Monday, 20 July 2026

Class 8, पाठ 1 प्रभातवेला

पाठ - 1
प्रभातवेला 


सुबह चार बजे से लेकर सूर्योदय (सूरज निकलने) से पहले तक के समय को प्रभातवेला कहते हैं। यह समय बहुत स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि देने वाला होता है।
रात बीतने के बाद प्रभातवेला आती है। प्रातःकाल की सुंदरता अत्यंत मनमोहक होती है। प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त से शुरू होता है और सूर्योदय तक प्रभातवेला ही मानी जाती है। यह समय लगभग 24 घंटे के चक्र में सूर्योदय तक सीमित रहता है।
प्रभातवेला की प्रकृति अत्यंत सुंदर और मनोहर होती है। एक तरफ सूर्योदय का लाल रंग, दूसरी तरफ हरी-भरी हरियाली और पश्चिम दिशा में पक्षियों का मधुर कलरव शांत वातावरण को जीवंत बना देता है। जंगलों, बगीचों, नदी किनारों और खेतों में ठंडी, मंद और सुगंधित हवा चलती है। प्रभातवेला में शुद्ध हवा के कारण स्वास्थ्य अच्छा रहता है। इसलिए बुद्धिमान पुरुष, स्त्रियाँ और बच्चे प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाते हैं।
युवा व्यायाम करते हैं और शक्ति तथा स्वास्थ्य प्राप्त करते हैं।
सुबह के समय पेड़ों की हरी-भरी छाया, फूलों की सुगंध और घूमने वाले लोगों के नेत्रों तथा मन को प्रसन्न कर देती है। ब्रह्म मुहूर्त में विद्यार्थी उठकर विद्याध्ययन करते हैं। पढ़े हुए पाठों का अभ्यास करते हैं और बहुत से विषयों को रट लेते हैं।
इस प्रकार प्रभातवेला में सभी लोग प्रसन्नतापूर्वक अपने-अपने कामों में लगे दिखाई देते हैं। ताज़ी हवा और ओषधि गुण वाली वायु से लोगों की लक्ष्य शक्ति बढ़ती है, शरीर स्वस्थ रहता है और वे शांति का अनुभव करते हैं।
इसलिए हमें हमेशा सूर्योदय से पहले उठना चाहिए, बगीचों में घूमना चाहिए और घर आना चाहिए।
फिर स्नान करके विद्याभ्यास, अन्य कामों या व्यवहार में लग जाना चाहिए।

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