Thursday, 23 July 2026

Class 8, पाठ 1 प्रभातवेला

पाठ - 1
प्रभातवेला 


​रात बीत जाने पर प्रभात (सुबह) का समय आता है। प्रातःकाल की सुंदरता अत्यंत रमणीय (सुंदर) होती है। प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त के समय सुबह चार बजे से शुरू होता है और सूर्योदय तक का समय प्रभातवेला (सुबह का समय) ही कहा जाता है। यह समय चौबीसों घंटों में सबसे श्रेष्ठ और सर्वोत्तम होता है।
​प्रभातकाल में प्रकृति की शोभा भी अत्यंत मनमोहक होती है। एक ओर सूर्योदय के समय सूर्य का लाल बिंब (गोला) मन को हर लेता है, तो दूसरी ओर सोकर उठे हुए पक्षी अपनी मधुर चहचहाहट से शांत भूमंडल को संगीत से भर देते हैं। वनों में, बगीचों में, नदी के तटों पर और खेतों में ठंडी, मंद और सुगंधित हवा बहती है। सुबह के समय शुद्ध वायु में घूमने से स्वास्थ्य बढ़ता है। इसलिए बुद्धिमान पुरुष, स्त्रियां और बच्चे सुबह टहलने के लिए जाते हैं, और युवा व्यायाम करते हैं तथा शक्ति और स्वास्थ्य प्राप्त करते हैं।
​प्रातःकाल वृक्षों की हरी-भरी शोभा और फूलों की सुगंध टहलने वाले लोगों के नेत्रों और मन को प्रसन्न करती है। ब्रह्ममुहूर्त में अध्ययनशील (पढ़ने वाले) विद्यार्थी उठकर विद्या प्राप्त करते हैं। वे पढ़े हुए पाठों का अभ्यास करते हैं और कई विषयों को कंठस्थ (याद) करते हैं।
​इस प्रकार प्रभातवेला में प्रसन्न हुए सभी लोग अपने-अपने कार्यों में लगे हुए दिखाई देते हैं। ऑक्सीजन युक्त वायु से शक्ति प्राप्त करके लोग शाम तक स्वस्थ मन और शरीर से काम करते हैं और थकान का अनुभव नहीं करते हैं।
​इसलिए, हमें भी हमेशा सूर्योदय से पहले ही उठकर उद्यानों (बगीचों) आदि में नियमानुसार/समय पर घूमकर घर वापस आना चाहिए। इसके बाद स्नान करके पढ़ाई में और अपने अन्य दैनिक कार्यों में लग जाना चाहिए।

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