Tuesday, 25 May 2021

मातृ मंदिर की ओर

मातृ मंदिर की ओर 
कवयित्री – सुभद्रा कुमारी चौहान 

निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए – 

1. व्यथित है मेरा हृदय-प्रदेश, 
चलूँ, उसको बहलाऊँ आज।
बताकर अपना सुख-दुख 
उसे हृदय का भार हटाऊँ आज।
चलूँ माँ के पद-पंकज पकड़ , 
नयन जल से नहलाऊँ आज।
मातृ – मंदिर में मैंने कहा .....
चलूँ दर्शन कर आऊँ आज।”

प्रश्न – 1 कविता के रचयित्री कौन है? यह पंक्तियाँ उनकी किस कविता से ली गई हैं? उसके ह्रदय के व्यथित होने का क्या कारण है?
उत्तर – कविता की रचयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान है। यह पंक्तियाँ उनकी ‘मातृ मंदिर की ओर’ नामक कविता से ली गई है। उनका हृदय व्यथित है क्योंकि भारत माता और भारतवासी सभी विदेशी शासकों के समक्ष पराधीन हैं। अर्थात् भारत की पराधीनता ही उनके ह्रदय के व्यथित होने का कारण है।

प्रश्न – 2 कवयित्री मैं अपने मन को बहलाने का कौन-सा उपाय ढूँढा?
उत्तर – कवयित्री ने अपने मन को बहलाने हेतु ‘मातृ मंदिर की ओर’ जाने का उपाय ढूंढा तथा वहाँ पहुँचकर वह भारत माता के कमलरूपी चरणों को पकड़कर अपना दुख-दर्द को बताना चाहती है।

प्रश्न – 3 ‘चलूँ माँ के पद-पंकज पकड़ नयन जल से नहलाऊँ आज’- पंक्ति का भावार्थ लिखिए।
उत्तर – उपर्युक्त पंक्ति का भावार्थ यह है कि भारत की पराधीनता के कारण कवियत्री दुखी है। भारतवासियों के अगण्य बलिदानों के बावजूद हमारा मातृ-मंदिर स्वतंत्र नहीं हो पाया। इसी दुख को स्पष्ट करते हुए कवयित्री अपने आंसुओं से भारत माता के चरण धोने की कल्पना करती है। 

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवयित्री क्या प्रेरणा दे रही है?
उत्तर – उपर्युक्त  पंक्तियों द्वारा कवयित्री यह प्रेरणा दे रही है कि हम भारतवासियों को विदेशी शासकों का डटकर सामना करते हुए मातृ मंदिर की ओर अग्रसर होना है तथा देश की स्वाधीनता के लिए हर असंभव कार्य को संभव बना देना है। 

2. किंतु यह हुआ अचानक ध्यान
दीन हूँ, छोटी हूँ, अज्ञान।
मातृ मंदिर का दुर्गम मार्ग 
तुम्हीं बतला दो हे भगवान।
मार्ग के बाधक पहरेदार 
सुना है ऊँचे-से सोपान।
फिसलते हैं ये दुर्बल पैर
चढ़ा दो मुझको हे भगवान।।

प्रश्न – 1 कवयित्री को अचानक क्या ध्यान आया? उसने भगवान से क्या प्रार्थना की? 
उत्तर – कवयित्री को अचानक ही ध्यान में आया कि क्या उन्हें माँ के दर्शन हो सकेंगे? वह दीन, छोटी और ज्ञान से रहित है और भारत माता के मंदिर तक पहुँचने का मार्ग अत्यंत दुर्लभ है, इसलिए उसने भगवान से प्रार्थना कि उसे विदेशियों से डटकर सामना करने की शक्ति प्रदान करें।

प्रश्न – 2 ‘मार्ग के बाधक पहरेदार’ से कवयित्री का क्या तात्पर्य है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘मार्ग के बाधक पहरेदार’ से कवयित्री का तात्पर्य अंग्रेज सैनिकों से है। अतः वह अपने दुख को स्पष्ट करते हुए कहती है कि मातृ-मंदिर तक पहुँचना आसान नहीं क्योंकि रास्ते में खड़े विदेशी प्रहरी दर्शनार्थियों को आगे नहीं बढ़ने देते।

प्रश्न – 3 कवयित्री ने मातृ मंदिर के मार्ग को दुर्गम क्यों कहा है? वह भगवान से क्या प्रार्थना करती है?
उत्तर – कवयित्री ने मातृ मंदिर के मार्ग को दुर्गम कहा है क्योंकि मंदिर तक जाने के लिए बहुत ऊँची सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं जिस कारण वह अपने लक्ष्य तक नही पहुँच पाती। अर्थात् शक्तिशाली विदेशी उसका रास्ता रोक खड़े हो जातें हैं। वह भगवान से प्रार्थना करती है कि उसे शक्ति प्रदान करें।

प्रश्न – 4 शब्दार्थ लिखिए – दीन, दुर्गम, बाधक, सोपान।
उत्तर – दीन – गरीब,  दुर्गम – अगम्य, बाधक – रूकावट, सोपान – सीढ़ियाँ 
  
3. अहा! वे जगमग-जगमग जगी 
ज्योतियाँ दीख रहीं हैं वहाँ।
शीघ्रता करो वाद्य बज उठे 
भला मैं कैसे जाऊँ वहाँ?
सुनाई पड़ता है कल-गान 
मिला दूँ मैं भी अपनी तान।
शीघ्रता करो मुझे ले चलो,
मातृ मंदिर में हे भगवान।।

प्रश्न – 1 ‘ज्योतियाँ दीख रही है वहाँ’ - पंक्ति द्वारा कवयित्री का संकेत किस ओर है? 
उत्तर – ‘ज्योतियाँ दीख रही है वहाँ’ से कवयित्री का संकेत जगमगाती हुई भारत माता की स्वतंत्रता की ओर है। अर्थात् कवयित्री को स्वाधीनता की जगमग करती हुई ज्योतियाँ दिखाई दे रही है।

प्रश्न – 2 ‘वाद्य बज उठे’ से कवयित्री का क्या अभिप्राय है? उनकी ध्वनि सुनकर उसकी क्या प्रतिक्रिया होती है?
उत्तर –  ‘वाद्य बज उठे’ से कवयित्री का अभिप्राय वहाँ बज रहे बाजे से है। उनकी वाणी सुनकर कवयित्री वहाँ जल्दी पहुँचना चाहती है ताकि भारत देश को स्वतंत्र करने में वे अपना कुछ योगदान दे सकें। 

प्रश्न – 3 ‘कल-गान’ से कवयित्री का क्या आशय है? इस संदर्भ में कवयित्री अपनी क्या अभिलाषा व्यक्त करती है?
उत्तर – ‘कल-गान’ से कवयित्री का आशय सुंदर गीत से है। अर्थात् उन्हें सुंदर गीत सुनाई पड़ रह है। इस संदर्भ में कवयित्री अपनी अभिलाषा व्यक्त करती है कि वह जल्द से जल्द वहाँ पहुँचे और गीत गायन में शामिल हो ताकि देश की स्वतंत्रता के लिए कुछ योगदान दें। 

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों का मूलभाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों का मूल भाव यह है कि भारत की स्वतंत्रता अब दूर नहीं। इसलिए वहाँ का जगमगाता दृश्य कवयित्री को दिखाई दे रहा है। अर्थात् स्वाधीनता अब दूर नहीं है और इसकी कल्पना करते हुए कवयित्री प्रभु से प्रार्थना करती है कि वे उसे शक्ति प्रदान करें और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उसकी सहायता करें। 

4. चलूँ मैं जल्दी से बढ़-चलूँ।
देख लूँ माँ की प्यारी मूर्ति।
अहा! वह मीठी-सी मुसकान 
जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति।।
उसे भी आती होगी याद?
उसे, हाँ आती होगी याद।
नहीं तो रुठूँगी मैं आज मुसकान
सुनाऊँगी उसको फरियाद।।

प्रश्न – 1 उपर्युक्त पंक्तियों के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि कवयित्री की क्या इच्छा है?
उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों के आधार पर कवयित्री की यह इच्छा है कि भारत शीघ्रता से विदेशी शासन से मुक्त हो और वह भारत माँ को मुस्कुराता हुआ देख सके। भारत माँ के मुख पर मुसकान देखकर उसे भी नई स्फूर्ति प्राप्त होगी, उसमें नया जोश एवं नई उमंग का संचार होगा।

प्रश्न – 2 ‘मीठी-सी मुसकान’ का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘मीठी-सी’ मुस्कान का संदर्भ यह है कि जब भारत माँ विदेशी शासकों और अत्याचारों से मुक्त हो जाएगी और भारत को स्वतंत्रता मिल जाएगी, तब भारतवासियों के चेहरे पर एक मीठी-सी मुस्कान आ जाएगी।

प्रश्न – 3 ‘जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति’ - पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर – ‘जगा जाती है, न्यारी स्फूर्ति’ का आशय यह है कि जब भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हो जाएगी तब भारत माँ के मुख पर मुस्कान देखकर कवयित्री को भी नई स्फूर्ति प्राप्त होगी, उसमें नया जोश और नई उमंग आ जाएगी।

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों का भावार्थ यह है कि कवयित्री भारत माँ के मंदिर में जल्दी से जल्दी पहुँचकर भारत माँ की प्यारी मूर्ति को देखना चाहती है। उस मूर्ति पर मीठी-सी मुस्कान देखकर कवयित्री के ह्रदय में भी नई स्फूर्ति का संचार होगा। कवयित्री को पूरा विश्वास है कि भारत माँ को भी अपने बच्चे की याद अवश्य आती ही होगी।

5. कलेजा माँ का, मैं संतान 
 करेगी दोषों पर अभिमान।
 मातृ-वेदी पर हुई पुकार,
 चढ़ा जो मुझको, हे भगवान।।
 सुनूँगी माता की आवाज़ 
 रहूँगी मरने को तैयार।
 कभी भी उस वेदी पर देव,
 न होने दूँगी अत्याचार।। 
 न होने दूँगी अत्याचार
 चलो, मैं हो जाऊँ बलिदान।
 मातृ-मंदिर में हुई पुकार,
 चढ़ा जो मुझको, हे भगवान।।

प्रश्न – 1 उपर्युक्त पंक्तियों में ‘माँ’ की किस विशेषता का उल्लेख किया गया है और क्यों?
उत्तर –  उपर्युक्त पंक्तियों में माँ की इस विशेषता का उल्लेख किया गया है कि मामा के हृदय में हमेशा अपनी संतान के प्रति स्नेह, वात्सल्य तथा ममता के भाव भरे होते हैं। वह अपनी संतान के दोषों को भी अनदेखा कर देती है क्योंकि माता की ममता कभी कम नहीं होती है।

प्रश्न – 2 ‘मातृ-वेदी पर हुई पुकार’ का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘मातृ-वेदी पर हुई पुकार’ का संदर्भ यह है कि कवयित्री भारत माँ को पराधीनता से मुक्त कराना चाहती है। उस पर किसी भी प्रकार का अत्याचार नहीं होने देना चाहती। यदि उन अत्याचारों को रोकने के लिए उसे अपने प्राणों का बलिदान भी देना पड़े तो वह पीछे नहीं हटेगी।

प्रश्न – 3 कौन किस पर तथा किस प्रकार अत्याचार कर रहा था? अत्याचार के विरोध में कवयित्री अपनी क्या इच्छा व्यक्त करती है?
उत्तर – विदेशी शासक भारतवासियों और भारत माता को गुलाम बनाकर अत्याचार कर रहा था। अत्याचार के विरोध में कवयित्री ने यह इच्छा व्यक्त की है कि वह भारत माता पर होने वाले किसी भी अत्याचार को रोकने के लिए अपने प्राणों को बलिदान करने के लिए तत्पर है। 

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवयित्री क्या प्रेरणा दे रही है?
उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा कवयित्री प्रेरणा दे रही है कि हमें अपनी मातृभूमि पर होने वाले अत्याचारों को देखकर चुप नहीं बैठना चाहिए और किसी भी प्रकार के अत्याचारों का हमेशा विरोध करना चाहिए। यदि इन अत्याचारों को रोकने के लिए हम अपने प्राणों का भी बलिदान करना पड़े तो हमें कर देना चाहिए।


Saturday, 15 May 2021

Do kalakar

पाठ – 10
दो कलाकार 
लेखक – मन्नू भंडारी 

 निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए-

1. अरे यह क्या? इसमें तो सड़क, आदमी, ट्राम, बस, मोटर, मकान सब एक दूसरे पर चढ़ रहे हैं। मानो सबकी खिचड़ी पकाकर रख दी हो। क्या घनचक्कर बनाया है?

प्रश्न – 1 ‘अरे, यह क्या? -  वाक्य का वक्ता और श्रोता कौन है? उपर्युक्त कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘अरे,यह क्या’ वाक्य की वक्ता अरुणा है और श्रोता चित्रा है। जब चित्रा अपना बनाया हुआ चित्र सोती हुई अरुणा को दिखाने गई तो चित्र देखकर अरुणा को कुछ भी समझ में नहीं आया। अरुणा को चित्रों में कोई रुचि नहीं थी। अरुणा के कथन का आशय यह है कि चित्रा ने इतनी सारी चीजें एक चित्र में बनाकर खिचड़ी-सी बना दी है, जिसे देख कर कोई भी चक्कर खा सकता है।

प्रश्न – 2 चित्र को चारों ओर घुमाते हुए वक्ता ने श्रोता को चित्रों के संबंध में क्या सुझाव दिया था?

उत्तर – चित्र को चारों ओर घुमाते हुए वक्ता अर्थात अरुणा ने चित्रा को यह सुझाव दिया कि जब भी वह कोई चित्र बनाए तब उस पर उसका नाम लिख दे क्योंकि जब भी वह उसका चित्र देखती है तो समझ नहीं पाती कि वह चित्र किस चीज़ का चित्र है।

प्रश्न – 3 ‘खिचड़ी पकाकर’ और ‘घनचक्कर’ शब्दों का आशय स्पष्ट करते हुए बताइए कि इनका प्रयोग किस संदर्भ में किया गया है और क्यों?

 उत्तर – ‘खिचड़ी पकाकर’ का अर्थ होता है बहुत सारी चीजों का एक साथ मिला देना और ‘घनचक्कर’ का अर्थ होता है जो चक्कर में डाल दे। इन दोनों शब्दों का प्रयोग चित्रा के चित्रों के लिए किया गया है क्योंकि चित्रा ने अपने चित्र में बहुत सारी चीजों को बनाकर खिचड़ी-सी बना दी थी जो चक्कर में डालने वाली थी।

प्रश्न – 4 श्रोता ने अपने चित्र को किसका प्रतीक बताया? वक्ता ने उसकी खिल्ली किस प्रकार उड़ाई?

 उत्तर – श्रोता अर्थात् चित्रा ने अपने चित्र के बारे में बताया कि यह चित्र आज की दुनिया में कंफ्यूजन का प्रतीक है। इस पर अरुणा ने उसकी खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि मुझे तो तेरे दिमाग के कन्फ्यूजन का प्रतीक नजर आ रहा है, बिना मतलब जिंदगी खराब कर रही है।

2. पर सच कहती हूँ मुझे तो सारी कला इतनी निरर्थक लगती है, इतनी बेमतलब लगती है कि बता नहीं सकती।

प्रश्न – 1 वक्ता को किस की कला निरर्थक लगती थी और क्यों? 

उत्तर – अरुणा को चित्रा की कला निरर्थक और बेमतलब लगती है क्योंकि चित्रा अपने चित्र को बनाने के लिए किसी चीज का ख्याल नहीं रखती थी, उसे दूसरों से कोई मतलब नहीं था। बड़ी से बड़ी घटना उसके लिए कोई महत्त्व नहीं रखती थी। हर घड़ी, हर जगह, हर चीज में वह अपने चित्रों के लिए मॉडल खोजा करती थी। अरुणा के अनुसार चित्रा यदि चित्रों को बनाने के बजाय किसी असहाय व्यक्ति की सहायता करें तो अच्छा रहता। अतः अरुणा मानती थी कि वही मनुष्य जीवन सार्थक होता है जिससे दूसरों को सहारा मिले।  

प्रश्न – 2 वक्ता ने उसकी कला पर व्यंग करते हुए क्या कहा और उसे क्या सलाह दी?

उत्तर – वक्ता यानी अरुणा ने चित्रा की कला पर व्यंग करते हुए यह सलाह दी कि वह यह निरर्थक और बेमतलब कला छोड़ दें जो आदमी को आदमी न रहने दे। अरुणा ने चित्रा को निर्जीव चित्रों को बनाने के बजाय असहाय लोगों की जिंदगी बनाने की बात कही पर ऐसा उसने इसलिए कहा क्योंकि वह बहुत ही अमीर पिता की इकलौती बेटी थी। वह चाहती तो किसी की भी मदद कर सकती थी, लेकिन उसे दूसरों की मदद करने में कोई रुचि नहीं थी। 
 
प्रश्न – 3 वक्ता की बात पर श्रोता ने क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की और क्यों?

उत्तर – वक्ता की बातों पर श्रोता चित्रा ने कहा कि यह काम तो तेरे लिए छोड़ दिया। मैं चली जाऊँगी तो जल्दी से सारी दुनिया का कल्याण करने के लिए झंडा लेकर निकल पड़ना। चित्रा ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि अरुणा में समाज सेवा का भाव था।

प्रश्न – 4 आपके अनुसार सच्ची कला की क्या पहचान है?

उत्तर – मेरे विचार से सच्ची कला वह है जिस कला से पूरे समाज को या पूरे देश को लाभ पहुँचे। वह कला बिल्कुल निरर्थक होती है जो केवल अपने स्वार्थ के लिए प्रस्तुत की जाती हो। चित्रा की कला निरर्थक थी और अरुणा की कला सच्ची कला थी क्योंकि उसने हमेशा समाज के दुर्बल और असहाय लोगों की मदद की।

3. यह काम तो मेरे लिए छोड़ दिया। मैं चली जाऊँगी तो जल्दी से सारी दुनिया का कल्याण करने के लिए झंडा लेकर निकल पड़ना।

प्रश्न – 1 वक्ता और श्रोता का परिचय दीजिए।

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति की वक्ता चित्रा है जो एक चित्रकार है और बचपन से यह सपना देखती है कि वह विदेशों में जाकर खूब नाम कमाए। उसे भिखारिन वाले चित्र द्वारा खूब प्रसिद्धि मिलती है। प्रस्तुत कथन की श्रोता अरुणा है जो स्वभाव से एक समाज सेविका है वह हमेशा दुर्बल और असहाय लोगों की मदद के लिए तैयार रहती है। उसी ने भिखारिन के दो बच्चों को सहारा दिया और उनकी जिंदगी संवारी।

प्रश्न – 2 ‘वह काम’ से वक्ता का संकेत किस ओर है? वक्ता और श्रोता में अपने-अपने कामों को लेकर किस प्रकार की नोंक-झोंक चलती रहती थी?

 उत्तर – ‘वह काम’ से वक्ता यानी चित्रा का संकेत समाज सेवा की ओर है जो अरुणा किया करती थी लेकिन चित्रा को समाज सेवा करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। अरुणा और चित्रा दोनों को एक-दूसरे के काम निरर्थक लगते थे। अरुणा चित्रा को हमेशा कहती थी कि तुम इन बेकार की चित्रों को बनाकर अपना समय बर्बाद कर रही हो, उसी तरह चित्रा भी हमेशा अरुणा के समाज सेवा को बेकार समझती थी। जिस कारण दोनों मित्रों में छोटी मोटी नोक-झोंक चलती रहती थी।

प्रश्न – 3 वक्ता कहाँ जा रही थी और क्यों?

उत्तर – वक्ता यानी चित्रा विदेश जा रही थी। वह अपने पिता की इकलौती बेटी थी। वह विदेश जाकर अपनी चित्र की कला को बढ़ाना, प्रसिद्धि पाना और अपने पिता का नाम रोशन करना चाहती थी। 

प्रश्न – 4 ‘वक्ता और श्रोता’ के जीवन-उद्देश्य में अंतर होते हुए भी उनमें घनिष्ट मित्रता थी’ – स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – अरुणा के जीवन का लक्ष्य समाज सेवा था और उसकी सहेली चित्रा के जीवन का उद्देश्य एक महान चित्रकार बनना था। दोनों के जीवन उद्देश्य में अंतर होते हुए भी उन्हें घनिष्ट मित्रता थी क्योंकि उनमें असीम प्रेम था। दोनों को एक दूसरे की परवाह थी। वह दोनों मन में उत्पन्न होने वाले मन-मुटाव, शंका और ईर्ष्या की भावना को दूर रखती थी। वे हॉस्टल में साथ रहती थी और एक दूसरे की मदद करती रहती थीं।

4. “कहा तो मेरे।” अरुणा से हँसते हुए कहा।
“अरे बता न, मुझे ही बेवकूफ बनाने चली है।”

प्रश्न – 1 ‘कहा तो मेरे’ वाक्य का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – कहा तो मेरे वाक्य का संदर्भ यह है कि विदेश से तीन साल बाद लौटने के उपरांत चित्रा का भारत में जोरदार स्वागत हुआ और दिल्ली में उसकी कला की प्रदर्शनी का आयोजन हुआ तो उद्घाटन करने के लिए चित्रा को ही बुलाया गया। अरुणा सिर्फ उससे मिलने के लिए उस प्रदर्शनी में आई थी। जब चित्रा और अरुणा मिले तो अरुणा के साथ दो बच्चे भी थे। चित्रा के पूछने पर अरुणा ने उन दोनों बच्चों को खुद के बच्चे बताती है। जिसे सुनकर चित्रा को विश्वास नहीं होता और वह अपने ही विचारों में खो जाती है

प्रश्न – 2 ‘मुझे ही बेवकूफ बनाने चली है’ –  वाक्य का संदर्भ स्पष्ट करते हुए बताइए कि वक्ता को श्रोता की किस बात पर विश्वास नहीं हुआ और क्यों?

उत्तर – चित्रा की कला प्रदर्शनी में जब अरुणा और चित्रा की भेंट हुई तो अरुणा के साथ दो बच्चे भी थे। लड़के की उम्र दस साल की थी और लड़की की उम्र आठ साल थी। जब चित्रा ने अरुणा से पूछा कि यह बच्चे किसके हैं तब अरुणा ने कहा कि मेरे बच्चे हैं। चित्रा को विश्वास नहीं हुआ कि वह बच्चे अरुणा के थे क्योंकि जब चित्रा तीन साल पहले विदेश गई थी तब अरुणा की शादी भी नहीं हुई थी तो उसके इतने बड़े बच्चे कैसे हो सकते थे।

प्रश्न – 3  अरुणा की कौन-सी बात सुनकर चित्रा की आँखें फैली की फैली रह गईं?

उत्तर – चित्रा के बार-बार पूछने पर जब अरुणा ने भिखारिनवाले चित्र के दोनों बच्चों पर ऊँगली रखकर बताया कि ये ही वो दोनों बच्चे हैं जिनको मैंने अपना लिया है तो चित्रा की आँखें फैली की फैली रह गईं।

प्रश्न – 4 चित्रा को किस चित्र से प्रसिद्धि मिली थी? चित्र का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

उत्तर – चित्रा को उस मृत भिखारिन एवं बच्चों पर आधारित ‘अनाथ’ शीर्षकवाले चित्र द्वारा देश व विदेश में बहुत प्रसिद्धि मिली थी। चित्रा ने अपने चित्र में एक मृत भिखारिन और उसके सूखे शरीर से चिपक कर बुरी तरह से रो रहे दो बच्चों को चित्रित किया था।

Saturday, 8 May 2021

Bade Gher ki Beti

पाठ – 06
बड़े घर की बेटी 
प्रेमचंद 

दी गई पंक्तियों को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए-


1. ‘श्रीकंठ सिंह की दशा बिल्कुल विपरीत थी।’

प्रश्न – 1 श्रीकंठ सिंह की शारीरिक बनावट किस के विपरीत की और कैसे?

उत्तर – श्रीकंठ सिंह की शारीरिक बनावट अपने छोटे भाई लाल बिहारी सिंह से विपरीत थी क्योंकि श्रीकंठ सिंह बिल्कुल दुर्बल शरीर का था जबकि लाल बिहारी दोहरे बदन का सजीला जवान था। उसका भरा हुआ मुखड़ा और चौड़ी छाती थी। श्रीकंठ जी बी. ए. पास किए हुए थे जबकि लाल बिहारी पहलवानी करता था।

प्रश्न – 2 सम्मिलित कुटुंब के संबंध में श्रीकंठ सिंह के क्या विचार थे?

उत्तर – श्रीकंठ सिंह सम्मिलित कुटुंब का एकमात्र उपासक था। वह पाश्चात्य सामाजिक प्रथाओं को नहीं मानता था। आज स्त्रियों को कुटुंब में मिल-जुलकर रहने को जो अरुचि होती है, उसे वह जाति और देश दोनों के लिए हानिकारक समझता था। उसने अपने कई मित्रों के घरों को टूटने से बचाया था।

प्रश्न – 3 सम्मिलित कुटुंब के संबंध में श्रीकंठ सिंह और उसकी पत्नी के विचारों का अंतर स्पष्ट कीजिए?

उत्तर – सम्मिलित कुटुंब के संबंध में श्रीकंठ सिंह का मानना था कि स्त्रियों में जो सम्मिलित कुटुंब में रहने की अरुचि है, वह जाति और देश दोनों के लिए हानिकारक है जबकि उनकी पत्नी का मानना था कि यदि बहुत कुछ सहने पर भी परिवार के साथ निर्वाह न हो सके तो आए दिन के कलह से जीवन को नष्ट करने की अपेक्षा अच्छा है कि अपनी खिचड़ी अलग पकाई जाए।

प्रश्न – 4 श्रीकंठ सिंह की पत्नी का संबंध किस कुल से था, स्पष्ट कीजिए।

 उत्तर – श्रीकंठ सिंह की पत्नी आनंदी बड़े उच्च कुल से थी। उनके पिता भूप सिंह एक छोटी-सी रियासत के ताल्लुकेदार थे। उनका एक विशाल भवन, एक हाथी, तीन कुत्ते, झाड़फानूस, आनरेरी मजिस्ट्री और ऋण, जो एक प्रतिष्ठित ताल्लुकेदार के योग्य पदार्थ हैं, सभी वहाँ विद्यमान थे।


2. ´वह एक सीधा साधा देहाती गृहस्थ का मकान था, किंतु आनंदी ने थोड़े ही दिनों में अपने आप को इस नई परिस्थिति के ऐसा अनुकूल बना लिया, मानो विलास के सामान कभी देखी ही न थे।`

प्रश्न – 1 ‘सीधा-सादा गृहस्थ’ – से किसकी ओर संकेत किया गया है? उसका परिचय दीजिए।

उत्तर – ‘सीधा-सादा गृहस्थ’ के माध्यम से एक मध्यवर्गीय पुरुष के घर की ओर संकेत किया गया है, जो श्रीकंठ सिंह का था। उन्होंने बी. ए. किया हुआ था। वह अपने पिता बेनी माधव सिंह और छोटे भाई लाल बिहारी के साथ रहता था। वह पाश्चात्य प्रथाओं को नहीं मानता था और सम्मिलित कुटुंब का पक्षधर था। उसका विवाह एक बड़े कुल की लड़की आनंदी से हुआ था।

प्रश्न – 2 आनंदी के पिता उसके विवाह को लेकर किस प्रकार के धर्म संकट में थे?

उत्तर – आनंदी अपने घर में चौथी लड़की थी। वह बहुत ही रूपवती थी। उसके माता-पिता उससे बहुत प्रेम करते थे। वह उसके विवाह को लेकर इसलिए चिंतित थे क्योंकि वह चाहते थे कि न तो ऋण का बोझ बड़े और न ही उसकी बेटी अपने आप को भाग्यहीन समझे। वह उसका भला चाहते थे।

प्रश्न – 3 आनंदी के मैके और ससुराल के वातावरण में क्या अंतर था?

उत्तर – आनंदी का जन्म एक उच्च कुल में हुआ था। वहाँ उसे किसी चीज की कमी नहीं थी। उसके मैके में अगर कोई आता तो खाली हाथ नहीं जाता था लेकिन उसके ससुराल का माहौल बिल्कुल अलग था, वहाँ न तो घूमने के लिए बगीचा था, न ही जमीन पर फर्श था और न दीवार पर तस्वीरें थी।

प्रश्न – 4 आनंदी और लाल बिहारी की तकरार किस बात पर शुरू हुई?

उत्तर – एक दिन लाल बिहारी दो चिड़ियाँ लिए हुए आया और आनंदी से बोला कि उसे भूख लगी है जल्दी से इसे पका दो। अब घर में बचे हुए थोड़े बहुत घी को उसने मांस पकाने में लगा दिया किंतु दाल में घी डालने के लिए नहीं बचा इसलिए ऐसे ही खाना परोस दिया। जब लाल बिहारी खाना खाने आए तो दाल में घी नहीं मिला जिस कारण  लाल बिहारी ने आनंदी के मैके को बुरा भला कह दिया तो आनंद ही ने कहा कि उनके यहाँ इतना घी तो नौकर खा जाते हैं। इस बात पर दोनों की तकरार बढ़ गई।


3.‘भाभी, भैया ने निश्चय किया है कि वे मेरे साथ इस घर में न रहेंगे। आप भी मेरा मुँह भी नहीं देखना चाहते, इसलिए मैं जाता हूँ। उन्हें फिर मुँह न दिखाऊँगा। मुझसे जो अपराध हुआ, उसे क्षमा करना।’

प्रश्न – 1 भाभी और भैया का परिचय दीजिए। भैया ने क्या निश्चय किया था और क्यों?

 उत्तर – भाभी आनंदी है और भैया श्रीकंठ है। आनंदी एक अच्छे परिवार की लड़की है जिसका विवाह श्रीकंठ से हुआ है। आनंदी बहुत गुणवती है और श्रीकंठ बहुत दुर्बल शरीर के बी. ए. पास व्यक्ति है। आनंदी व लाल बिहारी सिंह की तकरार के बाद श्रीकंठ ने यह निश्चय किया कि या तो वह इस घर में रहेगा या लाल बिहारी क्योंकि तकरार के दौरान उसने अपनी भाभी को अपशब्द कहे थे।

प्रश्न – 2 आनंदी के स्वभाव की चर्चा कीजिए। वह अपने पति पर किस बात के लिए झुँझला रही थी?

 उत्तर – आनंदी बहुत ही समझदार स्त्री कि वे स्वभाव से दयालु थी अपने उच्च कुल को लेकर उसमें थोड़ा भी घमंड नहीं था। वह अपने पति पर इसलिए चिल्ला रही थी क्योंकि उसका पति ने अपने भाई की बातों में उससे यह पूछा की उसने क्या उपद्रव मचा रखा है।

प्रश्न – 3 आनंदी की अपने पति से क्या बातचीत हुई?

उत्तर – जब लाल बिहारी अपने भाई श्रीकंठ सिंह की बातें सुन लेता है तो वह आनंदी से कहता है कि भाभी मैं जा रहा हूँ तब आनंदी अपने पति को समझाती है कि वह लाल बिहारी को माफ कर दें। उसे पछतावा हो गया है। पहले तो श्रीकंठ नहीं माने लेकिन लाल बिहारी उनका छोटा भाई था इसलिए उनको उस पर तरस आ गया और उनका भी दिल पिघल गया और लाल बिहारी को माफ करके गले लगा लिया।

प्रश्न – 4 घटनाक्रम ने अंत में किस प्रकार मोड़ लिया?

उत्तर – जब लाल बिहारी ने आनंदी के ऊपर चप्पल फेंक कर मारी थी तो घी के ऊपर छोटे से झगड़े ने बड़ा मोड़ ले लिया। श्रीकंठ सिंह आनंदी से पूरा घटनाक्रम सुनने के बाद घर छोड़ने का निश्चय कर चुके थे। यह देखकर लाल बिहारी को बहुत पछतावा हुआ तो उसने श्रीकंठ सिंह और आनंदी से माफी मांगी। पहले तो श्रीकंठ ने लाल बिहारी को माफ नहीं किया किंतु आनंदी के समझाने पर उसे माफ कर दिया और गले लगा लिया।

Wednesday, 9 December 2020

संदेह

संदेह 
लेखक – जयशंकर प्रसाद 

 निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए – 

1. मैं चतुर था, इतना चतुर जितना मनुष्य को न होना चाहिए, क्योंकि मुझे विश्वास हो गया है कि मनुष्य अधिक चतुर बनकर अपने को अभागा बना लेता है और भगवान की दया से वंचित हो जाता है ।

प्रश्न 1 -  वक्ता एवं श्रोता कौन है? उसने श्रोता से अपने मन की बात किस प्रकार बताई?

उत्तर – वक्ता रामनिहाल है और श्रोता श्यामा है। रामनिहाल कहता है कि वह बहुत ही चालाक व्यक्ति था, जितना कि मनुष्य को नहीं होना चाहिए और  इसी कारण वह अपने आप को अभागा बना चुका था । वह भारत के विभिन्न प्रदेशों में व्यवसाय पाने  की तलाश में घूमता रहता था, किंतु श्यामा के घर आकर ही उसे घर के सुख-दुख  देखकर पता चला कि वह पहले गृहहीन था।

प्रश्न 2 – अपनी महत्वाकांक्षा तथा उन्नतशील विचारों के बारे में वक्ता ने क्या कहा? 

उत्तर – वक्ता (रामनिहाल) हमेशा नया कार्य ढूंढता रहता था और अपने को कहीं रुकने नहीं देता था। वह जिन लोगों के यहाँ  नौकरी करता था, वे बड़े ही सज्जन थे । रामनिहाल सोचता था कि वह इससे भी अच्छी नौकरी  पा सकता है और दूसरी जगह नौकरी ढूंढता रहता था। वह सोचता था कि कभी न कभी तो वह इस चाह  को संभव कर ही पाएगा।

प्रश्न 3 – वक्ता ने श्रोता से किस घटना का उल्लेख किया?

उत्तर – वक्ता (रामनिहाल) ने श्रोता (श्यामा) को बताया कि जब वह काम से छुट्टी पाकर दशाश्वमेध घाट पर जा रहा था तभी उसके मालिक ब्रजकिशोर ने उसे कहा कि तुम गंगा घूमने तो जा ही रहे तो मेरे कुछ निकट संबंधी को भी ले जाओ और वहाँ उनकी मुलाकात मनोरमा से हुई जिसका पति उसपर  संदेह करता था। 

प्रश्न 4 – क्या आप वक्ता  के उपर्युक्त  कथन से सहमत हैं? कारण सहित बताइए?
  
उत्तर – हाँ, हम वक्ता (रामनिहाल) के  कथन से सहमत हैं क्योंकि जो लोग अपने आप को चतुर समझने लगते हैं  तो वे  अपने साथियों की सलाह नहीं लेते और कुछ न कुछ गलत कर बैठते हैं, जिससे उन्हें बहुत बड़ी हानि हो सकती है। ऐसे लोग अपने आप पर घमंड करने लगते हैं और उन्हें सफलता नहीं मिलती है।

2. भगवान जाने इसमें क्या रहस्य है? किंतु संसार तो दूसरे को मूर्ख बनाने के व्यवसाय पर चल रहा है।

प्रश्न 1 – रामनिहाल को ब्रजकिशोर बाबू और मोहनलाल के संबंध में किस विशेष बात का पता चला? 

उत्तर – रामनिहाल को इन दोनों के संबंध के बारे में यह पता चला कि ब्रजकिशोर मोहनलाल को अदालत में पागल साबित करना चाहता है क्योंकि वह उसका अकेला निकट संबंधी है और मोहनलाल को इस बात का संदेह हो गया था और वह सोचते थे कि उनकी पत्नी भी इसमें सम्मिलित है।

प्रश्न 2 - भगवान जाने इसमें क्या रहस्य है? रामनिहाल ने ऐसा क्यों कहा ?

उत्तर – रामनिहाल ऐसा इसलिए कहता है क्योंकि जब मोहनलाल को पता लगता  है कि ब्रजकिशोर उसकी सारी संपत्ति लेना चाहते हैं तो उसे लगता है कि उनकी पत्नी ब्रजकिशोर की मदद कर रही है। इसलिए वह उससे अच्छा व्यवहार नहीं करता। परंतु कोई नहीं जानता कि यह सच है या नहीं इसलिए रामनिहाल  ने ऐसा कहा।

प्रश्न 3 – मनोरमा ने रामनिहाल को पत्र क्यों लिखे थे? उन पत्रों को लेकर रामनिहाल को क्या संदेह होने लगा था?

उत्तर – मनोरमा ने रामनिहाल को पत्र इसलिए लिखें क्योंकि मोहनलाल मनोरमा पर संदेह कर रहा था कि वह ब्रजकिशोर के साथ मिलकर उसकी संपत्ति लेना चाहती है। वह चाहती थी कि रामनिहाल मोहनलाल को समझाए और उसकी सहायता करें। रामनिहाल को संदेह होने लगा था कि मनोरमा शायद उससे प्रेम करने लगी है।

प्रश्न 4 -  रामनिहाल  के हाथ में किसका चित्र था? चित्र को देखकर श्यामा ने रामनिहाल से क्या कहा?

उत्तर – रामनिवास के हाथ में श्यामा का चित्र था। चित्र देखकर श्यामा ने रामनिहाल से कहा - क्या तुम मुझसे प्रेम करते हो? यह अच्छी फांसी लगी है तुमको। निहाल बाबू प्यार करना बड़ा कठिन है। तुम इस खेल को नहीं जानते इसके चक्कर में पड़ना भी मत। हाँ, एक दुखिया स्त्री को तुम्हारी सहायता की जरूरत है, जाओ जाकर उसकी मदद करके आओ। तुमको अभी यहीं रहना है।

Sunday, 6 December 2020

अपना अपना भाग्य

पाठ – 05
अपना-अपना भाग्य 
लेखक – जैनेंद्र कुमार 

 निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए – 

1. ‘नैनीताल की संध्या धीरे धीरे उतर रही है।'

प्रश्न-1 नैनीताल की संध्या की विशेषताएँ बताइए। 

उत्तर – नैनीताल की संध्या की विशेषता यह हैं कि उस समय आकाश में भांप जैसे बादल थे जो रुई  के रेशे की तरह लेखक और उसके मित्र के सिर को छूकर बेरोक घूम रहे थे जैसे उनके साथ खेलना चाहते हो। हल्के प्रकाश और अंधियारी से रंग कर कभी वे नीले दिखते,  कभी सफेद और कभी ज़रा लाल पड़ जाते। 

प्रश्न - 2 लेखक अपने मित्र के साथ कहाँ बैठा था?  वह वहाँ  बैठा-बैठा बोर क्यों हो रहा था और क्यों कुढ़ रहा था? 

उत्तर – लेखक अपने मित्रों के साथ नैनीताल की किसी एक सड़क के किनारे बेंच पर बैठे थे।  पँद्रह  मिनट बाद लेखक वहाँ से जाना चाहते थे,  परंतु मित्रों के उठने का कोई इरादा ना मालूम हुआ इसलिए लेखक बोर हो रहे थे और अपने मित्रों  के उठने का इंतजार कर रहे थे। 

प्रश्न - 3 लेखक के मित्र को अचानक क्या दिखाई पड़ा?  उसका परिचय दीजिए। 

उत्तर – लेखक के मित्र को कोहरे में एक काली - सी मूर्ति आती दिखाई पड़ी तीन  गज दूरी से दिखाई पड़ा एक लड़का नंगे पैर नंगे सिर एक मैली सी कमीज लटकाए आ रहा था। उसके बड़े बड़े बाल थे जिन्हें वह खुजला रहा था। वह लगभग दस बारह वर्ष का था। उसका रंग गोरा था तथा माथे पर झुर्रियां थी।
 
प्रश्न - 4 जरा-सी उम्र में उसकी मौत से पहचान कैसे हो गई थी? 

उत्तर – ज़रा-सी उम्र में उसकी मौत से पहचान हो गई थी क्योंकि उसे खाना नहीं मिलता था,  कभी मिल गया तो कभी नहीं मिलता था। उसके पास पैसे नहीं थे,  नौकरी भी नहीं थी।  वह अपने मां-बाप से दूर था।  वह अपना गांव छोड़कर  एक साथी के साथ आया था जो होटल मालिक द्वारा सताये जाने पर दम तोड़ चूका था। इस प्रकार बालक की छोटी-सी उम्र में मौत से पहचान हो गई।

2. बालक फिर आँखों से बोलकर मूक खड़ा रहा। आँखें मानो बोलती थी-  'यह भी कैसा मूर्ख प्रश्न है।'

प्रश्न - 1 किस प्रश्न को सुनकर बालक मूक खड़ा रहा। उसकी आँखों ने क्या कह दिया?

उत्तर - अनेक प्रश्नों के उत्तर देने के बाद जब लेखक के मित्रों ने उस बालक से उसके रात में सोने के स्थान और उन्हीं कपड़ों में सोने के विषय में पूछा तो बालक मूक ही खड़ा रह गया उसकी आँखें जैसे बोलती थीं कि यह कैसा प्रश्न हैं, यहाँ मुझे खाने को कुछ नहीं है और ये लोग कपड़ों के लिए पूछ रहें हैं।

प्रश्न - 2 अपने परिवार के बारे में बालक ने क्या बताया?

उत्तर - अपने परिवार के विषय में बालक ने बताया कि उसके माँ-बाप पंद्रह कोस दूर गाँव में रहते हैं और उसके कई भाई-बहन हैं। उनके घर की हालत इतनी खराब थी कि परिवार के सदस्यों को खाना भी नसीब नहीं होता था। इसलिए वह वहाँ से भाग आया।

प्रश्न - 3 लेखक को बालक की किस बात को सुनकर अचरज हुआ?

उत्तर - लेखक को बालक के साथी की मृत्यु होने की बात पर अचरज हुआ और यह जानकर कि उसे मौत के विषय में पता है क्योंकि उसकी उम्र के बालक को मौत के विषय में कोई जानकारी नहीं होती।

प्रश्न - 4 लेखक और उसका मित्र बालक को कहाँ ले गए और क्यों? वकील साहब का पहाड़ी बालकों के संबंध में क्या मत था?

उत्तर - लेखक और उसके मित्र बालक को अपने वकील दोस्त के होटल में ले गए क्योंकि उसको एक नौकर की जरुरत थीं। वे उस बालक को उनके यहाँ इस उम्मीद से लेकर गए थे की उनका वकील दोस्त अपने होटल में उस बालक को काम दे देगा किंतु उनके वकील दोस्त ने नौकरी देने से साफ इंकार कर दिया क्योंकि उसको पहाड़ी बालाकों पर बिल्कुल भी विश्वास न था।


3. ‘भयानक शीत है।  उसके पास कम बहुत कम कपड़े….?’ ‘यह संसार है यार,’ मैंने स्वार्थ ही फ़िलासफ़ी सुनाई? 

प्रश्न - 1 लेखक के मित्र की उदासी का कारण स्पष्ट करते हुए बताइए कि वह पहाड़ी बालक की सहायता क्यों नहीं कर सका? 

उत्तर – लेखक के मित्र की उदासी का कारण यह था कि वह उस बालक की सहायता करना चाहते थे,  परंतु वकील साहब को बहुत समझाने के बाद भी वे नहीं माने और अपने कमरे में सोने के लिए चले गए। बालक समझ गया कि वहाँ उसका कुछ नहीं होगा और वह भी वहाँ से चला गया। 

प्रश्न - 2 ‘यह संसार है यार’ – वाक्य आजकल के मनुष्यों की किस प्रवृत्ति का द्योतक है ?

उत्तर – ‘यह संसार है यार’ – वाक्य आजकल के मनुष्यों की इस प्रवृत्ति का द्योतक है कि आजकल हर मनुष्य मतलबी हो गया है।  गरीब और जरूरतमंद लोगों पर विश्वास नहीं किया जाता है। उन्हें संदेह की निगाह से देखा जाता है जिस कारण वकील साहब ने लड़के को नौकरी पर नहीं रखा था। 

प्रश्न - 3 ‘अपना - अपना भाग्य' कहानी में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर – अपना-अपना भाग्य इस वाक्य का यह अर्थ है कि जिस व्यक्ति के भाग्य में जो लिखा होता है,  उसे वही मिलता है न  तो उससे अधिक और न तो उससे कम मिलता है। जिस प्रकार बालक के भाग्य में दुख, पीड़ा और कपट  थे तो उसे वहीं मिले। पहले उसका मित्र इस निर्दयी संसार को छोड़कर चला गया था और बाद में दुनिया का सताया वह  बालक भी ठिठुरती ठंड में अपने प्राण त्याग देता है। 

प्रश्न - 4 ‘अपना - अपना भाग्य' कहानी के  शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालिए। 

उत्तर – इस कहानी के शीर्षक की सार्थकता यह है कि जिस व्यक्ति के भाग्य में जो होता है उसको वही मिलता है।  जिस प्रकार उस बालक को दुख और पीड़ा सहनी पड़ी क्योंकि उसके भाग्य में वही लिखा था, उसी प्रकार हम सब के भाग्य में भी  जो लिखा होता है, वही हमें मिलता है। हम अपना अपना भाग्य बदल नहीं सकते। 

Friday, 2 October 2020

मेघ आए

पद्य भाग - 5
मेघ आये
कवि - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना 

निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए -

1. मेघ आये _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ सँवर के।

प्रश्न 1.कवि ने मेघों के आगमन की तुलना किससे की है? उनका स्वागत किस प्रकार होता है?

उत्तर – कवि ने मेघों  के आगमन की तुलना शहर से गाँव में आए मेघ रूपी अतिथि से की है। उनका स्वागत अतिथि की तरह होता है।  जिस तरह गाँव में आए हुए अतिथि का स्वागत किया जाता है,  ठीक उसी प्रकार उपर्युक्त पंक्तियों में मेघों का स्वागत किया जा रहा है।

प्रश्न 2. मेघों के आगमन पर बयार (हवा) की क्या प्रतिक्रिया हुई तथा क्यों? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – मेघों के आगमन पर पुरवाई हवा नाचती गाती चल पड़ती है,  मानो की वे मेघों के आने का संकेत दें रही हो और इस हवा के बहते ही लोगों के खिड़की दरवाज़े खुलने लगते है जिसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि लोग मेघ रूपी दामाद को देखने को आतुर है।

प्रश्न 3. मेघों के लिए ‘बन-ठन के’,  ‘सँवर के’ शब्दों का प्रयोग क्यों किया गया है?

उत्तर – जिस प्रकार शहर से कोई अतिथि (पाहुन) सज-धजकर तैयार होकर गाव आता है तो उसे देखकर लोगों में प्रसन्नता भर जाती है, उसी प्रकार मेघों के बन सँवरकर आने से लोगों में उसे देखने के लिए उल्लास उत्सुकता भर जाती है। अतः इसलिए मेघों के लिए बन-ठन के,  सँवर के शब्दों का प्रयोग किया गया है।

प्रश्न 4. ‘पाहुन ज्यों आएं हों, गाँव में शहर के’ – पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए तथा बताइए कि ग्रामीण संस्कृति में ‘पाहुन’ का विशेष महत्त्व क्यों है?

उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियों में पाहुन अर्थात दामाद के रूप में प्रकृति का मानवीकरण हुआ है।  प्रस्तुत पंक्ति में कवि ने मेघों के आगमन की तुलना किसी शहरीय अतिथि से की है।  वह कहते हैं कि जिस प्रकार मेघ बहुत दिनों के बाद गाँव में आया है, उसी प्रकार वे अतिथि भी कई दिनों के बाद गाँव में पधारे हैं। ग्रामीण संस्कृति में पाहुन का विशेष महत्व है क्योंकि उनके लिए अतिथि देव स्वरूप हैं, अर्थात अतिथि देवो भव:।


2. पेड़ झुक झाँकने लगे _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ सँवर के।

प्रश्न 1. ‘पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाए’ – पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियों में सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी द्वारा आकाश में बादलों के घिर आने के माध्यम से किसी शहरी से गाँव में आये मेहमान का मानवीकरण किया गया है। जब मेघ आ गए तो पेड़ों का गरदन उचकाकर उन्हें देखने लगतें हैं। अतः भाव यह है कि जब पुरवाई हवा चलती है तो पेड़ों की टहनियाँ झुक जाती हैं और तब ऐसा प्रतीत होता है मानो मेघों के आगमन पर पेड़ गर्दन झुकाए अत्यंत उल्लास एवं उत्सुकता के साथ मेघों को देख रहें हैं।

प्रश्न 2. उपर्युक्त पंक्तियों में ‘पेड़’,  ‘धूल’ और ‘नदी’ को किस-किस का प्रतीक बताया गया है और कैसे?

उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों में पेड़ नगरवासियों का प्रतीक बताया गया है। जिस प्रकार गाँव के लोग झुक-झुककर मेहमान को प्रणाम करते हैं,  ठीक उसी प्रकार पेड़ भी अपनी गरदन झुकाकर आए हुए मेहमान को देखते है। धूल एक दौड़ती हुई युवती का प्रतीक है,  जो आए हुए मेहमान को देखकर भागी चली जा रही है तथा कवि ने नदी को वधुओं का प्रतीक बताया है,  जो घूँघट करके अपने मेहमानों को देखती है।

प्रश्न 3. ‘ बाँकी चितवन उठा नदी ठिठकी, घूँघट सरकाए’ – पंक्ति का भाव – सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति का भाव यह है कि मेघों के आने का प्रभाव पूरी प्रकृति पर पड़ता है। जिस प्रकार नदी ठिठकर ऊपर मेघ को देखने की चेष्टा करती है और तिरछी नज़र से मेघों को देखती है, ठीक उसी प्रकार गाँव की वधुओं ने घूँघट कर लिया है और वह मेहमान को देखने लगी हैं।

प्रश्न 4. उपर्युक्त पंक्तियों का भाव – सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – उपर्युक्त पंक्ति का भाव यह है कि गाँव में शहर से आए मेहमान के बन ठनकर आने पर जिस प्रकार गाँव के लोग उसे झुक-झुककर प्रणाम करते हैं वैसे ही पेड़ भी मेघों के गरदन झुकाकर देख रहे हैं। आँधी को उड़ते हुए देखकर कवि कल्पना करते हैं कि गाँव की मानो कोई युवती भेंट करने मेहमान की ओर भागी चली जा रही है। नदी के ठिठकने से कवि का आशय है कि गाँव की वधुओं ने घूँघट कर लिया है और वे मेहमानों को देखने लगी है।


3. बूढ़े पीपल ने आगे  _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ सँवर के। 

प्रश्न 1.  मेघों के आगमन पर पीपल ने क्या किया?  उसके लिए बूढ़े शब्द का प्रयोग क्यों किया गया है? 

उत्तर – मेघों के आगमन पर पीपल उनका अभिवादन किया है। पीपल के पेड़ के लिए बूढ़े शब्द का प्रयोग इसलिए किया गया है क्योंकि उसकी आयु बहुत लंबी होती है। 

प्रश्न 2.  लता ने मेघों के आगमन पर उनसे क्या कहा और कैसे? काव्य पंक्ति में ‘ओट को किवार की’ का प्रयोग क्यों किया गया है? 

उत्तर – उपयुक्त पंक्तियों में लता को ऐसी पत्नी के रूप में दिखाया गया है जिसका पति उससे एक  वर्ष बाद मिलने आया हो। इसलिए वे लता किवाड़ की ओट में खड़ी होकर अपने पति को एक वर्ष के बाद आने का उलाहना देती है। काव्य पंक्ति में ‘ओट हो किवार की’ का प्रयोग इसलिए किया गया है क्योंकि उस गाँव में पत्नी अपने पति के सामने नहीं आती इसलिए कवि  ने कल्पना की है कि लता किवार की ओट में खड़ी होकर अपने पति को देखती है। 

प्रश्न 3. उपर्युक्त पंक्तियों में ‘पीपल’, ‘लता’ और ‘ताल’ शब्दों का प्रयोग कवि ने किस-किस के प्रतीक के रूप में किया है? 

उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों में पीपल बूढ़े-बुजुर्गों का प्रतीक है, लता किवार की ओट से अतिथि को उलाहना देने वाली एक युवती का प्रतीक है और ताल उन सेवकों का प्रतीक है जो ख़ुशी ख़ुशी परात में पानी भरकर लाता है और मेहमानों के चरणों को धोता है। 

प्रश्न 4. शब्दार्थ लिखिए – जुहार,  सुधि, अकुलाई,  किवार। 

उत्तर – जुहार       – अभिवादन
            सुधि        – खबर
            अकुलाई  – उत्सुकता
            किवार     – दरवाजा 


4. क्षितिज अटारी गहराई _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ सँवर के। 

प्रश्न 1. ‘क्षितिज अटारी’ से कवि का क्या अभिप्राय है? वहाँ किस-किस का मिलन हुआ? 

उत्तर –  क्षितिज अटारी से कवि का अभिप्राय है कि आकाश में बादल आ गए हैं,  यहाँ पर गहरे बादलों में बिजली चमकी और वर्षा शुरू होने लगी। यहाँ पर अथिति व उसकी पत्नी का मिलन हुआ है। 

प्रश्न 2. ‘क्षमा करो गाँठ खुल गई भरम की’ – पंक्ति के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि किसने,  किससे, कब तथा क्यों क्षमा माँगी? 

उत्तर – मिलन के उपरांत पत्नी के मन में जो भ्रम था,  वह दूर हो गया,  उसके भ्रम की गाँठ खुल गई अर्थात उसके मन की सारी शंकाएं दूर हो गई। जब पति-पत्नी का मिलन हुआ तो मिलन के अश्रु बह निकले तथा एक वर्ष के वियोग का बाँध भी मानो टूट गया। उसने मेहमान(अपने पति से) से क्षमा याचना की।

प्रश्न 3. ‘बाँध टूटा, झर-झर मिलन के अश्रु ढरके’ – आशय स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर - प्रस्तुत पंक्ति का आशय यह है कि जैसे ही मेहमान और उसकी पत्नी का मिलन हुआ वैसे ही पत्नी की पति के प्रति सभी शिकायतें दूर हो गई। कवि ने इस संबंध में कल्पना की है कि जब दोनों का मिलन हुआ तो बिजली-सी कौंध गई और मिलन के अश्रु बहने लगे मानो कि एक वर्ष के वियोग का बाँध टूट गया। 

प्रश्न 4. उपर्युक्त पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर – उपयुक्त पंक्तियों में कवि ने पति-पत्नी  के मिलने का सुंदर चित्र अंकित किया है। पत्नी के ह्रदय में पति के प्रति जो उलाहना व शिकायतें थी,  मिलन होते ही दूर हो गई। मेघों से वर्षा की छड़ी लगने को कवि ने आनंद एवं मिलन के अश्रु कहा है। बादलों का जल इस प्रकार बरसने लगा जैसे कि बाँध के टूटने पर पानी तेजी से बहने लगता हो। अतः भाव यह है कि पति-पत्नी का मिलन क्षितिज रूपी अटारी पर हुआ है। 

Friday, 31 July 2020

स्वर्ग बना सकते हैं


स्वर्ग बना सकते हैं
कवि - रामधारी सिंह 'दिनकर'

पद्यांशों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए – 

1.धर्मराज यह भूमि किसी की _ _ _ _ _ _ _ _ आशंकाओं से जीवन। 

प्रश्न – 1 कौन किसे उपदेश दे रहा है?  वक्ता ने उसे धर्मराज क्यों कहा है?  उसने भूमि और भूमि पर बसने वाले मनुष्यों के संबंध में क्या कहा है?  

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति में भीष्म पितामह धर्मराज युधिष्ठिर को उपदेश दे रहें हैं। भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को धर्मराज इसलिए कहा है क्योंकि उसने कभी भी अपना धर्म नहीं छोड़ा तथा दूसरों को धर्म पर चलने की प्रेरणा दी। उसने भूमि और भूमि पर बसने वाले मनुष्य के संबंध में कहा है कि इस पृथ्वी पर सभी लोग समान है और सभी को प्रकृति के तत्व(धरती, आकाश, धूप व हवा) समान रूप से मिलने चाहिए क्योंकि उन पर सभी का समान रूप से अधिकार है। 

प्रश्न – 2 उपर्युक्त पंक्तियों में ‘भूमि’ के संबंध में क्या कहा गया है तथा क्यों?  

उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियों में भूमि के संबंध में कहा गया है कि यह भूमि किसी की खरीदी हुई दासी नहीं है। इस भूमि पर जन्म लेने वाले हर एक मनुष्य का इस पर समान अधिकार है। उन्होंने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि कुछ लोगों से उनका अधिकार छीन लिया जाता है और ईश्वर द्वारा दी गई हर एक चीज से वंचित कर दिया जाता है। 

प्रश्न – 3 कवि के अनुसार मानवता के विकास के लिए क्या-क्या आवश्यक है? 

उत्तर – कवि के अनुसार मानवता के विकास के लिए मुक्त प्रकाश,  मुक्त वायु,  बाधा रहित विकास और  आशंका मुक्त जीवन अति आवश्यक है। इस पृथ्वी पर निवास करने वाले सभी लोगों का यह अधिकार है कि उनका बिना किसी बाधा के विकास हो।  उन्हें किसी भी प्रकार की चिंता अथवा भय का सामना न करना पड़े तथा सभी को प्रकृति के तत्व समान रूप से मिलें। मानवता के विकास के लिए यही सबसे आवश्यक है। 

प्रश्न – 4 उपयुक्त पंक्तियों द्वारा कवि क्या संदेश दे रहा है? 

उत्तर – पंक्तियों द्वारा कवि यह संदेश दे रहे हैं कि पृथ्वी पर जन्म लेने वाले सभी लोग समान है।  इसलिए उन्हें समान रूप से उनका अधिकार मिलना चाहिए।  ईश्वर द्वारा प्रदत्त प्रत्येक चीजों पर सभी का अधिकार है। किसी भी मनुष्य का अधिकार छीना नही जाना चाहिए और यही मानवता है। 

2. लेकिन विघ्न अनेक अभी _ _ _ _ _ _ _ _ शांति कहाँ इस भव को? 

प्रश्न – 1 ‘लेकिन विघ्न अनेक अभी इस पथ पर अड़े हुए है ‘ – कवि किस पथ की बात कर रहा है? उस पथ में कौन-कौन सी बाधाएँ हैं? 

उत्तर – उपर्युक्त पंक्ति में कवि मानवता रूपी विकास के पथ की बात कर रहे हैं। इस पथ पर अनेक प्रकार की कठिनाइयाँ समस्याएँ और बाधाएँ हैं,  जिससे मानव का समुचित विकास नहीं हो पाया है। कवि कहते हैं कि जब तक मनुष्य के न्याय के अनुसार अधिकारों को स्वीकार नहीं किया जाता,  जब तक उन्हें वे अधिकार नहीं मिल जाते,  तब तक समाज में शांति स्थापित नहीं हो सकती। 


प्रश्न – 2 धरती पर चैन और शांति लाने के लिए क्या आवश्यक है?  स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर – धरती पर चैन और शांति लाने के लिए आवश्यक है कि मनुष्य के न्यायोचित अधिकार उन्हें दिए जाएं। इसलिए कवि कहते हैं कि जब तक मनुष्यों के न्याय के अनुसार अधिकारों को स्वीकार नहीं किया जाता,  जब तक उनके अधिकार उन्हें मिलने न जाएं तब तक धरती पर चैन और शांति नही हो सकती। 

प्रश्न – 3 उपर्युक्त पंक्तियों का संदेश स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर – पंक्तियों में कवि  कहते हैं कि मानवता रूपी विकास के पथ में अनेक समस्याएँ तथा कठिनाइयाँ  हैं जो पर्वत बनकर उस मार्ग पर अड़े हैं। अतः मानवता रुपी विकास तथा समाज में शांति की स्थापना के लिए मनुष्यों को उनके न्यायोचित अधिकार मिलने चाहिए। 

प्रश्न – 4 उपर्युक्त पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियों का भावार्थ यह है कि मानवता रूपी विकास के पथ में अनेक समस्याएँ तथा कठिनाइयाँ  हैं जो पर्वत बनकर उस मार्ग पर अड़े हैं और इसलिए समाज का समुचित विकास नहीं हो पाया है। मनुष्यों को न्याय के अनुसार अधिकार देना अत्यावश्यक है तभी समाज में शांति स्थापित हो सकती है। 

3. जब तक मनुज-मनुज का यह _ _ _ _ _ _ _ _ और भोग – संचय में। 

प्रश्न – 1 ‘शमित न होगा कोलाहल’ – कवि का संकेत किस प्रकार के कोलाहल की ओर है?  यह कोलाहल किस प्रकार शांत हो सकता है?  

उत्तर – उपर्युक्त पंक्तियों में कवि का संकेत मनुष्यों को समान अधिकार न मिलने से उत्पन्न युद्ध तथा मतभेद जैसे कोलाहल की ओर है। यदि सभी मनुष्य को सुख प्राप्ति के समान अधिकार प्राप्त हो गए तो कोलाहल शांत हो सकता है। 

प्रश्न – 2 आज मानव के संघर्ष का मुख्य कारण क्या है?  कभी के इस संबंध में क्या विचार हैं? 

उत्तर – आज मानव के संघर्ष का मुख्य कारण यह है कि उन्हें प्रकृति के सभी साधन तथा समानता के आधार पर सबको समान अधिकार प्राप्त नहीं हो पाए हैं। कवि का इस संबंध में यह विचार है कि स्वार्थ से ग्रसित कुछ लोग दूसरों की चिंता किए बिना धन-संचय में लगे हुए हैं जिससे संदेह तथा भय का वातावरण बना रहता है। 

प्रश्न – 3 कवि के अनुसार आज का मनुष्य कौन-सी बात भूल गया है तथा वह किस प्रवृत्ति में फँस गया है? 

उत्तर – कवि के अनुसार मनुष्य मानवता को भूल गया है। वह स्वार्थी बनकर धन-संचय की प्रवृति में फँस  गया है। वह दूसरे के बारे में ना सोच कर केवल अपने स्वार्थ के बारे में सोचता है। 
प्रश्न – 4 ‘ लगा हुआ केवल अपने में और भोग-संचय में’ – पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर – उपर्युक्त पंक्ति का आशय यह है कि कुछ स्वार्थी व्यक्ति दूसरे के बारे में न सोचकर केवल अपने लिए धन संचय में लगे हुए हैं इसलिए समाज में असमानता विकसित होती है और दूसरों के अधिकारों का हनन होता है। परिणामस्वरूप संदेह और भय का वातावरण बन जाता है। 

4. प्रभु के दिए हुए सुख इतने _ _ _ _ _ _ _ _ स्वर्ग बना सकते हैं। 

प्रश्न – 1 ‘ प्रभु के दिए हुए सुख इतने हैं विकीर्ण धरती पर’ – पंक्ति द्वारा कवि क्या कहना चाहता है? 

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति द्वारा कवि यह कहना चाहते हैं कि ईश्वर के द्वारा इस पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में सुख के इतने साधन उपलब्ध है कि उससे भी मनुष्यों की सभी आवश्यकता पूर्ण हो सकती हैं। यदि स्वार्थी लोग अपने लिए संचय करने की भावना छोड़ दे तो पृथ्वी के साधनों का उपयोग सभी मनुष्य कर सकते हैं। अतः भाव यह है कि पृथ्वी पर सुख के साधनों की कमी नही है। 

प्रश्न – 2 ‘कहाँ अभी इतने नर’ – पति द्वारा कवि क्या समझाना चाहता है और क्यों? 

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति द्वारा कवि यह समझाना चाहते हैं कि पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में सुख के इतने साधन उपलब्ध है कि उसमें हर एक मनुष्य अपनी जरूरतों को पूरा कर सकता है तथा उपभोग करने के बाद भी वे साधन बच जाएंगे अतः इसलिए कवि  कहते हैं कि इस पृथ्वी पर अभी इतने मनुष्य भी मौजूद नही जो पृथ्वी पर मौजूद भोग-सामग्री को समाप्त कर सकें। 

प्रश्न – 3 उपर्युक्त पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर -  उपर्युक्त पंक्तियों में कवि यह कहते हैं कि इस धरती पर ईश्वर द्वारा प्रदत सुख के इतने साधन है कि उससे सभी मनुष्यों  की आवश्यकताएं पूर्ण हो सकती है यदि कोई व्यक्ति अपने लिए संचय की दुष्ट प्रवृत्ति त्याग दें तो सबके भोगने के बाद भी खाद्य सामग्री समाप्त बची रह जाएगी। अतः कहने का भाव यह है कि इस पृथ्वी पर अभी इतने मनुष्य भी मौजूद नही जो इस पर मौजूद भोग-सामग्री को समाप्त कर सकें। 

प्रश्न – 4 कवि के अनुसार इस पृथ्वी को स्वर्ग किस प्रकार बनाया जा सकता है? 

उत्तर – कवि के अनुसार इस धरती पर सभी मनुष्य समान रूप से जन्म लेते हैं और जन्म लेते ही धरती पर समस्त संसाधनों पर उनका समान अधिकार बनता है। यदि सभी मनुष्यों को न्यायोचित अधिकार प्राप्त हो तथा सभी स्वार्थी व्यक्ति अपने बारे में न सोचकर दूसरे के बारे में सोचें और सभी को समान अधिकार और पृथ्वी पर उपस्थित समान भोग सामग्री प्राप्त हो तो निश्चय ही पृथ्वी को स्वर्ग बनाया जा सकता है। 

Clas 8 Ch 8, मन भावन सावन कविता

पाठ - 6  मन भवान सावन  पुस्तक से कविता के शब्द अर्थ करें। • नीचे दिए गई पंक्तियों को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:- झम-झम_ _ _ _...