Monday, 19 January 2026

Class 7 : पाठ 12: साइना नेहवाल:



भारत में प्रायः लोग परिवार की पूर्णता के लिए पुत्र की ही कामना करते हैं। पुत्री की अपेक्षा पुत्र को अधिक महत्व दिया जाता है। यह उचित नहीं है। इस रूढ़िवादी मानसिकता में परिवर्तन लाने के लिए भारत सरकार ने **“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”** अभियान की शुरुआत की। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन लाना है।

इस अभियान के मुख्य उद्देश्य हैं—

* लिंग के आधार पर भेदभाव का निषेध
* बालिकाओं का संरक्षण एवं संवर्धन
* बालिकाओं की शिक्षा और सहभागिता

इस अभियान को बढ़ावा देने के लिए भारत की युवा पुत्री, पद्मश्री से सम्मानित **साइना नेहवाल** अपना योगदान दे रही हैं। उन्हें कौन नहीं जानता?

साइना नेहवाल भारतीय युवतियों के लिए एक आदर्श हैं। साइना का जन्म हरियाणा राज्य के हिसार जिले में 17 मार्च 1990 को हुआ। उनके पिता का नाम हरवीर सिंह और माता का नाम उषा रानी है। माता-पिता की पहली संतान चंद्रांशु थीं। पहली पुत्री के जन्म के सात वर्ष बाद साइना का जन्म हुआ। दूसरी बार भी बेटी के जन्म के कारण उनकी दादी को अत्यधिक दुःख हुआ था। परंतु यही बेटी अपने परिश्रम से पूरे परिवार और देश की कीर्ति को पूरे विश्व में बढ़ाने वाली बनी।

वे अत्यंत प्रातः छह बजे उठकर घर से 20 किलोमीटर दूर खेल मैदान जाती थीं। वहाँ दो घंटे अभ्यास करके विद्यालय जाती थीं। सायंकाल पुनः खेल मैदान जाकर अभ्यास करती थीं। इसमें उनके माता-पिता का बहुत बड़ा योगदान था। साइना के साथ उनके माता-पिता ने भी संघर्ष किया।

पूर्व में वे अनेक बार पराजित हुईं, किंतु बैडमिंटन प्रतियोगिताओं के लिए उनके मन में दृढ़ संकल्प था। गुरुओं के मार्गदर्शन और वरिष्ठों की सहायता से उन्होंने अपना लक्ष्य प्राप्त किया।

वर्तमान में भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों में साइना नेहवाल सर्वोत्तम हैं। विश्व बैडमिंटन महासंघ द्वारा उन्हें प्रथम स्थान पर घोषित किया गया है। उन्होंने कराटे में भी ‘ब्राउन बेल्ट’ की उपाधि प्राप्त की है। साइना पहली भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्होंने बैडमिंटन प्रतियोगिता में यह ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की। उन्होंने लंदन ओलंपिक 2012 में कांस्य पदक जीता। इसके अतिरिक्त प्रकाश पादुकोण के बाद वे दूसरी भारतीय (और पहली भारतीय महिला) हैं जिन्होंने विश्व में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

उनके जीवन से हमें यही संदेश मिलता है कि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता। निरंतर मेहनत से ही हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। साइना नेहवाल 120 करोड़ भारतीयों का गौरव हैं और सभी भारतीय महिलाओं की प्रतिनिधि हैं।

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