से क्या प्रार्थना की? 
उत्तर – कवयित्री को अचानक ही ध्यान में आया कि क्या उन्हें माँ के दर्शन हो सकेंगे? वह दीन, छोटी और ज्ञान से रहित है और भारत माता के मंदिर तक पहुँचने का मार्ग अत्यंत दुर्लभ है, इसलिए उसने भगवान से प्रार्थना कि उसे विदेशियों से डटकर सामना करने की शक्ति प्रदान करें।

प्रश्न – 2 ‘मार्ग के बाधक पहरेदार’ से कवयित्री का क्या तात्पर्य है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘मार्ग के बाधक पहरेदार’ से कवयित्री का तात्पर्य अंग्रेज सैनिकों से है। अतः वह अपने दुख को स्पष्ट करते हुए कहती है कि मातृ-मंदिर तक पहुँचना आसान नहीं क्योंकि रास्ते में खड़े विदेशी प्रहरी दर्शनार्थियों को आगे नहीं बढ़ने देते।

प्रश्न – 3 कवयित्री ने मातृ मंदिर के मार्ग को दुर्गम क्यों कहा है? वह भगवान से क्या प्रार्थना करती है?
उत्तर – कवयित्री ने मातृ मंदिर के मार्ग को दुर्गम कहा है क्योंकि मंदिर तक जाने के लिए बहुत ऊँची सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं जिस कारण वह अपने लक्ष्य तक नही पहुँच पाती। अर्थात् शक्तिशाली विदेशी उसका रास्ता रोक खड़े हो जातें हैं। वह भगवान से प्रार्थना करती है कि उसे शक्ति प्रदान करें।

प्रश्न – 4 शब्दार्थ लिखिए – दीन, दुर्गम, बाधक, सोपान।
उत्तर – दीन – गरीब,  दुर्गम – अगम्य, बाधक – रूकावट, सोपान – सीढ़ियाँ 
  
3. अहा! वे जगमग-जगमग जगी 
ज्योतियाँ दीख रहीं हैं वहाँ।
शीघ्रता करो वाद्य बज उठे 
भला मैं कैसे जाऊँ वहाँ?
सुनाई पड़ता है कल-गान 
मिला दूँ मैं भी अपनी तान।
शीघ्रता करो मुझे ले चलो,
मातृ मंदिर में हे भगवान।।

प्रश्न – 1 ‘ज्योतियाँ दीख रही है वहाँ’ - पंक्ति द्वारा कवयित्री का संकेत किस ओर है? 
उत्तर – ‘ज्योतियाँ दीख रही है वहाँ’ से कवयित्री का संकेत जगमगाती हुई भारत माता की स्वतंत्रता की ओर है। अर्थात् कवयित्री को स्वाधीनता की जगमग करती हुई ज्योतियाँ दिखाई दे रही है।

प्रश्न – 2 ‘वाद्य बज उठे’ से कवयित्री का क्या अभिप्राय है? उनकी ध्वनि सुनकर उसकी क्या प्रतिक्रिया होती है?
उत्तर –  ‘वाद्य बज उठे’ से कवयित्री का अभिप्राय वहाँ बज रहे बाजे से है। उनकी वाणी सुनकर कवयित्री वहाँ जल्दी पहुँचना चाहती है ताकि भारत देश को स्वतंत्र करने में वे अपना कुछ योगदान दे सकें। 

प्रश्न – 3 ‘कल-गान’ से कवयित्री का क्या आशय है? इस संदर्भ में कवयित्री अपनी क्या अभिलाषा व्यक्त करती है?
उत्तर – ‘कल-गान’ से कवयित्री का आशय सुंदर गीत से है। अर्थात् उन्हें सुंदर गीत सुनाई पड़ रह है। इस संदर्भ में कवयित्री अपनी अभिलाषा व्यक्त करती है कि वह जल्द से जल्द वहाँ पहुँचे और गीत गायन में शामिल हो ताकि देश की स्वतंत्रता के लिए कुछ योगदान दें। 

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों का मूलभाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों का मूल भाव यह है कि भारत की स्वतंत्रता अब दूर नहीं। इसलिए वहाँ का जगमगाता दृश्य कवयित्री को दिखाई दे रहा है। अर्थात् स्वाधीनता अब दूर नहीं है और इसकी कल्पना करते हुए कवयित्री प्रभु से प्रार्थना करती है कि वे उसे शक्ति प्रदान करें और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उसकी सहायता करें। 

4. चलूँ मैं जल्दी से बढ़-चलूँ।
देख लूँ माँ की प्यारी मूर्ति।
अहा! वह मीठी-सी मुसकान 
जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति।।
उसे भी आती होगी याद?
उसे, हाँ आती होगी याद।
नहीं तो रुठूँगी मैं आज मुसकान
सुनाऊँगी उसको फरियाद।।

प्रश्न – 1 उपर्युक्त पंक्तियों के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि कवयित्री की क्या इच्छा है?
उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों के आधार पर कवयित्री की यह इच्छा है कि भारत शीघ्रता से विदेशी शासन से मुक्त हो और वह भारत माँ को मुस्कुराता हुआ देख सके। भारत माँ के मुख पर मुसकान देखकर उसे भी नई स्फूर्ति प्राप्त होगी, उसमें नया जोश एवं नई उमंग का संचार होगा।

प्रश्न – 2 ‘मीठी-सी मुसकान’ का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘मीठी-सी’ मुस्कान का संदर्भ यह है कि जब भारत माँ विदेशी शासकों और अत्याचारों से मुक्त हो जाएगी और भारत को स्वतंत्रता मिल जाएगी, तब भारतवासियों के चेहरे पर एक मीठी-सी मुस्कान आ जाएगी।

प्रश्न – 3 ‘जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति’ - पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर – ‘जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति’ का आशय यह है कि जब भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हो जाएगी तब भारत माँ के मुख पर मुस्कान देखकर कवयित्री को भी नई स्फूर्ति प्राप्त होगी, उसमें नया जोश और नई उमंग आ जाएगी।

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों का भावार्थ यह है कि कवयित्री भारत माँ के मंदिर में जल्दी से जल्दी पहुँचकर भारत माँ की प्यारी मूर्ति को देखना चाहती है। उस मूर्ति पर मीठी-सी मुस्कान देखकर कवयित्री के ह्रदय में भी नई स्फूर्ति का संचार होगा। कवयित्री को पूरा विश्वास है कि भारत माँ को भी अपने बच्चे की याद अवश्य आती ही होगी।

5. कलेजा माँ का, मैं संतान 
 करेगी दोषों पर अभिमान।
 मातृ-वेदी पर हुई पुकार,
 चढ़ा जो मुझको, हे भगवान।।
 सुनूँगी माता की आवाज़ 
 रहूँगी मरने को तैयार।
 कभी भी उस वेदी पर देव,
 न होने दूँगी अत्याचार।। 
 न होने दूँगी अत्याचार
 चलो, मैं हो जाऊँ बलिदान।
 मातृ-मंदिर में हुई पुकार,
 चढ़ा जो मुझको, हे भगवान।।

प्रश्न – 1 उपर्युक्त पंक्तियों में ‘माँ’ की किस विशेषता का उल्लेख किया गया है और क्यों?
उत्तर –  उपर्युक्त पंक्तियों में माँ की इस विशेषता का उल्लेख किया गया है कि मामा के हृदय में हमेशा अपनी संतान के प्रति स्नेह, वात्सल्य तथा ममता के भाव भरे होते हैं। वह अपनी संतान के दोषों को भी अनदेखा कर देती है क्योंकि माता की ममता कभी कम नहीं होती है।

प्रश्न – 2 ‘मातृ-वेदी पर हुई पुकार’ का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘मातृ-वेदी पर हुई पुकार’ का संदर्भ यह है कि कवयित्री भारत माँ को पराधीनता से मुक्त कराना चाहती है। उस पर किसी भी प्रकार का अत्याचार नहीं होने देना चाहती। यदि उन अत्याचारों को रोकने के लिए उसे अपने प्राणों का बलिदान भी देना पड़े तो वह पीछे नहीं हटेगी।

प्रश्न – 3 कौन किस पर तथा किस प्रकार अत्याचार कर रहा था? अत्याचार के विरोध में कवयित्री अपनी क्या इच्छा व्यक्त करती है?
उत्तर – विदेशी शासक भारतवासियों और भारत माता को गुलाम बनाकर अत्याचार कर रहा था। अत्याचार के विरोध में कवयित्री ने यह इच्छा व्यक्त की है कि वह भारत माता पर होने वाले किसी भी अत्याचार को रोकने के लिए अपने प्राणों को बलिदान करने के लिए तत्पर है। 

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवयित्री क्या प्रेरणा दे रही है?
उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवयित्री प्रेरणा दे रही है कि हमें अपनी मातृभूमि पर होने वाले अत्याचारों को देखकर चुप नहीं बैठना चाहिए और किसी भी प्रकार के अत्याचारों का हमेशा विरोध करना चाहिए। यदि इन अत्याचारों को रोकने के लिए हम अपने प्राणों का भी बलिदान करना पड़े तो हमें कर देना चाहिए।


Saturday, 15 May 2021

Do kalakar

पाठ – 10
दो कलाकार 
लेखक – मन्नू भंडारी 

 निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए-

1. अरे यह क्या? इसमें तो सड़क, आदमी, ट्राम, बस, मोटर, मकान सब एक दूसरे पर चढ़ रहे हैं। मानो सबकी खिचड़ी पकाकर रख दी हो। क्या घनचक्कर बनाया है?

प्रश्न – 1 ‘अरे, यह क्या? -  वाक्य का वक्ता और श्रोता कौन है? उपर्युक्त कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘अरे,यह क्या’ वाक्य की वक्ता अरुणा है और श्रोता चित्रा है। जब चित्रा अपना बनाया हुआ चित्र सोती हुई अरुणा को दिखाने गई तो चित्र देखकर अरुणा को कुछ भी समझ में नहीं आया। अरुणा को चित्रों में कोई रुचि नहीं थी। अरुणा के कथन का आशय यह है कि चित्रा ने इतनी सारी चीजें एक चित्र में बनाकर खिचड़ी-सी बना दी है, जिसे देख कर कोई भी चक्कर खा सकता है।

प्रश्न – 2 चित्र को चारों ओर घुमाते हुए वक्ता ने श्रोता को चित्रों के संबंध में क्या सुझाव दिया था?

उत्तर – चित्र को चारों ओर घुमाते हुए वक्ता अर्थात अरुणा ने चित्रा को यह सुझाव दिया कि जब भी वह कोई चित्र बनाए तब उस पर उसका नाम लिख दे क्योंकि जब भी वह उसका चित्र देखती है तो समझ नहीं पाती कि वह चित्र किस चीज़ का चित्र है।

प्रश्न – 3 ‘खिचड़ी पकाकर’ और ‘घनचक्कर’ शब्दों का आशय स्पष्ट करते हुए बताइए कि इनका प्रयोग किस संदर्भ में किया गया है और क्यों?

 उत्तर – ‘खिचड़ी पकाकर’ का अर्थ होता है बहुत सारी चीजों का एक साथ मिला देना और ‘घनचक्कर’ का अर्थ होता है जो चक्कर में डाल दे। इन दोनों शब्दों का प्रयोग चित्रा के चित्रों के लिए किया गया है क्योंकि चित्रा ने अपने चित्र में बहुत सारी चीजों को बनाकर खिचड़ी-सी बना दी थी जो चक्कर में डालने वाली थी।

प्रश्न – 4 श्रोता ने अपने चित्र को किसका प्रतीक बताया? वक्ता ने उसकी खिल्ली किस प्रकार उड़ाई?

 उत्तर – श्रोता अर्थात् चित्रा ने अपने चित्र के बारे में बताया कि यह चित्र आज की दुनिया में कंफ्यूजन का प्रतीक है। इस पर अरुणा ने उसकी खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि मुझे तो तेरे दिमाग के कन्फ्यूजन का प्रतीक नजर आ रहा है, बिना मतलब जिंदगी खराब कर रही है।

2. पर सच कहती हूँ मुझे तो सारी कला इतनी निरर्थक लगती है, इतनी बेमतलब लगती है कि बता नहीं सकती।

प्रश्न – 1 वक्ता को किस की कला निरर्थक लगती थी और क्यों? 

उत्तर – अरुणा को चित्रा की कला निरर्थक और बेमतलब लगती है क्योंकि चित्रा अपने चित्र को बनाने के लिए किसी चीज का ख्याल नहीं रखती थी, उसे दूसरों से कोई मतलब नहीं था। बड़ी से बड़ी घटना उसके लिए कोई महत्त्व नहीं रखती थी। हर घड़ी, हर जगह, हर चीज में वह अपने चित्रों के लिए मॉडल खोजा करती थी। अरुणा के अनुसार चित्रा यदि चित्रों को बनाने के बजाय किसी असहाय व्यक्ति की सहायता करें तो अच्छा रहता। अतः अरुणा मानती थी कि वही मनुष्य जीवन सार्थक होता है जिससे दूसरों को सहारा मिले।  

प्रश्न – 2 वक्ता ने उसकी कला पर व्यंग करते हुए क्या कहा और उसे क्या सलाह दी?

उत्तर – वक्ता यानी अरुणा ने चित्रा की कला पर व्यंग करते हुए यह सलाह दी कि वह यह निरर्थक और बेमतलब कला छोड़ दें जो आदमी को आदमी न रहने दे। अरुणा ने चित्रा को निर्जीव चित्रों को बनाने के बजाय असहाय लोगों की जिंदगी बनाने की बात कही पर ऐसा उसने इसलिए कहा क्योंकि वह बहुत ही अमीर पिता की इकलौती बेटी थी। वह चाहती तो किसी की भी मदद कर सकती थी, लेकिन उसे दूसरों की मदद करने में कोई रुचि नहीं थी। 
 
प्रश्न – 3 वक्ता की बात पर श्रोता ने क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की और क्यों?

उत्तर – वक्ता की बातों पर श्रोता चित्रा ने कहा कि यह काम तो तेरे लिए छोड़ दिया। मैं चली जाऊँगी तो जल्दी से सारी दुनिया का कल्याण करने के लिए झंडा लेकर निकल पड़ना। चित्रा ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि अरुणा में समाज सेवा का भाव था।

प्रश्न – 4 आपके अनुसार सच्ची कला की क्या पहचान है?

उत्तर – मेरे विचार से सच्ची कला वह है जिस कला से पूरे समाज को या पूरे देश को लाभ पहुँचे। वह कला बिल्कुल निरर्थक होती है जो केवल अपने स्वार्थ के लिए प्रस्तुत की जाती हो। चित्रा की कला निरर्थक थी और अरुणा की कला सच्ची कला थी क्योंकि उसने हमेशा समाज के दुर्बल और असहाय लोगों की मदद की।

3. यह काम तो मेरे लिए छोड़ दिया। मैं चली जाऊँगी तो जल्दी से सारी दुनिया का कल्याण करने के लिए झंडा लेकर निकल पड़ना।

प्रश्न – 1 वक्ता और श्रोता का परिचय दीजिए।

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति की वक्ता चित्रा है जो एक चित्रकार है और बचपन से यह सपना देखती है कि वह विदेशों में जाकर खूब नाम कमाए। उसे भिखारिन वाले चित्र द्वारा खूब प्रसिद्धि मिलती है। प्रस्तुत कथन की श्रोता अरुणा है जो स्वभाव से एक समाज सेविका है वह हमेशा दुर्बल और असहाय लोगों की मदद के लिए तैयार रहती है। उसी ने भिखारिन के दो बच्चों को सहारा दिया और उनकी जिंदगी संवारी।

प्रश्न – 2 ‘वह काम’ से वक्ता का संकेत किस ओर है? वक्ता और श्रोता में अपने-अपने कामों को लेकर किस प्रकार की नोंक-झोंक चलती रहती थी?

 उत्तर – ‘वह काम’ से वक्ता यानी चित्रा का संकेत समाज सेवा की ओर है जो अरुणा किया करती थी लेकिन चित्रा को समाज सेवा करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। अरुणा और चित्रा दोनों को एक-दूसरे के काम निरर्थक लगते थे। अरुणा चित्रा को हमेशा कहती थी कि तुम इन बेकार की चित्रों को बनाकर अपना समय बर्बाद कर रही हो, उसी तरह चित्रा भी हमेशा अरुणा के समाज सेवा को बेकार समझती थी। जिस कारण दोनों मित्रों में छोटी मोटी नोक-झोंक चलती रहती थी।

प्रश्न – 3 वक्ता कहाँ जा रही थी और क्यों?

उत्तर – वक्ता यानी चित्रा विदेश जा रही थी। वह अपने पिता की इकलौती बेटी थी। वह विदेश जाकर अपनी चित्र की कला को बढ़ाना, प्रसिद्धि पाना और अपने पिता का नाम रोशन करना चाहती थी। 

प्रश्न – 4 ‘वक्ता और श्रोता’ के जीवन-उद्देश्य में अंतर होते हुए भी उनमें घनिष्ट मित्रता थी’ – स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – अरुणा के जीवन का लक्ष्य समाज सेवा था और उसकी सहेली चित्रा के जीवन का उद्देश्य एक महान चित्रकार बनना था। दोनों के जीवन उद्देश्य में अंतर होते हुए भी उन्हें घनिष्ट मित्रता थी क्योंकि उनमें असीम प्रेम था। दोनों को एक दूसरे की परवाह थी। वह दोनों मन में उत्पन्न होने वाले मन-मुटाव, शंका और ईर्ष्या की भावना को दूर रखती थी। वे हॉस्टल में साथ रहती थी और एक दूसरे की मदद करती रहती थीं।

4. “कहा तो मेरे।” अरुणा से हँसते हुए कहा।
“अरे बता न, मुझे ही बेवकूफ बनाने चली है।”

प्रश्न – 1 ‘कहा तो मेरे’ वाक्य का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – कहा तो मेरे वाक्य का संदर्भ यह है कि विदेश से तीन साल बाद लौटने के उपरांत चित्रा का भारत में जोरदार स्वागत हुआ और दिल्ली में उसकी कला की प्रदर्शनी का आयोजन हुआ तो उद्घाटन करने के लिए चित्रा को ही बुलाया गया। अरुणा सिर्फ उससे मिलने के लिए उस प्रदर्शनी में आई थी। जब चित्रा और अरुणा मिले तो अरुणा के साथ दो बच्चे भी थे। चित्रा के पूछने पर अरुणा ने उन दोनों बच्चों को खुद के बच्चे बताती है। जिसे सुनकर चित्रा को विश्वास नहीं होता और वह अपने ही विचारों में खो जाती है

प्रश्न – 2 ‘मुझे ही बेवकूफ बनाने चली है’ –  वाक्य का संदर्भ स्पष्ट करते हुए बताइए कि वक्ता को श्रोता की किस बात पर विश्वास नहीं हुआ और क्यों?

उत्तर – चित्रा की कला प्रदर्शनी में जब अरुणा और चित्रा की भेंट हुई तो अरुणा के साथ दो बच्चे भी थे। लड़के की उम्र दस साल की थी और लड़की की उम्र आठ साल थी। जब चित्रा ने अरुणा से पूछा कि यह बच्चे किसके हैं तब अरुणा ने कहा कि मेरे बच्चे हैं। चित्रा को विश्वास नहीं हुआ कि वह बच्चे अरुणा के थे क्योंकि जब चित्रा तीन साल पहले विदेश गई थी तब अरुणा की शादी भी नहीं हुई थी तो उसके इतने बड़े बच्चे कैसे हो सकते थे।

प्रश्न – 3  अरुणा की कौन-सी बात सुनकर चित्रा की आँखें फैली की फैली रह गईं?

उत्तर – चित्रा के बार-बार पूछने पर जब अरुणा ने भिखारिनवाले चित्र के दोनों बच्चों पर ऊँगली रखकर बताया कि ये ही वो दोनों बच्चे हैं जिनको मैंने अपना लिया है तो चित्रा की आँखें फैली की फैली रह गईं।

प्रश्न – 4 चित्रा को किस चित्र से प्रसिद्धि मिली थी? चित्र का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

उत्तर – चित्रा को उस मृत भिखारिन एवं बच्चों पर आधारित ‘अनाथ’ शीर्षकवाले चित्र द्वारा देश व विदेश में बहुत प्रसिद्धि मिली थी। चित्रा ने अपने चित्र में एक मृत भिखारिन और उसके सूखे शरीर से चिपक कर बुरी तरह से रो रहे दो बच्चों को चित्रित किया था।

Saturday, 8 May 2021

Bade Gher ki Beti

पाठ – 06
बड़े घर की बेटी 
प्रेमचंद 

दी गई पंक्तियों को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए-


1. ‘श्रीकंठ सिंह की दशा बिल्कुल विपरीत थी।’

प्रश्न – 1 श्रीकंठ सिंह की शारीरिक बनावट किस के विपरीत की और कैसे?

उत्तर – श्रीकंठ सिंह की शारीरिक बनावट अपने छोटे भाई लाल बिहारी सिंह से विपरीत थी क्योंकि श्रीकंठ सिंह बिल्कुल दुर्बल शरीर का था जबकि लाल बिहारी दोहरे बदन का सजीला जवान था। उसका भरा हुआ मुखड़ा और चौड़ी छाती थी। श्रीकंठ जी बी. ए. पास किए हुए थे जबकि लाल बिहारी पहलवानी करता था।

प्रश्न – 2 सम्मिलित कुटुंब के संबंध में श्रीकंठ सिंह के क्या विचार थे?

उत्तर – श्रीकंठ सिंह सम्मिलित कुटुंब का एकमात्र उपासक था। वह पाश्चात्य सामाजिक प्रथाओं को नहीं मानता था। आज स्त्रियों को कुटुंब में मिल-जुलकर रहने को जो अरुचि होती है, उसे वह जाति और देश दोनों के लिए हानिकारक समझता था। उसने अपने कई मित्रों के घरों को टूटने से बचाया था।

प्रश्न – 3 सम्मिलित कुटुंब के संबंध में श्रीकंठ सिंह और उसकी पत्नी के विचारों का अंतर स्पष्ट कीजिए?

उत्तर – सम्मिलित कुटुंब के संबंध में श्रीकंठ सिंह का मानना था कि स्त्रियों में जो सम्मिलित कुटुंब में रहने की अरुचि है, वह जाति और देश दोनों के लिए हानिकारक है जबकि उनकी पत्नी का मानना था कि यदि बहुत कुछ सहने पर भी परिवार के साथ निर्वाह न हो सके तो आए दिन के कलह से जीवन को नष्ट करने की अपेक्षा अच्छा है कि अपनी खिचड़ी अलग पकाई जाए।

प्रश्न – 4 श्रीकंठ सिंह की पत्नी का संबंध किस कुल से था, स्पष्ट कीजिए।

 उत्तर – श्रीकंठ सिंह की पत्नी आनंदी बड़े उच्च कुल से थी। उनके पिता भूप सिंह एक छोटी-सी रियासत के ताल्लुकेदार थे। उनका एक विशाल भवन, एक हाथी, तीन कुत्ते, झाड़फानूस, आनरेरी मजिस्ट्री और ऋण, जो एक प्रतिष्ठित ताल्लुकेदार के योग्य पदार्थ हैं, सभी वहाँ विद्यमान थे।


2. ´वह एक सीधा साधा देहाती गृहस्थ का मकान था, किंतु आनंदी ने थोड़े ही दिनों में अपने आप को इस नई परिस्थिति के ऐसा अनुकूल बना लिया, मानो विलास के सामान कभी देखी ही न थे।`

प्रश्न – 1 ‘सीधा-सादा गृहस्थ’ – से किसकी ओर संकेत किया गया है? उसका परिचय दीजिए।

उत्तर – ‘सीधा-सादा गृहस्थ’ के माध्यम से एक मध्यवर्गीय पुरुष के घर की ओर संकेत किया गया है, जो श्रीकंठ सिंह का था। उन्होंने बी. ए. किया हुआ था। वह अपने पिता बेनी माधव सिंह और छोटे भाई लाल बिहारी के साथ रहता था। वह पाश्चात्य प्रथाओं को नहीं मानता था और सम्मिलित कुटुंब का पक्षधर था। उसका विवाह एक बड़े कुल की लड़की आनंदी से हुआ था।

प्रश्न – 2 आनंदी के पिता उसके विवाह को लेकर किस प्रकार के धर्म संकट में थे?

उत्तर – आनंदी अपने घर में चौथी लड़की थी। वह बहुत ही रूपवती थी। उसके माता-पिता उससे बहुत प्रेम करते थे। वह उसके विवाह को लेकर इसलिए चिंतित थे क्योंकि वह चाहते थे कि न तो ऋण का बोझ बड़े और न ही उसकी बेटी अपने आप को भाग्यहीन समझे। वह उसका भला चाहते थे।

प्रश्न – 3 आनंदी के मैके और ससुराल के वातावरण में क्या अंतर था?

उत्तर – आनंदी का जन्म एक उच्च कुल में हुआ था। वहाँ उसे किसी चीज की कमी नहीं थी। उसके मैके में अगर कोई आता तो खाली हाथ नहीं जाता था लेकिन उसके ससुराल का माहौल बिल्कुल अलग था, वहाँ न तो घूमने के लिए बगीचा था, न ही जमीन पर फर्श था और न दीवार पर तस्वीरें थी।

प्रश्न – 4 आनंदी और लाल बिहारी की तकरार किस बात पर शुरू हुई?

उत्तर – एक दिन लाल बिहारी दो चिड़ियाँ लिए हुए आया और आनंदी से बोला कि उसे भूख लगी है जल्दी से इसे पका दो। अब घर में बचे हुए थोड़े बहुत घी को उसने मांस पकाने में लगा दिया किंतु दाल में घी डालने के लिए नहीं बचा इसलिए ऐसे ही खाना परोस दिया। जब लाल बिहारी खाना खाने आए तो दाल में घी नहीं मिला जिस कारण  लाल बिहारी ने आनंदी के मैके को बुरा भला कह दिया तो आनंद ही ने कहा कि उनके यहाँ इतना घी तो नौकर खा जाते हैं। इस बात पर दोनों की तकरार बढ़ गई।


3.‘भाभी, भैया ने निश्चय किया है कि वे मेरे साथ इस घर में न रहेंगे। आप भी मेरा मुँह भी नहीं देखना चाहते, इसलिए मैं जाता हूँ। उन्हें फिर मुँह न दिखाऊँगा। मुझसे जो अपराध हुआ, उसे क्षमा करना।’

प्रश्न – 1 भाभी और भैया का परिचय दीजिए। भैया ने क्या निश्चय किया था और क्यों?

 उत्तर – भाभी आनंदी है और भैया श्रीकंठ है। आनंदी एक अच्छे परिवार की लड़की है जिसका विवाह श्रीकंठ से हुआ है। आनंदी बहुत गुणवती है और श्रीकंठ बहुत दुर्बल शरीर के बी. ए. पास व्यक्ति है। आनंदी व लाल बिहारी सिंह की तकरार के बाद श्रीकंठ ने यह निश्चय किया कि या तो वह इस घर में रहेगा या लाल बिहारी क्योंकि तकरार के दौरान उसने अपनी भाभी को अपशब्द कहे थे।

प्रश्न – 2 आनंदी के स्वभाव की चर्चा कीजिए। वह अपने पति पर किस बात के लिए झुँझला रही थी?

 उत्तर – आनंदी बहुत ही समझदार स्त्री कि वे स्वभाव से दयालु थी अपने उच्च कुल को लेकर उसमें थोड़ा भी घमंड नहीं था। वह अपने पति पर इसलिए चिल्ला रही थी क्योंकि उसका पति ने अपने भाई की बातों में उससे यह पूछा की उसने क्या उपद्रव मचा रखा है।

प्रश्न – 3 आनंदी की अपने पति से क्या बातचीत हुई?

उत्तर – जब लाल बिहारी अपने भाई श्रीकंठ सिंह की बातें सुन लेता है तो वह आनंदी से कहता है कि भाभी मैं जा रहा हूँ तब आनंदी अपने पति को समझाती है कि वह लाल बिहारी को माफ कर दें। उसे पछतावा हो गया है। पहले तो श्रीकंठ नहीं माने लेकिन लाल बिहारी उनका छोटा भाई था इसलिए उनको उस पर तरस आ गया और उनका भी दिल पिघल गया और लाल बिहारी को माफ करके गले लगा लिया।

प्रश्न – 4 घटनाक्रम ने अंत में किस प्रकार मोड़ लिया?

उत्तर – जब लाल बिहारी ने आनंदी के ऊपर चप्पल फेंक कर मारी थी तो घी के ऊपर छोटे से झगड़े ने बड़ा मोड़ ले लिया। श्रीकंठ सिंह आनंदी से पूरा घटनाक्रम सुनने के बाद घर छोड़ने का निश्चय कर चुके थे। यह देखकर लाल बिहारी को बहुत पछतावा हुआ तो उसने श्रीकंठ सिंह और आनंदी से माफी मांगी। पहले तो श्रीकंठ ने लाल बिहारी को माफ नहीं किया किंतु आनंदी के समझाने पर उसे माफ कर दिया और गले लगा लिया।

Clas 8 Ch 8, मन भावन सावन कविता

पाठ - 6  मन भवान सावन  पुस्तक से कविता के शब्द अर्थ करें। • नीचे दिए गई पंक्तियों को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:- झम-झम_ _ _ _...