Monday, 20 July 2026

sanskrit Class 6 path 9 ahm vriksha asmi

मैं वृक्ष हूँ। पादप, तरु, वितप — ये सभी मेरे ही नाम हैं। मैं स्वयं धूप में खड़ा रहता हूँ और दूसरों को छाया प्रदान करता हूँ। मेरी शाखाओं में पक्षी घोंसले बनाते हैं। मेरे फल पशुओं के लिए आहार बनते हैं। मेरे फल, फूल, पत्ते, लकड़ी, जड़ें और छोटी-छोटी टहनियाँ — मेरा हर अंग दूसरों के हित के लिए होता है।
मैं वातावरण को शुद्ध करता हूँ। वर्षा के मौसम में भी मैं सहायक हूँ। मैं ही जल-प्रलय से धरती की रक्षा करता हूँ। मेरे बिना घरों, जंगलों और बगीचों की शोभा नहीं है। मूर्ख लोग छोटे-छोटे लाभ के लिए मुझे काटते हैं। इससे मुझे बहुत कष्ट होता है।
वृक्षों के जीवन से ही संसार का जीवन है। इसलिए हमारी रक्षा करना मानव का कर्तव्य है। हम तो दूसरों के कल्याण के लिए ही जीते हैं। कवि सत्य कहते हैं —
जो अपना सर्वस्व अर्पित करते हैं,
पराये हित के लिए ही,
वे वृक्ष सदैव जीवित रहें,
पृथ्वी पर सज्जनों की तरह॥

No comments:

Post a Comment

sanskrit Class 6 path 9 ahm vriksha asmi

मैं वृक्ष हूँ। पादप, तरु, वितप — ये सभी मेरे ही नाम हैं। मैं स्वयं धूप में खड़ा रहता हूँ और दूसरों को छाया प्रदान करता हूँ। मेरी शाखाओं में ...