बाल्यकाल से ही आकाश में उड़ते हुए विमानों को देखकर तथा मिसाइल बनाने की इच्छा और लकड़ी की नावें देखकर इंजीनियर बनने की आकांक्षा उसके मन में उत्पन्न हुई। समाचार-पत्रों में महान व्यक्तियों के चित्र देखकर वह सोचता था — “क्या मैं जीवन में इन सबको प्राप्त कर पाऊँगा या नहीं?”
निरंतर परिश्रम करके वह बालक एक महान वैज्ञानिक बना। वह वैज्ञानिक कोई और नहीं बल्कि हमारे डॉ० ए० पी० जे० अब्दुल कलाम थे। वे अत्युत्तम शिक्षक, बच्चों के प्रिय, युवाओं के प्रेरणास्रोत, भारत के राष्ट्रपति, प्रत्येक भारतीय के आदर्श, मृदुभाषी, प्रकृति-प्रेमी, विश्वमानव थे — और भी बहुत कुछ।
अब्दुल कलाम ने कहा -
जो हम नींद में देखते हैं, वे स्वप्न नहीं होते;
जो हमें नींद से जाग्रत कर दें, वही सच्चे स्वप्न होते हैं।
संस्कृत साहित्य वैज्ञानिक सिद्धांतों और प्रयोगों का भंडार है। संस्कृत साहित्य में उत्कृष्ट विमान विद्या विद्यमान थी।
प्राचीन वैज्ञानिकों और विद्वानों के कार्यों का आधुनिक विज्ञान के साथ समन्वय किया जाना चाहिए।
ऋग्वेद सदैव स्मरणीय है —
“आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः।”
अर्थात् — सभी दिशाओं से उत्तम विचार हमारे मन में आएँ।
हमारे विद्यालय देश की प्रयोगशालाएँ होने चाहिए।
बालकों को तीन बातों का स्मरण रखना चाहिए —
(क) स्वयं अच्छे से पढ़ें।
(ख) दूसरों को भी पढ़ाएँ।
(ग) प्रत्येक बालक या युवक पाँच वृक्ष अवश्य लगाए।
अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों में मैंने वेद, कुरान और भगवद्गीता से ही मार्गदर्शन प्राप्त किया। ये पुस्तकें जीवन-दर्शन की पुस्तकें हैं, इसलिए इनका नियमित अध्ययन करना चाहिए।
विश्वमानव कलाम को नमन। 🙏
No comments:
Post a Comment