संसार में अन्य नष्ट हुई वस्तुएँ पुनः प्राप्त की जा सकती हैं, परंतु बीता हुआ समय किसी भी उपाय से पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता। किसी व्यक्ति की आयु का जो हिस्सा व्यर्थ चला गया, वह चला ही गया। अतः ऐसा प्रयत्न करना चाहिए जिससे एक क्षण का भी दुरुपयोग न हो, क्योंकि समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता।
संसार में बहुत से लोग व्यर्थ में ही इधर-उधर घूमकर समय बिताते हैं। कुछ लोग तो आलस के कारण निरंतर बैठे ही रहते हैं। आलस के कारण वे अपने दैनिक कार्य भी नियम से नहीं करते। इसलिए वे रोगी हो जाते हैं। कुछ आलसी लोग तो खेलने में या सोने में ही अपना सारा समय बिता देते हैं और अपने जीवन के बहुमूल्य हिस्से को व्यर्थ गँवा देते हैं।
समय का सदुपयोग जीवन की सफलता की पहली सीढ़ी, उन्नति का मूल मंत्र और आत्म-निर्माण का उत्तम साधन है। प्रकृति भी हमें यही शिक्षा देती है कि किसी को भी समय का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। जो लोग कभी भी समय का दुरुपयोग नहीं करते और सदैव काम में लगे रहते हैं, वे सुख से रहते हैं। ऐसे कर्मवीर ही सब जगह श्रेष्ठ पद प्राप्त करते हैं।
छात्रों के लिए तो समय का सदुपयोग ही उन्नति का साधन है। जो छात्र समय का सदुपयोग करके पढ़ाई करते हैं, वे अपने जीवन में सफल होते हैं। इस प्रकार समय का सदुपयोग मनुष्यों के कल्याण के लिए होता है।
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