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Thursday, 30 July 2026

चलना हमारा काम है


चलना हमारा काम है 
कवि – शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

 निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए – 

1. गति प्रबल पैरों में भरी,
  फिर क्यों रहूँ दर-दर खड़ा,
  जब आज मेरे सामने 
  है रास्ता इतना पड़ा।
  जब तक न मंजिल पा सकूँ, तब तक मुझे न विराम है।
  चलना हमारा काम है।

प्रश्न – 1 ‘गति प्रबल पैरों में भरी’ – पंक्ति द्वारा कवि मनुष्य को क्या संदेश दे रहा है?
उत्तर – इस पंक्ति द्वारा कवि मनुष्य को यह संदेश दे रहे हैं कि मनुष्य को जीवन पथ पर अपने लक्ष्य प्राप्त करने के लिए निरंतर सक्रिय और गतिशील रहना चाहिए।

प्रश्न – 2 मनुष्य कवि को दर-दर पर खड़ा न होने की प्रेरणा क्यों दे रहा है?
उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से कवि मनुष्य को यह प्रेरणा देना चाहते हैं कि जब मनुष्य में इतनी शक्ति और सामर्थ्य है कि वह जीवन की चुनौतियों का सामना कर सकता है तो उसे फिर दर-दर भटकने या खड़े होने की क्या आवश्यकता है। जब उसके पैरों में अद्भुत गति एवं शक्ति विद्यमान हैं तो उसे जगह-जगह रुकना नहीं चाहिए। उसे लगातार चलते रहना चाहिए अर्थात् जब तक उसके मंजिल उसे नए मिल जाए, तब तक सतत प्रयास करते रहना चाहिए और दर-दर खड़ा होने के बजाय चुनौतियों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य प्राप्ति की ओर बढ़ते रहना चाहिए।

प्रश्न – 3 ‘जब तक न मंजिल पा सकूँ, तब तक मुझे न विराम है’ पंक्ति द्वारा कवि क्या स्पष्ट करना चाहता है?
उत्तर – इस पंक्ति के द्वारा कवि यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि जब तक मनुष्य अपने गंतव्य तक नहीं पहुँच जाता तब तक वह विश्राम नहीं करेगा और चलता रहेगा और अपनी मंजिल पाने के लिए निरंतर प्रयास करता रहेगा।

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों में कवि मनुष्य को प्रेरणा दे रहा है कि उसे जीवन में निरंतर सक्रिय और गतिशील रहना चाहिए। मनुष्य को दर-दर खड़ा होने के बजाय निरंतर चुनौतियों का सामना करना चाहिए। कवि अभी अपनी मंजिल पर नहीं पहुँच पाया है। अभी उसके सामने लंबा रास्ता पड़ा है, जब तक वह अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर लेता तब तक वह विश्राम नहीं कर सकता।

2. कुछ कह लिया, कुछ सुन लिया 
 कुछ बोल अपना बँट गया,
 अच्छा हुआ तुम मिल गईं 
 कुछ रास्ता ही कट गया।
 क्या राम में परिचय कहूँ, राही हमारा नाम है।
 चलना हमारा काम है। 

प्रश्न – 1 ‘कुछ बोझ अपना बँट गया’ - कवि ने यह कहने का क्या भाव है?
उत्तर – उपर्युक्त पंक्ति के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहते हुए वह बहुत लोगों से मिलता है। अपने जीवन पथ पर चलते हुए वह जिन लोगों से मिलता है उनसे अपना सुख दुख कहता है और कुछ दूसरों की सुनता है। ऐसा करने से उसके मन का बोझ हल्का हो जाता है और प्रेम व स्नेह की वृद्धि भी होती है। अर्थात् जब एक दूसरे से मन की बातें कह दी जाती हैं तब मन में शांति की अनुभूति होती है और मनुष्य आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होता है।

प्रश्न – 2 ‘अच्छा हुआ तुम मिल गई’- कवि को कौन, कहाँ मिल गई? उसके मिलने से उसे क्या लाभ हुआ? 
उत्तर – इस पंक्ति में कवि को उसकी प्रेमिका जीवन के मार्ग पर चलते हुए मिल गई। उसके मिलने से उसे यह लाभ हुआ कि उसके जीवन का कुछ समय आसानी से बीत गया और रास्ता आसानी से कट गया।

प्रश्न – 3 कवि अपना परिचय किस रूप में देता है और क्यों?
उत्तर –  कवि ने जीवन पथ पर चलते हुए अपना परिचय एक पथिक के रूप में दिया है। उनका कहना है कि राह पर चलते हुए वह एकमात्र पथिक है, जिसका काम चलते हुए अपने लक्ष्य की प्राप्ति करना है। जिस प्रकार रास्ते में चलने वाला हर व्यक्ति केवल राही (पथिक) होता है और अपने गंतव्य की ओर बढ़ता जाता है। उसी प्रकार वह भी जीवन में निरंतर उन्नति के पथ पर चलते हुए अपनी मंजिल को प्राप्त करना चाहते हैं। 

3. जीवन अपूर्ण लिए हुए 
 पाता कभी, खोता कभी 
 आशा-निराशा से घिरा 
  हँसता कभी, रोता कभी।
  गति-मति न हो अवरुद्ध, इसका ध्यान आठों याम है।
  चलना हमारा काम है।

प्रश्न – 1 कवि ने जीवन को अपूर्ण क्यों कहा है?
उत्तर – कवि का कहना है कि मनुष्य का जीवन अपूर्ण होता है क्योंकि उसके जीवन में सफलता के साथ असफलता, सुख के साथ दुख और सहजता के साथ बाधाएं आती रहती है। यही जीवन है। अर्थात् मनुष्य का जीवन अपूर्ण होता है। जीवन के दो पहलू होते हैं जिसमें आशा-निराशा, सुख-दुख दोनों ही होते हैं और इनका क्रम बना रहता है। समय परिवर्तनशील होता है। अतः मनुष्य के जीवन में भी सदैव एक जैसी स्थिति नहीं रहती है, जिससे उसके जीवन में अपूर्णता बनी रहती है।

प्रश्न – 2 उपर्युक्त पंक्तियों में जीवन की किन-किन विशेषताओं की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों में जीवन में आने वाली सफलता-असफलता, सुख-दुख एवं आशा-निराशा की ओर संकेत किया गया है। यही जीवन की विशेषताएँ हैं।

प्रश्न – 3 ‘गति-मति न हो अवरुद्ध’ - पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – इस पंक्ति का यह आशय है कि हमारे जीवन में आने वाली कठिनाइयों के कारण हमारी गति कभी नहीं रुक सकती क्योंकि गति ही जीवन है। अतः हमें अपने लक्ष्य की ओर निरंतर गतिशील बने रहना चाहिए।

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवि मनुष्य को क्या प्रेरणा दे रहा है?
उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों के माध्यम से कवि ने मनुष्य को यह प्रेरणा दी है कि सुख-दुख, सफलता-असफलता आदि के कारण मनुष्य की गति रुकनी नहीं चाहिए तथा उसे निरंतर जीवन पथ पर गतिशील बने रहना चाहिए क्योंकि जीवन में कोई स्थिति सदा के लिए नहीं रहती।

4. इस विशद विश्व-प्रवाह में 
 किसको नहीं बहाना पड़ा 
 सुख – दुख हमारी ही तरह 
 किसको नहीं सहना पड़ा।
 फिर व्यर्थ क्यों कहता फिरूँ, मुझ पर विधाता वाम है।
 चलना हमारा काम है।

प्रश्न – 1उपर्युक्त पंक्तियों में कवि ने मानव-जीवन की किस सच्चाई को उजागर किया है?
उत्तर – उपर्युक्त पंक्ति के माध्यम से कवि ने मानव जीवन की इस सच्चाई को उजागर किया है कि मानव जीवन में सभी को सुख-दुख, आशा-निराशा तथा असफलता-सफलता से प्रभावित होना अनिवार्य है।

प्रश्न – 2 ‘फिर व्यर्थ क्यों कहता फिरूँ, मुझ पर विधाता वाम है’- पंक्ति द्वारा कवि क्या संकेत कर रहा है तथा क्यों?
उत्तर – इस पंक्ति द्वारा कवि यह संकेत कर रहा है कि संसार में ऐसे लोग हैं जो भाग्यवादी है तथा दुख या असफलता का सामना होने पर यह तक कहा करते है कि मेरा भाग्य खराब है।

प्रश्न – 3 उपर्युक्त पंक्तियों में भाग्य पर रोने को मनुष्य के किस दुर्बलता के निशानी बताया गया है?
उत्तर – इस पंक्ति में भाग्य पर रोने को मनुष्य में धैर्य और साहस न होने की दुर्बलता की निशानी को बताया गया है।

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवि क्या संदेश दे रहा है?
उत्तर – उपर्युक्त पंक्ति में कवि है यह संदेश दे रहा है कि जीवन पथ की बाधाओं पर विजय प्राप्त करते हुए धैर्य और साहस से आगे बढ़ते रहना चाहिए।

5. मै पूर्णता की खोज में 
दर-दर भटकता ही रहा 
प्रत्येक पग पर कुछ-न-कुछ 
रोड़ा अटकता ही रहा 
पर हो निराशा क्यों मुझे? जीवन इसी का नाम है।
चलना हमारा काम है।

प्रश्न – 1 ‘ मैं पूर्णता की खोज में, दर-दर भटकता ही रहा’- पंक्ति द्वारा कवि का क्या आशय है?
उत्तर – ‘मैं पूर्णता की खोज में, दर-दर भटकता ही रहा’ पंक्ति में कवि कहता है कि मनुष्य का जीवन अपूर्ण होता है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति में गुण और अवगुण दोनों का समावेश होना निश्चित है, वैसे ही सुख-दुख, सफलता-असफलता भी जीवन के दो पहलू हैं। कवि कहता है कि मनुष्य संपूर्ण मानव बनना चाहता है और यही कारण है कि वह दरवाजे-दरवाजे पर भटकता रहता ह। वास्तव में मानव का जीवन सुख-दुख, आशा-निराशा, सफलता-असफलता आदि से भरा है। अतः मनुष्य को इसे सहजता से स्वीकार कर जीवन पथ पर निरंतर कर्म करते रहने चाहिए।

प्रश्न – 2 ‘प्रत्येक पग पर कुछ-न-कुछ रोड़ा अटकता ही रहा’- पंक्ति द्वारा मानव-जीवन की किस सच्चाई को उजागर किया गया है?
उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से कवि मानव जीवन कि इस सच्चाई को उजागर करते हैं कि मानव जीवन में दुख, निराशा और असफलता आते जाते रहते हैं।

प्रश्न – 3 ‘जीवन इसी का नाम है’- पंक्ति द्वारा कवि ने मानव जीवन के संबंध में क्या कहा है?
उत्तर – इस पंक्ति द्वारा कवि ने मानव जीवन के संबंध में यह कहा है कि जीवन पथ पर आगे बढ़ते हुए हमें अनेक प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ता है क्योंकि वह स्वाभाविक है।

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों के द्वारा स्पष्ट कीजिए कि जीवन में आने वाली बाधाओं का सामना हमें किस प्रकार करना चाहिए?
उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा जीवन में आने वाली बाधाओं का सामना हमें निरंतर गतिशील, विनयशील एवं कर्तव्यनिष्ठ होकर करना चाहिए क्योंकि यही मानव का कर्तव्य है।

6. कुछ साथ में चलते रहे 
 कुछ बीच ही से फिर गए।
 पर गति न जीवन की रुकी 
 जो गिर गए सो गिर गए 
 चलता रहे हरदम, उसी की सफलता अभिराम है।
 चलना हमारा काम है।

प्रश्न – 1 ‘कुछ साथ में चलते रहे, कुछ बीच से ही फिर गए’- पंक्ति द्वारा कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर – इस पंक्ति में कवि यह कहना चाहता हैं कि मनुष्य को जीवन पथ पर बढ़ते हुए अनेक साथी मिलते है, जिसमें से कुछ बीच में उसका साथ छोड़ देते हैं, तो कुछ निराश होकर लौट जाते हैं। परंतु ऐसा होने पर भी उसके जीवन की गति नही रुकती । वह निरंतर रूप से जीवन पथ पर अग्रसर होता रहता है ।

प्रश्न – 2 ‘चलना हमारा काम है’- कविता में भाग्यवाद पर किस प्रकार चोट की गई है?
उत्तर – इस कविता में भाग्यवाद पर इस प्रकार चोट की गई है कि दुख या असफलता का सामना होने पर लोग कहते हैं कि उनका भाग्य खराब है।कवि के अनुसार ऐसे लोग नहीं जानते कि सुख और दुख दोनों जीवन के अनिवार्य अंग है। इसलिए कवि के अनुसार दुख से विचलित होकर भाग्य को दोष देना उचित नहीं होता है 

प्रश्न – 3 कवि के अनुसार जीवन में सफलता कैसे मिलती है?
उत्तर – कवि के अनुसार जीवन में सफलता उसी व्यक्ति को मिलती है जो संकट और दुखों तथा निराशा का सामना करके दृढ़ता से खड़ा रहे और अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ता रहे।

प्रश्न – 4 कवि ने कविता में ‘चलना हमारा काम है’- पंक्ति को बार-बार क्यों दोहराया गया है? कवि इससे क्या प्रेरणा दे रहा है?
उत्तर – कवि कविता में ‘चलना हमारा काम है’ पंक्ति को बार-बार दोहराकर संदेश देना चाहते हैं कि मनुष्य को हमेशा प्रयत्नशील, गतिशील रहना चाहिए तभी हमारा जन्म सार्थक होगा क्योंकि कर्मशील व्यक्ति मरकर भी अमर होते है। अर्थात् आशा-निराशा, सुख-दुख, असफलता और किसी भी विषम परिस्थिति में हमें अपने लक्ष्य को नहीं भूलना चाहिए और निरंतर अपने लक्ष्य प्राप्ति के पथ पर चलते रहना चाहिए।


चलना हमारा काम है

चलना हमारा काम है  कवि – शिवमंगल सिंह ‘सुमन’  निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए –  1. गति प्रबल पैरों में भरी,   फिर क्यों रहूँ ...